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कैसे होगी पढ़ाई:छठी से आठवीं तक के स्कूल 23 से खुलेंगे, स्टूडेंट बिना यूनिफाॅर्म व किताबाें के पहुंचेंगे

रोहतक13 दिन पहले
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  • सत्र शुरू होने के बाद भी छात्रों को किताबों, जूते-ड्रेस के रुपए नहीं मिले

भले ही शिक्षा विभाग ने छठी से आठवीं कक्षा के स्कूलों काे 23 जुलाई से खाेलने की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन शिक्षा विभाग की कमजोर तैयारियों से अभिभावकों में रोष है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर विद्यार्थियों के पास न ही पढ़ने के लिए किताबें हैं औैर न ही बच्चों के खातों में किताब खरीदने के रुपए डाले गए।

स्कूल खुलने के केवल दो दिन बाकी हैं, लेकिन अधिकारियों की माने तो विद्यालय शिक्षा निदेशालय की तरफ से अभी तक किताबों, यूनिफाॅर्म या जूतों के रुपए विद्यार्थियों के खातों में डालने संबंधी कोई पत्र नहीं मिला है। 16 जून से शिक्षा विभाग की ओर से ऑनलाइन माेड के माध्यम से स्कूल शिक्षकों काे क्लास लगाने के निर्देश दे दिए गए थे, लेकिन मुद्दा यह था कि बच्चों के पास किताब नहीं होने के कारण वह अपनी पढ़ाई जारी कैसे रख सकेंगे। ज्यादतर विद्यार्थी सीनियर की किताबों से पढ़ रहे हैं।

विभाग की ओर से स्कूलों से नहीं मांगा गया किताबों का टेंडर
शिक्षा विभाग स्कूलों में दी जाने वाली किताबों का टेंडर फरवरी या मार्च तक लेता है, लेकिन साढ़े तीन माह बाद तक भी विभाग द्वारा नई किताबों का टेंडर जारी नहीं किया गया है। स्कूल मुखियाओं के मुताबिक पुराने बच्चों की किताबों काे सबमिट करा लिया हैं। परंतु कुछ किताबें ज्यादा पुरानी होने के कारण प्रयोग के लायक नहीं हैं।

न किताबों के रुपये मिले और न जूते-ड्रेस के
सत्र 2020-21 में भी विद्यार्थियों को ना किताबों के रुपये मिले थे ना जूते-ड्रेस की पेमेंट खाते में आई। हालांकि अधिकारी गत सत्र में कोविड के चलते ऑनलाइन स्टडी का हवाला दे रहे हैं, लेकिन इस बार स्कूल शुरू होने वाले हैं। ऐसे में स्कूलों में 70 फीसदी विद्यार्थी बिना ड्रेस-जूतों या किताबों के पहुचेंगे। क्योंकि नए दाखिला लेने वालों के पास ना किताबें होंगी या स्कूल की ड्रेस और जूते।

घर खर्च चलाना मुश्किल कहां से दिलाएं किताबें

पहले ताे बच्चों काे किताबें स्कूल से मिल जाती थी, लेकिन न ताे इस बार बच्चों काे किताबें मिली औैर न ही उनके खातों में रुपए आए हैं। काेराेना के कारण प्राइवेट नौकरी भी छूट चुकी है। घर खर्च ही बड़ी मुश्किल से चलता है। ऐसे में बच्चों काे कैसे किताब दिला पाएंगे।-सोहनलाल, जनता कॉलोनी, अभिभावक

काेराेना के चलते काम भी गया, किताबें कहां से लाएं

पहले ताे दिहाड़ी मजदूरी कर बच्चों का लालन पालन कर लेते थे। काेराेना के चलते वह भी बंद हाे चुकी है। बच्चों की पढ़ाई का कुछ खर्च स्कूल में किताब मिलने से कम हाे जाता था। 23 जुलाई से स्कूल खुल जाएंगे। लेकिन अभी तक बच्चों काे किताब नहीं मिली हैं। वह बिना किताब के कैसे पढ़ सकेंगें।-अर्जुन, देव कॉलोनी, अभिभावक

अभी किताबाें के रुपए संबंधी पत्र नहीं मिला

किताबें खरीदने के लिए विभाग की ओर से सीधे विद्यार्थियों के अकाउंट में रुपए डाले जाते हैं। शिक्षा विभाग की ओर से विद्यार्थियों की संख्या का डेटा भी एमआईएस पोर्टल से डायरेक्ट उठाया जाता है। अभी तक किताबों के रुपये डालने संबंधी कोई पत्र नहीं मिला है।-आदर्श राजन, डिप्टी डीईईओ

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