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रोहतक में अजब मामला:डॉक्टर बोले- सॉरी नहीं बचा सके, साढ़े 4 घंटे बाद चल पड़ी सांसें

रोहतकएक महीने पहलेलेखक: रत्न पंवार
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अब दिल्ली के चिकित्सकों की एक टीम मरीज की मॉनिटरिंग कर रही है। - Dainik Bhaskar
अब दिल्ली के चिकित्सकों की एक टीम मरीज की मॉनिटरिंग कर रही है।
  • कोरोना मरीज को डॉक्टरों के मृत बताया, अंतिम संस्कार से पहले संभाला तो मिला जिंदा

रोहतक के एक निजी अस्पताल में एक सप्ताह से दाखिल कोरोना संक्रमित मरीज काे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों को आईसीयू से बाहर आकर डॉक्टर ने सॉरी कहा तो परिजन भी गांव में जाकर श्मशान में अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे। शव ले जाने के लिए एंबुलेंस बुक कर दी। सारी प्रक्रिया में साढ़े चार घंटे बीत गए। इसी बीच चिकित्सकों को मरीज के शरीर में हलचल दिखी तो उसका फिर से इलाज शुरू कर दिया गया। हालांकि इससे पहले डॉक्टर मरीज को वेंटिलेटर से हटा बेड पर लेटा चुके थे।

अब दिल्ली के चिकित्सकों की एक टीम मरीज की मॉनिटरिंग कर रही है। अभी वेंटिलेटर पर मरीज की हालत गंभीर है। दोनों फेफड़ों का संक्रमण स्तर 25/25 है। यानी मेडिकल साइंस के हिसाब से वो पूरी तरह खराब हो चुके हैं। फिलहाल निजी अस्पताल का दावा है कि डॉक्टर के सॉरी कहने का परिजनों ने गलत मतलब निकाला। मरीज की हालत बेहद गंभीर है। उसके बचने के चांस न के बराबर हैं। हमने मरीज को कहीं दूसरी जगह ले जाने को कहा था। हालांकि अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीज के परिजनों को अब इलाज खर्च न लेने का ऑफर दिया है। केवल टेस्ट और दवा के पैसे ही उनसे लिए जाएंगे।

परिजन बोले- डॉक्टरों से रिक्वेस्ट की थी सुबह अंतिम संस्कार होगा तब तक शव रख लो

सोनीपत के कटवाल गांव के 43 वर्षीय मरीज सुरेंद्र दूहन के भाई बसंत बताते हैं कि 15 दिन पहले सुरेंद्र को बुखार आया था। उसे बहादुरगढ़ के अस्पताल से 6 दिन तक भर्ती रहने के बावजूद हालत में सुधार नहीं हुआ। संक्रमण फैलता ही गया। 1 सप्ताह पहले उसे रोहतक के निजी अस्पताल में दाखिल कराया। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया।

अचानक शुक्रवार शाम 4 बजे डॉक्टरों ने परिजनों को कह दिया कि सॉरी, मरीज को नहीं बचा सके। डॉक्टरों के जवाब देने के बाद गांव में मातम पसर गया। श्मशान घाट के लिए तैयारियां कर दी गई। गांव में शव ले जाने के लिए एंबुलेंस भी बुक कर दी गई। शाम के समय शव नहीं ले जा सकते थे, चूंकि अंतिम संस्कार सुबह ही होना था।

इसलिए शव को अस्पताल में ही रखवा दिया गया। बाकी रिश्तेदार कटवाल गांव चले गए। अचानक साढ़े 8 बजे गांव में परिजनों के पास परिचित का फोन आया कि सुरेंद्र की सांसें फिर से चलने लगी हैं।

तीन बेटी और एक बेटा है सुरेंद्र का

मरीज के चचेरे भाई रणबीर सिंह ने बताया कि डॉक्टरों के सुरेंद्र को मृत घोषित करने पर कटवाल गांव में बाकी परिजनों व ग्रामीणों को सूचना दे दी गई थी। पूरा गांव मातम में था कि सुरेंद्र के परिवार में मां, पत्नी और 3 बेटी व एक बेटा है, उनका ख्याल कौन करेगा। शव लाने के लिए एंबुलेंस बुक कर दी थी। फिलहाल सुरेंद्र को दोबारा से वेंटीलेटर पर रखा गया है और उसकी हालत अभी गंभीर है क्योंकि फेफड़ों में संक्रमण ज्यादा फैल चुका है।

परिजनों की खुशी का नहीं रहा ठिकाना

सुरेंद्र के भाई कृष्ण दूहन का कहना है कि गांव में शनिवार को युवाओं ने सलामती के लिए हवन करना था, उसे भी शुक्रवार शाम को सुरेंद्र के मरने की सूचना मिली तो हवन कार्यक्रम को कैंसिल कर दिया। बाद में साढ़े 8 बजे सुरेंद्र की सांस दोबारा चलने की सूचना मिली तो मातम मना रहे परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

इसके बाद दोबारा से हवन करने का फैसला लिया गया। सुबह गांव में हवन करने और प्रसाद बांटने के बाद ही परिजन अस्पताल में सुरेंद्र से मिलने पहुंचे। गांव वाले इसे भगवान का चमत्कार बताते हुए सुरेंद्र के जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं।

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