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यह कुदरती मौत नहीं:गर्भवती को गोद में उठा दौड़ता रहा पति, पैदा होते ही दम तोड़ गई बच्ची

रोहतक9 दिन पहले
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तस्वीर में मासूम के शव को हाथों में थामे उसका पिता होमगार्ड जवान सोनू है। दर्द है... सरकारी सिस्टम ने उसकी नवजात बच्ची को आंखें खोलने से पहले ही सरकारी दावों की सच्चाई दिखा दी। बच्ची ने फिर आंखें नहीं खोली। ये तस्वीर पूरे सरकारी तंत्र के दावों पर सवाल है। - Dainik Bhaskar
तस्वीर में मासूम के शव को हाथों में थामे उसका पिता होमगार्ड जवान सोनू है। दर्द है... सरकारी सिस्टम ने उसकी नवजात बच्ची को आंखें खोलने से पहले ही सरकारी दावों की सच्चाई दिखा दी। बच्ची ने फिर आंखें नहीं खोली। ये तस्वीर पूरे सरकारी तंत्र के दावों पर सवाल है।
  • लचर अव्यवस्था ने नवजात की सांसें छीन लीं
  • आरोप- सरकारी अस्पताल में संभालने वाला नहीं मिला, पीजीआई में स्ट्रेचर ढूंढते रह गए

जिले का स्वास्थ्य विभाग कोविड-19 के बीच बच्चों पर बढ़ते खतरे को देख तमाम सुविधाएं जुटाने के दावे कर रहा है। लेकिन रविवार को हुई घटना पूरे सिस्टम और उसकी क्षमता और समर्पण पर सवाल खड़े कर रही है।

कैलाश कॉलोनी के दंपती को सुविधाओं के अभाव और चिकित्सकों की लापरवाही के कारण अपनी बच्ची को खोना पड़ा है। आरोप है कि प्रसूता को पहले सिविल अस्पताल में गंभीर हालत में होने के बाद भी चिकित्सक संभालने नहीं आया। पीजीआई जाने लगे तो एंबुलेंस काफी देर से मिली। किसी प्रकार पीजीआई पहुंचे तो वहां प्रसूता के लिए स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं हुआ।

डिलीवरी के तुरंत बाद नवजात बच्ची की मौत हो गई। कैलाश कॉलोनी के होमगार्ड सोनू ने पीजीआई थाना में सिविल अस्पताल और पीजीआई प्रबंधन के खिलाफ उसके बच्चे की जान लेने के आरोप में शिकायत दी है। दोनों संस्थान के जिम्मेदार अब इसमें कार्रवाई की बात कह रहे हैं।

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