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रोहतक में महापंचायत:चढूनी मंच पर तो टिकैत नीचे बैठे, कई बार अनाउंसमेंट के बाद स्टेज पर जाने को राजी हुए, नहीं मिली दोनों की नजरें

रोहतक3 महीने पहले
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महापंचायत में मंच पर मौजूद सभी मुख्य वक्ता एवं किसान नेता। - Dainik Bhaskar
महापंचायत में मंच पर मौजूद सभी मुख्य वक्ता एवं किसान नेता।

हरियाणा के रोहतक जिले में आज मकड़ौली टोल पर किसान एवं मजदूर तालमेल महापंचायत का आयोजन हुआ। महापंचायत सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चली। कार्यक्रम में पहुंचे दो बड़े किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी और राकेश टिकैत के बीच काफी दूरियां देखने को मिली। हालंकि संयोग से दोनों के कार्यक्रम में पहुंचने की टाइमिंग एक ही रही। एक ओर जहां गुरनाम सिंह चढूनी स्टेज पर जाकर बैठ गए तो वहीं, राकेश टिकैत स्टेज से नीचे कार्यकर्ताओं के बीच बैठ गए। इसके बाद कार्यकर्ताओं के बार बार कहने और स्टेज से बार बार एनाउंस करने के बाद टिकैत स्टेज पर गए। स्टेज पर जाने के बाद टिकैत ने मंच पर बैठे सभी लोगों को अभिवादन स्वीकार किया मगर इस दौरान चढूनी और टिकैत ने आपस में नजर तक नहीं मिलाई। कार्यक्रम के दौरान भी दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा तक नहीं।

मंच पर बैठे सभी किसान नेता।
मंच पर बैठे सभी किसान नेता।

महापंचायत में हिस्सा लेने के लिए अब तक 21 खापों के प्रधान और प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। 20 हजार से ज्यादा किसानों की संख्या शामिल हुई। जिसमें महिलाओं की भागीदारी में पुरूषों के बराबर रही। सभी खाप प्रधानों का पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। स्टेज संचालन अधिवक्ता व चढूनी ग्रुप के मीडिया प्रभारी HS हुड्डा, कृष्णलाल हुड्डा व डॉ. जयपाल बजाज ने किया। जबकि स्वागत कमेटी में रामदिया हुड्‌डा जिंदराण, जगवंता सांघी, उमेद सिंह रिठाल, रणबीर मोई, दयानंद मकड़ौली, वजीर धामड़, सतपाल किलोई व सुंदर घिलौड़ मौजूद रहे। महापंचायत में हुड्डा खाप प्रधान ओमप्रकाश हुड्डा, गठवाला खाप, सोलंकी खाप, मैन खाप, दलाल खाप, कादियान खाप, सरोहा खाप, खाटू खाप जौरासी, नांदल खाप, श्योराण खाप, फौगाट खाप, सांगवान खाप, मोखरा तपा प्रधान, देशवाल खाप, अहलावत खाप, सिवाज खाप, पुनिया खाप, कुंडू खाप, गाेयत खाप, कंडेला खाप सहित धनखड़ खाप प्रधान ओम प्रकाश धनखड़ व पूर्व विधायक एवं सांगवान खाप प्रधान सोमबीर सांगवान ने शिरकत की।

महापंचायत में उमड़े किसान और महिलाएं।
महापंचायत में उमड़े किसान और महिलाएं।

ये बोले गुरनाम सिंह चढूनी

गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसान कर्जा लेगा तो ट्रैक्टर लेगा, टयूबवैल लगवाएगा। हर 32 मिनट में एक किसान कर्जे के बोझ तले दब कर आत्महत्या करता है। जितना किसानों ने 1967 में कर्जा लिया था, वह आज तक चुका रहे हो। आज के समय में जितना कर्जा है, इससे कई गुणा ज्यादा ब्याज दे चुके हैं। पिछले 20 सालों में ही देशभर में 4 लाख किसानों ने सुसाइड ‌कर लिया है। पूरे देश के किसान, मजदूरों पर एग्रीक्ल्चर का कुल 8 हजार करोड़ का कर्जा है। देश के कुछ भगोड़ों ने 15 लाख करोड़ बैंकों का मार लिया, जिससे वसूला तक नहीं जा सकता है। हालंकि उनके पास इससे कई गुणा ज्यादा की उनकी संपत्त‌ि है, मगर उनकी कुर्क नहीं होती है। किसानों के 2 लाख के कर्जा में 2 एकड़ जमीन कुर्क कर लेंगे। उन्होंने किसानों को कहा कि बैंक वाला अब गांव कर्जबंद किसान की जमीन कुर्क करने आएगा तो उसे वहीं बैठा लो, बांध लो। पहले सरकार से कहना कि वे 15 लाख करोड़ वसूल लें, फिर हम से कर्जा ले लेना। जो किसान कर्जा दे सकते हैं, वे कर्जा दें, नहीं तो किसी को मरने की जरूरत नहीं है। सभी एकजुट होकर किसानों को बचाओ।

