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अपराध होश खोकर अपने ही बन रहे हैवान:रंजिश व प्रॉपर्टी विवाद में हमलावर डंडे व लोहे की रॉड से सिर फोड़ कर रहे हत्या

रोहतक2 दिन पहले
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फाइल फोटो।
  • पीजीआई के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के एचओडी की ओर से दो साल में हुए पोस्टमार्टम के आंकड़ों पर की स्टडी में खुलासा

(विवेक मिश्र) प्रदेश में सर्वाधिक हत्या के मामलों में पुरानी रंजिश व प्राॅपर्टी विवाद वजह बन रही है। ऐसे विवादों में दोनों पक्षों के बीच होने वाले जानलेवा हमले में सर्वाधिक 21 से 60 साल से आयु वर्ग के लोगोंं में लाठी-डंडे व गाेली मारकर हत्या करने के केस मिले हैं। स्टडी में सामने आया है कि प्रदेश में होने वाले विवाद में हमलावर ज्यादातर सिर पर चोट मारकर गंभीर रूप से जख्मी कर रहे हैं, जिससे गंभीर रूप से जख्मी व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो जाती है या फिर वो इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ देता है।

यह खुलासा पंडित बीडी शर्मा पीजीआईएमएस, रोहतक की फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष व सीनियर प्रोफेसर डॉ. एसके धत्तरवाल ने वर्ष जनवरी 2017 से दिसंबर 2019 के बीच 100 मृतकों के पोस्टमार्टम के केस की स्टडी में किया है। उन्होंने बताया कि इस स्टडी में 84 पुरुष और 16 महिलाओं सहित 100 केस लिए गए थे। 27 फीसदी केस में युवा मिले। 37 फीसदी केस मानसून सीजन और 26 फीसदी केस मानसून के बाद पाए गए हैं।

सर्वाधिक 38 फीसदी जानलेवा हमले और हत्या केस की समयावधि शाम छह से 11 बजे और दोपहर 12 बजे से शाम 5:59 बजे, सुबह छह बजे से 11:59 बजे तक के बीच मिले हैं। प्रॉपर्टी विवाद के 22 फीसदी और पुरानी रंजिश के 34 फीसदी केस सामने आए हैं। सर्वाधिक हमलों में लाठी, डंडे व बंदूकों का इस्तेमाल करते हुए सिर पर चोट किए गए हैं।

इन आयु वर्ग में ज्यादा केस
आयु वर्ग केस

21-30 15
31-40 27
41-50 27
51-60 11
81-90 10

वर्ष 2017 के जनवरी माह से वर्ष 2019 दिसंबर माह में मृतकों के पोस्टमार्टम के केस में 100 मृतकों की स्टडी से पता चला है कि सबसे अधिक हमला मॉनसून के मौसम में सितंबर में जून में होता है, जबकि गर्मी के सीजन में भी घरों में हत्या जैसी घटनाएं होती हैं। अधिकांश मामले गंभीर रूप से जख्मी व्यक्ति तीन दिनों से अधिक समय तक जीवित रहे। हमलावर वारदात के समय आसपास पड़े लाठी डंडों से सामने वाले शख्स के सिर पर गंभीर चोट करते हैं। जिससे जख्मी व्यक्ति की मौत हो जाती है। अन्य प्रदेशों की अपेक्षा में हरियाणा में अभी विवाद के केस में लाठी डंडे व लोहे की राड का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। -डॉ. एसके धत्तरवाल, विभागाध्यक्ष, फॉरेंसिक मेडिसिन, पीजीआईएमएस, रोहतक।

क्राइम में इस्तेमाल हथियार
केस संख्या
चाकू 9
लोहे की रॉड व डंडा 26
बंदूक 21
कुल्हाड़ी 10

मौत की वजह केस
हेड इंजरी 31
बंदूक से हमला 19

अंग प्रभावित केस
ब्रेन 43
हार्ट 7
लंग्स 8
मल्टी आर्गन प्रभावित 13

इन सीजन में ज्यादा मिले केस

  • जून से सितंबर माह तक चलने वाले मानसून सीजन में 100 में से 37 हत्या के केस मिले।
  • मानसून सीजन के बाद अक्टूबर व नवंबर माह में 26 केस मिले।
  • गर्मी के सीजन मार्च से मई माह में 19 केस पाए गए।
  • सर्दी के सीजन में दिसंबर, जनवरी व फरवरी माह में 18 केस मिले हैं।

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