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जमीन जारी करने का मामला:रोहतक में रियल एस्टेट कंपनी को जमीन जारी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए

नई दिल्ली/रोहतकएक महीने पहले
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कांग्रेस सरकार के दौरान रोहतक में रियल एस्टेट कंपनी को जमीन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। - Dainik Bhaskar
कांग्रेस सरकार के दौरान रोहतक में रियल एस्टेट कंपनी को जमीन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।

पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान रोहतक में रियल एस्टेट कंपनी को जमीन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। इस जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया इनेलो सरकार में शुरू हुई थी। हुड्‌डा सरकार के समय बिल्डर कंपनी को लाइसेंस मिला था। अब एचएसवीपी जमीन को वापस लेकर अपने स्तर पर डेवलप कर रहा है।

2006 में 280 एकड़ जमीन कंपनी को जारी की गई

रोहतक-दिल्ली राजमार्ग पर गांव पहरावर की जमीन है, जो विकसित नहीं हो पाई है। जिस कंपनी काे कॉलोनी विकसित करने के लिए लाइसेंस मिला था, वह सनसिटी से जुड़ी है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा अब एचएसवीपी) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, 11 अप्रैल 2002 को रोहतक में सेक्टर-27, 28 पर 850.88 एकड़ भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव था।

बाद में हुडा ने 8 अप्रैल 2003 को 444.11 एकड़ भूमि के अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी किया, लेकिन 6 अप्रैल 2005 को 422.44 एकड़ भूमि के लिए अवाॅर्ड घोषित किया गया। इस बीच उदार गगन प्रॉपर्टीज प्रा. लिमिटेड कंपनी ने सांठगांठ कर कुछ भूमि मालिकों के साथ एग्रीमेंट कर लिया।

21 मार्च 2006 को उदार गगन प्रॉपर्टीज ने हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के डायरेक्टर के पास लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया। 12 जून 2006 को उदार गगन प्राॅपर्टीज को 280 एकड़ भूमि पर काॅलोनी विकसित करने के लिए लाइसेंस मिल गया।

कोर्ट ने बिल्डर के पक्ष में जारी सभी डीड-एग्रीमेंट रद्द किए थे

7 अक्टूबर से 15 मई 2014 तक उदार गगन प्राॅपर्टीज कंपनी के निदेशक भाजपा नेता सुभाष चंद्रा के भाई लक्ष्मी नारायण गोयल रहे थे। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जाने के 5 महीने बाद लक्ष्मी नारायण ने कंपनी छोड़ दी। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर के पक्ष में जारी सभी सेल डीड व एग्रीमेंट रद्द कर दिए थे। अब सीबीआई जांच के भी आदेश दिए हैं। मार्च 2018 में भाजपा सरकार ने भी मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी।

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