महापंचायत में अपनी बात रखते गुरनाम सिंह चढूनी।
महापंचायत में अपनी बात रखते गुरनाम सिंह चढूनी।

चुनावों में किसानों के बीच से ही बनाओ उम्मीदवार: चढूनी

गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार हम लोग बनाते हैं। हम जातियों में, धर्म में बंट कर वोट डालते हैं। अब हम कहते हैं कि हमने बीजेपी को हराना है, मगर क्या दूसरा दूध का धुला हुआ आएगा। इसलिए अब अपने बीच से पंचायती उम्मीदवारों को खड़ा करने का वक्त आ गया है। अगर इस देश में अब हमें जिंदा रहना है, तो इन जातियों और धर्म से काफी ऊपर उठना होगा। मजदूर व दलित हमारे भाई है, इन्हें गले लगाइए। ये भी हमारे ही समाज का हिस्सा है। प्रदेश में फैले धर्म और जातियों के दंगे बंद होने चाहिए। हमारा जो आंदोलन चल रहा है, सभी खाप पंचायतों से आग्रह है कि हर गांव से कुल दस व्यक्ति धरने पर रोजाना शामिल हो। क्योंकि यह जरूरी है, धरनों पर हमारी संख्या कम हो रही है। सरकार को यह नहीं लगना चाहिए कि आंदोलन में संख्या कम हो रही है।

किसान बिगड़ गया तो प्रधानमंत्री की कोठी भी घेर लेगा

चढूनी ने कहा कि हम बर्दाश्त कर रहे हैं। एक सीमा ‌होती है बर्दाश्त करने की। हरियाणा सरकार का मुख्यमंत्री का लठ उठाने का बयान संजोग नहीं है, यह सब सोची समझी साजिश है, उसकी दिन यूपी के लखीमपुर खीरी में भी किसानों को गाड़ी से कुचला गया है। सरकर को यह बता देना चाहते हैं कि जिस दिन किसानों ने लठ उठा लिया ना, उस दिन तुम्हारा कुत्ता भी गली में ‌बाहर नहीं निकलेगा। सरकार हमारे सब्र का इंमितहान ना लें। मगर किसान भाईयों से ही निवेदन है कि कोई भी हाथ ना उठाए। सरकार के सभी जुल्म सहते हुए आंदोलन लड़ना है। अगर किसान बिगड़ गया ना तो प्रधानमंत्री की कोठी भी घेर लेंगे। सरकार के पास अभी भी समय है, किसानों की बात सुन लें।

महापंचायत में उमड़ी भीड़।
महापंचायत में उमड़ी भीड़।

गुरनाम सिंह चढूनी का बड़ा बयान, सिंघू बॉर्डर पर हुई हत्या में सरकार को बताया जिम्मेदार

जब पत्रकारों ने गुरनाम सिंह चढूनी से बातचीत की तो उन्होंने सिंघु बॉर्डर पर युवक की हत्या पर सीधा सीधा सरकार पर आरोप लगा दिया। उन्होंने खुद से पल्ला झाड़ते हुए उन्होंने कहा कि अगर सिंघू बॉर्डर पर हत्या हुई है, तो क्या हम हत्यारों का साथ दे रहे हैं। अगर हरियाणा में कोई घटना होती है, तो क्या उसकी जिम्मेदारी सीएम मनोहर लाल खट्टर लेते हैं। तो इस हत्या की जिम्मेदारी हमारी कैसे बनती है। हमारे पास कोई सुरक्षा प्रबंध नहीं है, आंदोलन में किसी भी तरह का व्यक्ति आ सकता है। किस के मन में क्या मंशा है, इसका हम कैसे पता लगा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार शुरू दिन से ही किसान आंदोलन को बदनाम कर रही है। वहीं, उन्होंने एक सवाल के जबाब में यह भी कहा कि वे तरनतार के रहने वाले मृतक परिवार के घर नहीं जाएंगे। क्योंकि इस आंदोलन में 700 किसानों की मौत हो गई है, वे किस किस के घर जाएंगे।

निहंग को हमने सुरक्षा में नहीं रखा, हम उनके साथ नहीं: टिकैत

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि सिंघु बॉर्डर पर जो घटना हुई वह अमानवीय है लेकिन जिसने भी इस हत्या को अंजाम दिया है उसे पुलिस ने पकड़ लिया है और पुलिस अपना काम कर रही है। लेकिन जब राकेश टिकैत से पूछा गया क्या वह पीड़ित के घर जाएंगे और उनके मुआवजे की मांग करेंगे तो उन्होंने बात को टालते हुए कहा कि तब तक पंजाब नहीं जाएंगे, जब तक किसान आंदोलन का कोई हल ना निकल जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि वह मुआवजे की भी मांग नहीं करेंगे क्योंकि अगर उन्होंने मुआवजे की मांग की तो लोग कहेंगे ना समझ ले कि यह घटना किसानों ने ही अंजाम दी है। सिंघु बॉर्डर पर हुई हत्या के मामले में एक ओर जहां निहंगों की ओर से कहा जा रहा है कि उन्हें किसानों ने ही अपनी सुरक्षा के लिए वहां पर रखा हुआ है, तो वहीं इसी का जबाब देते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि उन्होंने उनसे कोई सुरक्षा नहीं मांगी है। वे इस पूरे प्रकरण की संयुक्त किसान मोर्चा के साथ बैठक करेंगे। वे गलत करने वाले निहंग के साथ नहीं हैं।

