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गांव की प्रतिभा:सुमित के घुटने में लगी थी चोट; डॉक्टर ने दी ऑपरेशन की सलाह, ओलिंपिक में जाने की जिद व जुनून ने दिलाया काेटा

रोहतकएक महीने पहले
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पहलवान सुमित मलिक मेडल दिखाते हुए। - Dainik Bhaskar
पहलवान सुमित मलिक मेडल दिखाते हुए।
  • कारौर गांव में जन्मे अंतरराष्ट्रीय पहलवान सुमित मलिक से देश को गोल्ड मेडल दिलाने की बढ़ी उम्मीदें

गांव काराैर में किसान परिवार में जन्मे 28 वर्षीय भारतीय पहलवान सुमित मलिक ने बुल्गारिया के सोफिया में जारी विश्व ओलिंपिक गेम्स क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के फाइनल पहुंचने के साथ ही पुरुषों की 125 किग्रा फ्री स्टाइल वर्ग में ओलिंपिक कोटा भी हासिल कर लिया।

सुमित ओवरऑल सातवें भारतीय पहलवान बने हैं। इससे पहले वर्ष 2012 में सुशील पहलवान और वर्ष 2016 में महिला पहलवान साक्षी मलिक भी इसी विश्व ओलिंपिक गेम्स क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के जरिए ओलिंपिक कोटा हासिल किया था।

2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में जीत चुके हैं गोल्ड मेडल, डिप्टी डायरेक्टर के पद का ऑफर मिला

कुश्ती टीम के चीफ कोच व सुमित मलिक के मामा नरेंद्र ने बताया कि मार्च में प्रैक्टिस केे समय सुमित के दाहिने पैर पर चोट लग गई। डॉक्टर ने सर्जरी की सलाह दी। सुमित ने मामा नरेंद्र, सुशील पहलवान से सलाह ली और चोटिल हालत में ट्रायल में हुआ और प्रैक्टिस करते हुए बुल्गारिया ओलिंपिक कोटा हासिल किया। 2018 में सुमित कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुका है। हरियाणा सरकार की ओर से सुमित को खेल विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद का ऑफर दे रखा है, जिसे सुमित ने स्वीकार कर लिया है।

एक माह की उम्र में मां का हो गया था निधन

सीआरपीएफ में डिप्टी कमांडेंट व सुमित के मामा नरेंद्र ने बताया कि सुमित महज एक माह का था जब उसकी मां का निधन हो गया। पिता किताब सिंह किसान थे। 25 साल पहले गांव में आए दिन अपराध होते रहते थे। सुमित की बेहतर परवरिश के लिए वो उसे ननिहाल में ले आए। यहीं पर नानी और मामा नरेंद्र ने उसकी पढ़ाई कराई व खेल का अभ्यास किया। देश को ओलिंपिक में गोल्ड की उम्मीद जगी है।

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