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विश्व थैलेसीमिया दिवस आज:तिल्ली का ऑपरेशन करा चुके लोगों में काेरोना अटैक का खतरा ज्यादा, थैलेसीमिया मरीजों के लिए शुरू होंगे सिरम फेरिटन टेस्ट

राेहतकएक महीने पहले
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  • डॉ. अलका ने आनुवांशिक रोग से बचाव के लिए किया जागरूक

पीजीआईएमएस में जल्द ही थैलेसीमिया मरीजों की सहूलियत के लिए सिरम फेरिटन टेस्ट शुरू किए जाएंगे। यह टेस्ट सुविधा शुरू होने से मरीजों को दूसरे प्रदेशों के लिए नहीं जाना पड़ेगा। थैलेसीमिया मरीजों को हर 3 से 4 माह बाद सिरम फेरिटिन जांच कराने की जरूरत पड़ती है।

यह जानकारी शुक्रवार को पीजीआई के शिशु रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. अलका यादव ने दी। उन्होंने बताया कि 8 मई को पूरे विश्व में थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष पीजीआई में भी यह दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों का तिल्ली का ऑपरेशन हो रखा है उन मरीजों में कोविड-19 से खतरे की संभावना ज्यादा रहती है। यह मरीज भी आमजन की भांति कोविड-19 वैक्सीन लगवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों को खान-पान की विशेष सावधानी रखनी होती है।

अपने लौह तत्व की मात्रा कंट्रोल में रखने के लिए समय पर दवाई लेते रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संस्थान में मरीजों की काउंसलिंग के लिए काउंसलर भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है, जिसकी वजह से शरीर में खून की कमी हो जाती है। आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति में लाल रक्त कोशिकाएं 120 दिन तक रहती हैं, लेकिन थैलेसीमिया के रोगियों में यह कोशिकाएं सिर्फ 15 से 20 दिन में खत्म हो जाती है। इसके चलते मरीजों में खून की कमी हो जाती है। उन्हें जल्दी-जल्दी खून चढ़ाना पड़ता है।

इन लक्षणों से रोग की पहचान करें: डॉ. अलका

प्रोफेसर डॉ. अलका ने बताया कि थैलेसीमिया के लक्षणों में खून कम हो जाना, वजन ना बढ़ना, थकान और कमजोरी रहना, शरीर का विकास ना होना, शरीर का पीला पड़ जाना, सांस लेने में दिक्कत होना, असामान्य दिखना आदि शामिल हैं। यदि समय रहते बीमारी की पहचान कर इलाज शुरू न किया जाए तो मरीज की जान का जोखिम हो सकता है।

उन्होंने बताया कि इसके बचाव के लिए इसकी पहचान सबसे अधिक जरूरी है। यह बच्चे के जन्म के समय से ही शुरू होता है। करीब तीन चार महीने बाद बच्चे में इसके लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को अतिरिक्त खून चढ़ाना पड़ता है। इसकी वजह से शरीर में कई बार लोह तत्वों की मात्रा अधिक होने के चलते जान का खतरा हो जाता है।

रक्त की कमी से मरीजों को आ रही परेशानी

प्रोफेसर डॉ. अलका ने बताया कि शादी से पहले लड़का व लड़की की रक्त की जांच करवाएं, गर्भावस्था के दौरान इसकी जांच करवाएं, मरीज का हीमोग्लोबिन 10 से 11 ग्राम के बीच रखें, समय पर दवाइयां ले इलाज पूरा करें। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के चलते आजकल रक्त की काफी कमी हो रखी है जिसके चलते थैलेसीमिया के मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ऐसे में स्वैच्छिक रक्त दाताओं को आगे आकर इन मरीजों को बचाने के लिए रक्तदान करना चाहिए।

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