साल का पहला पर्व:मकर संक्रांति पर इस बार बुधादित्य योग और शनि प्रदोष का संयोग

रोहतक16 दिन पहले
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सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को, लेकिन समय को लेकर पंचांगों में भेद, ज्यादा पंडित 15 के पक्ष में। - Dainik Bhaskar
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को, लेकिन समय को लेकर पंचांगों में भेद, ज्यादा पंडित 15 के पक्ष में।

मकर संक्राति इस बार भी दो दिन मनेगी। 14 जनवरी की रात 8.58 बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होने के कारण यह स्थिति बनी है। पंडितों का कहना है कि 15 जनवरी को सूर्योदय के समय उदया तिथि में संक्रांति रहेगी, इसलिए इस दिन ही पुण्य काल रहेगा। कई पंचांगों में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 2.40 पर होना बताया है।

समय को लेकर पंंचांग भेद के चलते शैव संप्रदाय से जुड़े कई लोग 14 जनवरी को नदियों में स्नान कर मकर संक्रांति मनाएंगे, परंतु वैष्णव शनिवार को ही सूर्य आराधना करेंगे। खास बात यह है कि सूर्य इसी दिन से उत्तरायण होंगे और बुध के भी इसी राशि में रहने से बुधादित्य योग और शनि प्रदोष भी रहेगा।

भीष्म ने इसी दिन त्यागे थे प्राण

भीष्म पितामह को इच्छा मृत्युु का वरदान प्राप्त था। महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाण लगने के बाद उन्होंने मकर संक्रांति को ही अपनी मृत्यु का दिन चुना था। उन्होंने इसी दिन प्राण त्यागे थे। उनका मानना था कि इससे उन्हें मोक्ष प्राप्त होगा।

पंचांगों में समय को लेकर भेद

पं. देवप्रसाद विष्णु ने बताया कि लोक विजय, भुवन विजय, चिंताहरण, और पुष्पांजलि पंचांगों में 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय अलग-अलग बताया गया है। इस कारण संभावना है कि इस बार दो दिन संक्रांति मन सकती है, परंतु सूर्य उदया तिथि में संक्रांति 15 जनवरी को ही रहेगी, इसलिए इसी दिन संक्रांति का पुण्य काल अधिक फलदायी रहेगा। इस दिन सूर्योदय से दोपहर 1:15 बजे तक विशेष पुण्य काल रहेगा, जिसमें स्नान-दान और सूर्य आराधना की जानी जाहिए। इसके बाद सूर्यास्त तक सामान्य पुण्य काल रहेगा।

सूर्यदेव इस दिन पुत्र शनि की राशि में पहुंचेंगे

पं. देवप्रसाद विष्णु ने बताया 14 जनवरी की रात 8:58 पर सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसमें बुध और शनि पहले से ही विराजमान है। इस दिन बुधादित्य योग रहेगा। मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं। सूर्य इस दिन पुत्र शनि की राशि में पहुंचेंगे।

संक्रांति का वाहन बाघ, उपवाहन अश्व

इस बार संक्रांति का वाहन बाघ, उपवाहन अश्व, वस्त्र पीले, अवस्था-बाल्य, हाथ में वज्र, भक्षण-खीर, केसरयुक्त कुमकुम का लेपन, उत्तर से दक्षिण की ओर गमन। प्रभाव- किसानों और पशु पालकों के लिए लाभकारी, मौसम में उतार-चढ़ाव, राजनीति में मनमुटाव बढ़ेगा, संक्रमण वाले रोग बढ़ेंगे, अनाज, सब्जी व तेल आदि के दामों में वृद्धि होगी।

उबटन से स्नान - इस दिन पवित्र नदियों में डुबकी लगाने अनेक लोग तीर्थ स्थलों पर जाएंगे। शरीर में तिल, हल्दी आदि का उबटन लगाकर स्नान करने की भी परंपरा है। दिन सूर्यदेव को अर्घ देने के साथ ही तिल और गुड़ का भोग लगाया जाता है।
दान- इस दिन श्रद्धालु तिल-गुड़, खिचड़ी, छाता और कंबल आदि वस्तुओं का दान भी करेंगे।

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