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जन संकल्प से हारेगा कोरोना:बच्चों के मन में नहीं आने दिया कोरोना का डर, समझाया कि मन पसंद खाओ-खेलो और हंसते रहो, इस तरह बेटा-बेटी, पत्नी और पति ने जीती जंग

रोहतकएक महीने पहले
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कोरोना को हराने वाली जुनेजा फैमिली - Dainik Bhaskar
कोरोना को हराने वाली जुनेजा फैमिली
  • अपनी इच्छा शक्ति से कोरोना को हराने वालों की कहानियां... आज पढ़िए डीएलएफ कॉलोनी में रहने वाले जुनेजा परिवार की कहानी, पूरा परिवार संक्रमित होने पर भी नहीं टूटने दिया हौसला

शरीर में असहनीय दर्द के साथ इस साल 20 अप्रैल का दिन मेरे घर के लिए चुनौती बनकर आ गया। शुरुआत मुझसे हुई। फौरन खुद को अलग कमरे में शिफ्ट किया। लेकिन जांच में बेटा मयंक, बेटी खुशबू और पत्नी भावना की भी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई। डॉक्टर की सलाह पर दवाएं शुरू हो गईं। लेकिन एक साथ पूरा परिवार महामारी की चपेट में जानकर बच्चे उदास हो गए।

उनके मन में डर घर करने लगा था। घर के अंदर कैद सा महसूस करने लगे। यह आभास होते ही हमने उन्हें नकारात्मक विचारों से आजाद करने की ठानी। उनकी काउंसलिंग की। समझाया कि- घबराने की जरूरत नहीं है। मन पसंद खाओ-खेलो और हंसते रहो। महामारी कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी।

यह मंत्र जीत का फार्मूला बन गया। हमने टीवी पर न्यूज चैनल बंद कर दिया था। हंसने-गुदगुदाने वाले मनोरंजन के कार्यक्रम देखने की बच्चों को आजादी दी। साथ ही दवा के साथ दिन में चार भाप लेना, ऑक्सीजन का लेवल चेक करना नियम बन गया। खुद को दिक्कत होने पर भी बच्चों के सामने परेशानी प्रकट नहीं होने दी। हर पल सबका हौसला बनाए रखा। एक बात और हर शाम एक से डेढ़ घंटा गीत संगीत, भजन और मोटिवेशनल स्पीच सुनते।

यही वजह थी कि 14 दिन के क्वारेंटाइन होने पर भी हम सब नकारात्मक विचारों से दूर रहे। 2 मई को कोरोना की जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गई। दो दिन बाद बच्चों को किचेन एक्सपर्ट बनाने का आइडिया आया। शेयर किया तो पहले वे अनमने से तैयार हुए। लेकिन धीरे धीरे उनको मजा आने लगा। फिर तो चाय, चपाती, खीर, दाल फ्राई बनाने की बच्चों में होड़ मच गई। इस दौरान कामवाली को भी मना किया था। ऐसे में घर में साफ सफाई भी हम सभी मिलकर करते रहे।

मुझसे चार दिन पहले मेरी बहन किरन को कोरोना हुआ। उसका सिटी स्कोर 15 था। फिर भी कोरोना संक्रमित होने की बात उससे छिपा ली। बीमारी की वजह टाइफाइड बुखार बताकर 10 दिन तक अस्पताल में भर्ती रखा। इस बीच हम भी संक्रमित हुए। यह भी उसे नहीं बताया। बल्कि फोन पर उसका हौसला बढ़ाते रहते। इसका नतीजा रहा कि आज वह भी पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर घर आ गई है। मनोज जुनेजा | कोरोना वॉरियर

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