महापंचायत में अपनी बात रखते राकेश टिकैत।
महापंचायत में अपनी बात रखते राकेश टिकैत।

सरकार की नीयत और नीतियों पर विधायक ने उठाए सवाल

महापंचायत में महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने भी शिरकत की। आयोजकों की ओर से किसानों के साथ मजबूती से डटे रहने के लिए पगड़ी पहनाकर कुंडू का स्वागत किया गया। कुंडू ने महापंचायत के आयोजन एवं भंडारे में अपनी तरफ से 1 लाख सहयोग राशि व दिल्ली के बोर्डर पर चल रहे भंडारों के लिये अलग से 5 लाख राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि साढ़े दस महीने से किसान भाई दिल्ली के बोर्डरों पर बैठे आंदोलन चला रहे हैं और सैंकड़ो शहादतें हो चुकी लेकिन सरकार आज तक राजहठ पर अड़ी बैठी है। संयुक्त किसान मोर्चे को इस बात को लेकर भी चिंतन करना चाहिए। कुंडू ने 36 बिरादरी के भाईचारे एवं किसान-मजदूर एकता का सन्देश देते हुए कहा कि हमारी एकता ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है और हमें एकजुटता से आंदोलन को मुकाम तक लेकर जाना है। उन्होंने प्रदेश में मंडियों के बन्द होने व बाजरे का एमएसपी नहीं मिलने के मुद्दों को भी मजबूती से रखते हुए केंद्र एवं हरियाणा सरकार की नीयत और नितियों पर सवाल उठाए।

महापंचायत में अपनी बात रखते महम विधायक बलराज कुंडू।
महापंचायत में अपनी बात रखते महम विधायक बलराज कुंडू।

20 हजार लोगों के लिए बनाया खाना

जानकारी देते हुए मकड़ौली टोल पर धरने पर बैठे जिला प्रधान राजू मकड़ौली ने बताया कि 20 हजार से ज्यादा लोगों के पहुंचने की संभावना थी। संभावना बिल्कुल सटीक रही। कार्यक्रम का टेंट मकड़ौली टोल पर नेशनल हाईवे पर गाड़ा गया है, जिसकी मुख्य स्टेज पर 20 से ज्यादा लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई। इसके अलावा यहां आने वाले लगभग हर व्यक्ति के लिए खाने की व्यवस्था भी की गई है। आलू-छोले की सब्जी, पूरी और सूजी का हलवा बनाया गया है। पार्किंग के लिए विशेष व्यवस्था की गई। 25 से ज्यादा पानी के टैंकरों का प्रबंध किया गया।

भंडारे के लिए 500 किलोग्राम छोले भीगौते हलवाई बलकार सिंह व मनोज।
भंडारे के लिए 500 किलोग्राम छोले भीगौते हलवाई बलकार सिंह व मनोज।

चप्पे-चप्पे पर रही पुलिस, 700 पुलिसकर्मियों ने संभाला मोर्चा

महापंचायत के दौरान लॉ एंड ऑर्डर की स्थित‌ि को बरकरार रखने के लिए पुलिस ने खास इंतजाम किए। जिसमें खासतौर से 700 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई। इनके अलावा एएसपी कृष्ण लोहचब, डीएसपी मुख्यालय सज्जन सिंह, डीएसपी ट्रैफिक डॉ. रविंद्र, डीएसपी महेश कुमार समेत 10 थानों के एसएचओ मौके पर तैनात रहे। साथ ही जिले के सभी आउटर समेत 20 जगहों पर नाकाबंदी की गई। वहीं आपातकालीन स्थिति के लिए पुलिस की दो टुकड़ियां पुलिस लाइन में रिजर्व रही।

महापंचायत से एक किलोमीटर दूर गोहाना गोल चक्कर पर लगे मुख्य नाके पर तैनात इंसपेक्टर राकेश कुमार, एसआई राजू कुमार व अन्य पुलिसकर्मी।
महापंचायत से एक किलोमीटर दूर गोहाना गोल चक्कर पर लगे मुख्य नाके पर तैनात इंसपेक्टर राकेश कुमार, एसआई राजू कुमार व अन्य पुलिसकर्मी।
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