हमारे असली हीरो / 44 डिग्री में 3 घंटे पीपीई किट पहन काेरोना के सैंपल लेती है टीम, सूखने लगता है गला

राेहतक. सिविल अस्पताल में पीपीई किट उतारते हुए महिला डाॅक्टर डाॅ. सुशीला वर्मा और लैब टेक्नीशियन प्रीति। राेहतक. सिविल अस्पताल में पीपीई किट उतारते हुए महिला डाॅक्टर डाॅ. सुशीला वर्मा और लैब टेक्नीशियन प्रीति।
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राेहतक. सिविल अस्पताल में पीपीई किट उतारते हुए महिला डाॅक्टर डाॅ. सुशीला वर्मा और लैब टेक्नीशियन प्रीति।राेहतक. सिविल अस्पताल में पीपीई किट उतारते हुए महिला डाॅक्टर डाॅ. सुशीला वर्मा और लैब टेक्नीशियन प्रीति।

  • सिविल अस्पताल के ओपन एरिया में रोज 50 से 100 कोरोना के सैंपल लेती है टीम, रोटेशन पर लगती है ड्यूटी, 2200 संदिग्ध मरीजों के ले चुके हैं सैंपल

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

रोहतक. सिविल अस्पताल में कोरोना संक्रमण से बचने के लिए खुले एरिया में ही कोरोना के सैंपल लिए जा रहे हैं। अब 44 डिग्री तापमान होने पर पीपीई किट पहनकर दो-तीन घंटे तक सैंपल लेेने वाले स्टाफ के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। एक तो पीपीई किट में पैक पूरा शरीर और ऊपर से तपता सूरज। तेज गर्मी में तीन घंटे तक पीपीई किट पहनी महिला चिकित्सक और लैब टेक्नीशियन प्यास से गला सूखने और सांस लेने में दिक्कत महसूस करती रहीं, लेकिन सेवा के इस जज्बे के सामने यह कठिनाइयां छोटी पड़ गई।

यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं बल्कि जब से गर्मी बढ़नी शुरू हुई तब से पीपीई किट पहनने वाले चिकित्सक दिक्कत महसूस कर रहे हैं। चिकित्सक बताते हैं कि जब तापमान अधिक होता है तो पीपीई किट के अंदर नमी बढ़ती है। एयर टाइट किट होेने की वजह से मुंह से ली जाने वाली सांस को छोड़ते समय कार्बन डाईआक्साइड एकत्रित होने लगती है जिसकी वजह से गला सूखने, सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है। इससे शरीर में थकान, चिड़चिड़ापन की भी समस्या पैदा हो जाती है। कोरोना काल में सिविल अस्पताल की टीम 2200 से ज्यादा सैंपल ले चुकी है।

आज 50 लोगों के लिए गए सैंपल, मैसेज से भेजी जा रही रिपोर्ट:

एसएमओ डॉ. रमेश ने बताया कि सिविल अस्पताल में शनिवार को आर्थो चिकित्सक डॉ. हरमिंदर सिंह, डॉ. सुमित जुनेजा, डॉ. सुशीला वर्मा, लैब टेक्नीशियन प्रीति की टीम ने 50 लाेगों के सैंपल लिए हैं। ऑनलाइन फार्मेट में सारा डाटा अपलोड किया जा रहा है ताकि एक क्लिक पर ब्योरा देखा जा सके। सैंपल टेस्ट कराने वाले संदिग्ध मरीज के मोबाइल से ओटीपी नंबर पूछकर उसके मोबाइल पर ही कोविड 19 की रिपोर्ट भेजने की सुविधा दी जा रही है।

किट पहनने से पहले पानी पीते हैं ताकि बाद में गला न सूखे

^ड्यूटी के दौरान पीपीई किट पहनने से पहले पानी पी लेते हैं ताकि बाद में गला न सूखे। एक बार किट पहन ली तो दो-तीन घंटे के बाद ही उतारनी पड़ती है। धूप में खड़े होने के कुछ देर में ही पीपीई किट के अंदर पैक पूरा शरीर पसीने से भीग जाता है। ऐसी ही कई दिक्कत महसूस होती है। 
- प्रीति, लैब टेक्नीशियन, सिविल अस्पताल, रोहतक।

तेज गर्मी से पीपीई किट के अंदर रहना मुश्किल

^खुले आसमान के नीचे तेज धूप में पीपीई किट पहनने के बाद सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है।उत्साह और जज्बे के आगे सारी परेशानियों को भूलकर मरीजों के सैंपल लेने में समय का पता नहीं चलता। 
- डॉ. सुशीला वर्मा, चिकित्सक, सिविल अस्पताल।

टीम ए और बी बनाकर रोटेशन से लगा रहे हैं ड्यूटी

अस्पताल में सुबह नौ से शाम पांच बजे तक फ्लू क्लीनिक में चिह्नित मरीजों के ही सैंपल लिया जाता है। टीम ए मरीजों को चिह्नित करती है और टीम बी में एक चिकित्सक और लैब टेक्नीशियन को शामिल करके लोगों के स्वैब सैंपल लिए जाते हैं। ड्यूटी रोटेशन के अनुसार लगाई जा रही है। -डॉ. रमेश चंद्र, एसएमओ, सिविल अस्पताल, रोहतक।

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