एसडीओ बीके जैन के खिलाफ शिकायतों के मामला:एसई विजिलेंस ने साढ़े 6 घंटे खंगाले दस्तावेज, अधिकारियों और कर्मचारियों से की पूछताछ

रोहतक3 महीने पहले
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  • एसडीओ बीके जैन के खिलाफ शिकायतों के मामले में चंडीगढ़ मुख्यालय से एसई विजिलेंस पहुंचे

पब्लिक हेल्थ विभाग के एसडीओ बीके जैन के खिलाफ पानी की आपूर्ति, मेंटेनेंस वर्क समेत कई शिकायतों के मामले में चंडीगढ़ मुख्यालय से एसई विजिलेंस विक्रम सिंह माथुर शुक्रवार को रोहतक पहुंचे। उन्होंने करीब साढ़े 6 घंटे आरोपी एसडीओ के अलावा जेई सहित स्टाफ और एसई राजीव गुप्ता और एक्सईएन भानु प्रकाश शर्मा से भी सवाल पूछे। इसके पहले ही चीफ इंजीनियर के आदेश पर एसडीओ बीके जैन से तीन दिन पहले ही रोहतक शहर का अतिरिक्त चार्ज छीन लिया गया है। उनकी जगह सांपला के एसडीओ अनिल रोहिल्ला को रोहतक शहर का अतिरिक्त चार्ज सौंपा गया है।

फिलहाल बीके जैन कलानौर एरिया का पब्लिक हेल्थ का कार्य देख रहे हैं। यहां से भी उनके खिलाफ पार्षदों ने सामूहिक शिकायत दी है। एसई विजिलेंस विक्रम सिंह माथुर करीब 12 बजे झज्जर रोड स्थित पब्लिक हेल्थ विभाग के कार्यालय पहुंचे। सबसे ज्यादा समय उन्होंने एसडीओ बीके जैन के साथ पूछताछ और जरूरी कागज की पड़ताल में व्यतीत किया। इसके बाद उन्होंने शहर में तैनात पब्लिक हेल्थ के जेई व फील्ड स्टॉफ से भी सवाल पूछे।

खास बात अधिकारियों के बयान बाकायदा रिकॉर्ड किए गए हैं। चंडीगढ़ मुख्यालय से शीर्ष अधिकारी पब्लिक हेल्थ विभाग की जांच मामले में अगले सप्ताह दोबारा रोहतक आ सकते हैं। फिलहाल एसई विजिलेंस विक्रम सिंह माथुर शुक्रवार ने हर पहलू की जांच कर आवश्यक कागजात हासिल कर लिए हैं। लेकिन ऐसा बताया जा रहा है कि अभी तक बयान के हिसाब से कागज पूरे नहीं मिल पाए हैं। लिहाजा जांच टीम 15 अगस्त से पहले किसी भी दिन दोबारा रोहतक आ सकती है।

ऐसे समझिए एसडीओ के खिलाफ क्यों बैठी जांच

  • रोहतक शहर में पानी की आपूर्ति से जुड़े सभी कार्य 50-50 हजार रुपए के टुकड़े में खास एजेंसी से कराए जाते रहे।
  • पाइप लाइन की मेंटेनेंस व खराब हुई मशीनरी के पार्ट्स डेढ़ गुना से भी ज्यादा कीमत पर खरीदे गए।
  • काम किसी ठेकेदार से कराया, बिल और के पास कराए गए।
  • 70 लाख रुपए बजट के बिजली मेंटेनेंस के टेंडर एक ही एजेंसी को वह भी ऑफलाइन देने की तैयारी, शिकायत पर किया बदलाव। फिर भी करीब 30 लाख के टेंडर उसी एजेंसी के लगा दिए गए।
  • कलानौर नगरपालिका के पार्षदों ने कस्बे में गंदे पानी की आपूर्ति होने और एसडीओ के अपने कार्यालय में नहीं बैठने की लिखित में दी शिकायत।
  • जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति के सदस्य रामदिया अत्री भी चीफ इंजीनियर पब्लिक हेल्थ से एसडीओ के खिलाफ जांच की मांग कर चुके।

जुलाई के तीसरे सप्ताह में एसई व एक्सईएन मुख्यालय हुए थे तलब
एसडीओ वीके जैन के खिलाफ चंडीगढ़ मुख्यालय के आदेश पर शिकायतों के मद्देनजर जांच चल रही है। पानी की शिकायतों के मामले में चीफ इंजीनियर प्रदीप पुनिया ने जुलाई के तीसरे सप्ताह में पब्लिक हेल्थ विभाग के एससी राजीव गुप्ता व एक्शन भानु प्रकाश को चंडीगढ़ तलब किया था। जहां हुई बैठक के बाद ओरोपी जैन पर जल आपूर्ति मामलों में लापरवाही बरतने पर चार्ज सीट तैयार करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही एसडीओ वीके जैन को 7 दिन के अंदर अपना पक्ष रखने को कहा था। तब एसडीओ वीके जैन के पास रोहतक शहर का एडिशनल चार्ज था, जबकि वे कलानौर सहित पब्लिक हेल्थ विभाग के सब डिवीजन तीन में आने वाले एरिया के लिए नियुक्त हैं।

जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति के सदस्य ने भी दी जानकारी
जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति के सदस्य रामदिया अत्री ने बताया कि उन्होंने एसई विजिलेंस से फोन पर बात की। उनको कलानौर व शहर की शिकायतों के मामलों में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि चीफ इंजीनियर प्रदीप पुनिया के साथ हुई बैठक के बाद जांच कार्रवाई शुरू हुई है। कलानौर कस्बा व जुड़े गांव एरिया में पानी की आपूर्ति से संबंधित भी कई शिकायते हैं।

ऐसे चली कार्रवाई

  • पब्लिक हेल्थ विभाग के एक बड़े अधिकारी को चंडीगढ़ मुख्यालय से गत गुरुवार की देर रात रोहतक जांच टीम आने की दी गई सूचना
  • 12 बजे दोपहर एसई विजिलेंस विक्रम सिंह माथुर झज्जर रोड स्थित पब्लिक हेल्थ कार्यालय पहुंचे।
  • 2 घंटे एसडीओ बीके जैन से कार्यालय में पूछताछ चली।
  • 2:30 बजे दोपहर एसडीओ की मौजूदगी में रोहतक में तैनात जूनियर इंजीनियरों से पूछताछ हुई।
  • 4:30 बजे शाम के बाद एसई राजीव गुप्ता व एक्सईएन भानु प्रकाश शर्मा से भी एसई विजिलेंस ने ली जानकारी।

एक्सपर्ट व्यू-

अब 50 हजार रुपए से अधिक बजट वाले कार्य ऑनलाइन टेंडर के जरिए करवाने का प्रावधान है। इसमें किसी भी प्रकार की ढील बर्दाश्त नहीं की जाती है। फिर भी पकड़े जाने पर आरोपी इमरजेंसी का हवाला देते हुए हर मामले का जस्टीफिकेशन बना देते हैं। दरअसल विभागीय जांच में सारे जाने-पहचाने चेहरे होते हैं। फिर चाहे विजिलेंस का ही अधिकारी क्यों न हो। आखिर वह भी कहीं न कहीं नियुक्त रहता है। ऐसे में ज्यादा कुछ होता नहीं है। आखिरकार मामला सुलटा दिया जाता है। वैसे अक्ल से काम करने वाले आरोपी डिपार्टमेंटल जांच में बच ही जाते हैं।-वीपी कुलश्रेष्ठ, पूर्व नगर निगम कमिश्नर, भाेपाल

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