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सर्द रातों में छत नहीं:पीजीआई ने विश्राम सदन को कर्मियों का क्वॉरेंटाइन सेंटर बनाया, तीमारदार ठंड में बाहर सोने को मजबूर

रोहतक2 महीने पहले
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पीजीआई वार्ड दाे के ऊपर लाेगाें के लिए बना कमरा फुल हाेने पर ठंड में बाहर जमीन पर साेते हुए। - Dainik Bhaskar
पीजीआई वार्ड दाे के ऊपर लाेगाें के लिए बना कमरा फुल हाेने पर ठंड में बाहर जमीन पर साेते हुए।
  • पीजीआई में मरीजों के परिजन स्ट्रेचर व फर्श पर सोने को मजबूर, प्रबंधन का दावा- जल्द करेंगे व्यवस्था

सर्दी की शुरुआत के साथ ही अब रात का तापमान 6.6 डिग्री तक पहुंच चुका है। रात में सर्द हवा के थपेड़ों के बीच पीजीआई में मरीजों के परिजन खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं। सरेआम खुले में तीमारदार कंबल में लिपटे किसी तरह रात बिताते हैं। आधे से ज्यादा तो अलाव के सहारे जागकर रात काटते हैं। कोविड में व्यस्तताओं का तर्क देकर पीजीआई प्रबंधन इनके दर्द की अनदेखी करते हुए सब ऑल इज वेल का दावा कर रहा है।

पीजीआई के विश्राम गृह में कर्मचारियों के लिए क्वाॅरेंटाइन सेंटर बनाया हुआ है। दूसरे जिलों से आने वाले मरीज व परिजन विश्राम सदन में रात बिता लिया करते थे लेकिन अब यह सुविधा बंद है। यहां पर काफी लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। दूर-दराज से आने वाले मरीजों के तीमारदारों के लिए यह स्थान उचित था क्योंकि पीजीआई के पास अन्य कोई होटल व धर्मशाला भी नहीं है। अब परिजनों को यह पता नहीं है कि वो रात बिताने के लिए किधर जाएं।

पीजीआई की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. पुष्पा दहिया अस्थायी रैन बसेरा बनाने के लिए प्लानिंग कर रही हैं। हालांकि यदि पीजीआई प्रशासन नगर निगम से बात करे तो उनके पास दो पोटा कैबिन खाली पड़े हैं। उन्हें पीजीआई में रखवाकर उनके अंदर सोने की व्यवस्था की जा सकती है। अभी यह खाली पड़े हैं। नगर निगम प्रशासन का भी कहना है यदि कहीं से उनके पास मांग आएगी तो इन पोटा कैबिन को रखवाने की योजना बनाई जाएगी। दैनिक भास्कर ने पीजीआई के इस सच को जानने के लिए वहां के हालात जानें।

रात एक बजे लैब से मिलनी है रिपोर्ट, इंतजार में फर्श पर ही सो गए
खेरड़ी गांव से भारतभूषण और ज्याेति ने बताया कि शाम काे पीजीआई में इलाज के लिए आए ताे डाॅक्टराें ने टेस्ट करवाने काे कहा। टेस्ट करवाने के बाद रिपाेर्ट रात एक बजे के आसपास मिलने की बात कही गई। कहीं ठहरने की जगह हाेती ताे वहां जाकर रुक जाते। लेकिन किसी ने काेई जगह नहीं बताई और मजबूरन ठंड में फर्श पर ही इंतजार करते करते सो गए।

अस्थाई रैन बसेरा बनाने के लिए उच्चाधिकारियों से सहमति ली जाएगी
पीजीआई कैंपस में सबसे ज्यादा मरीजों के परिजन गायनी वार्ड के बाहर ही आकर रुकते हैं। इसलिए गायनी वार्ड के बाहर महिलाओं के रूकने के लिए एक शेल्टर होम बनवाया है। ठहरने के लिए दो कमरे बने हुए हैं जिनमें पुरुषों के रुकने की व्यवस्था की गई है। कोविड ड्यूटी देने वाले कर्मियों के लिए विश्राम सदन में क्वाॅरेंटाइन सेंटर बनाया हुआ है। यदि फिर भी लोगों को दिक्कत आती है तो डायरेक्टर के साथ मीटिंग कर अस्थाई रैन बसेरा बनाने के मुद्दे पर चर्चा करके फैसला लिया जाएगा। सर्द रातों में मरीजों के परिजनों को छत मिले, इसके लिए प्रयास किया जाएगा। -डॉ. पुष्पा दहिया, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, पीजीआईएमएस, रोहतक।

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