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आपदा में आस:पीजीआई में कोरोना मरीजों पर काला पीलिया की दवा का ट्रायल शुरू, डॉक्टर 14 दिन तक हेल्थ मॉनिटरिंग कर दवाई का असर जांचेंगे

रोहतक13 दिन पहले
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  • पीजीआई में 170 मरीजों पर दवा का ट्रायल किए जाने की शुरुआत की गई है
  • मरीज को होम आइसोलेट कर स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी

पीजीआई में कोरोना मरीजों पर काला पीलिया (हैपेटाइटिस सी) की दवा का ट्रायल शुरू हो गया है। कमेटी में शामिल चिकित्सकों ने 170 कोरोना मरीजों को काला पीलिया की दवा देना शुरू किया है। डीसीजीआई से दवा के क्लीनिकल परीक्षण की अनुमति मिलने के बाद अब चिकित्सकों ने मरीजों को दवा देने के बाद उन्हें 14 दिन के लिए होम आइसोलेशन में मॉनिटरिंग में रखा है।

यह पूरा ट्रायल कोविड 19 के हरियाणा नोडल अधिकारी डॉ. ध्रुव चौधरी, पीसीसीएम विभाग के चिकित्सक डॉ. पवन, डॉ. एमसी गुप्ता, डॉ. सविता मॉनिटरिंग में किया जाएगा।

जून 2020 में डीसीजीआई को भेजा था प्रस्ताव

कमेटी में शामिल चिकित्सक डॉ. पवन ने बताया कि 2020 के जून माह में काला पीलिया की दवा के ट्रायल के लिए डीसीजीआई को प्रस्ताव भेजा था। जिसे वर्ष 2021 के मार्च के अंतिम सप्ताह में मंजूरी मिल गई थी। उन्होंने बताया कि ट्रायल में शामिल किए जाने वाले मरीजों की मॉनिटरिंग की जाएगी।

कोरोना के 70-70 मरीजों का ग्रुप बनाकर काला पीलिया की दवा दी जानी है। जबकि 30 अन्य मरीज को दवा नहीं दी जाएगी। इन मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि काला पीलिया की दवा मरीज के शरीर के अंदर फैले इंफेक्शन को खत्म करने में कारगर है। ये कोरोना मरीज पर कितना कारगर साबित होती है। यह रिसर्च का विषय है। उन्होंने बताया कि ट्रायल के दौरान कमेटी रिसर्च करेगी कि जिन मरीजों को दवा दी गई, उनमें 14 दिन के अंतराल में स्वास्थ्य पर क्या असर रहा।

दावा : 8 हजार से ज्यादा काला पीलिया मरीज नहीं हुए थे संक्रमित

वर्ष 2020 में कोरोना की पहली लहर आने के बाद पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा के निर्देशन में टीम ने प्रदेश के आठ हजार से ज्यादा काला पीलिया के मरीजों पर रिसर्च की थी। इसमें पाया गया था कि जो मरीज काला पीलिया की दवा ले रहे थे उन्हें कोरोना संक्रमण नहीं हुआ था।

यह रिपोर्ट तैयार होने के बाद कोरोना मरीजों पर काला पीलिया की दवा का ट्रायल किए जाने की चर्चाएं शुरू हो गईं। पीजीआई प्रशासन की ओर से डीसीजीआई को प्रस्ताव भेजकर ट्रायल की मंजूरी देने के लिए कहा गया। करीब नौ माह के इंतजार के बाद अब प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। इसमें चिकित्सकों का दावा है कि कोरोना संक्रमण को खत्म करने के लिए यह दवा कारगर साबित हो सकती है।

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