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अलर्ट:बच्चों पर वायरल इंफेक्शन अटैक; पीजीआई और सिविल अस्पताल के आईसीयू बेड फुल

रोहतक12 दिन पहले
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जिले में बच्चों के बीमार होने के मामलों से उनकी मांओं की चिंता बढ़ गई है। तस्वीर पीजीआई की है। - Dainik Bhaskar
जिले में बच्चों के बीमार होने के मामलों से उनकी मांओं की चिंता बढ़ गई है। तस्वीर पीजीआई की है।
  • कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच नवजात से 16 साल तक के बच्चों की सेहत पर संकट
  • राहत यह कि... बच्चों की कोविड रिपोर्ट निगेटिव

काेराेना की तीसरी लहर के अंदेशे के बीच ये हर घर-परिवार से जुड़ी बड़ी खबर है। बच्चाें की सेहत से ये सीधे जुड़ी है। स्वास्थ्य विभाग का डेटा बता रहा है कि बच्चे बीमार हो रहे हैं। इसमें नवजात से लेकर 16 साल की उम्र तक के बच्चे शामिल हैं। पीजीआई, सिविल अस्पताल और सीएचसी का डेटा बता रहा है कि पिछले कुछ दिनों में बच्चे सांस लेने में दिक्कत, तेज बुखार, निमोनिया, डायरिया, टायफायड से ग्रस्त हो रहे हैं। कोविड जांच में इनकी रिपोर्ट निगेटिव है। डॉक्टर इसे वायरल इंफेक्शन बता रहे हैं।

खास एहतियात बरतने की सलाह देते हुए डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों के लिए ये समय सेहत के लिहाज से खास एहतियात का है। दूसरी ओर बच्चों की सेहत से जुड़ी दूसरी बड़ी चिंता भी अब बन रही है। पीजीआई, सिविल अस्पताल में शिशु रोग आईसीयू बेड फुल हो चुके हैं। सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 200 बच्चों की ओपीडी हो रही है। कमोबेश यही हालात पीजीआई की बाल रोग ओपीडी हैं। यहां पर भी औसतन 250 से ज्यादा बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। गंभीर हालत होने पर बच्चों को एडमिट भी किया जा रहा है।

अभी जो केस आ रहे उसमें 6 दिन बाद उतर रहा है बुखार
सिविल अस्पताल के एसएमओ पीडियाट्रिक्स डॉ. जसबीर परमार बताते हैं कि पिछले एक सप्ताह से 16 साल तक की उम्र के बच्चों में वायरल फीवर, निमाेनिया, डायरिया, टायफायड, स्किन एलर्जी, खांसी-जुकाम के लक्षण मिल रहे हैं। वायरल फीवर से पीड़ित बच्चे का तीन दिन में बुखार उतर जाना चाहिए। लेकिन ये बुखार जाने में पांच से छह दिन तक का समय ले रहा है। इनकी कोरोना रिपोर्ट भी निगेटिव है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की हेल्थ व डाइट पर विशेष फोकस करने की जरूरत है। बच्चों को इम्युनिटी बढ़ाने वाली डाइट देने पर ध्यान देना होगा।

पीजीआई, सिविल अस्पताल में परिजनों को मिल रहा एक ही जवाब- नॉर्मल और वेंटिलेटर बेड खाली नहीं है

पीजीआई के न्यूनोटोलॉजी विभाग में आईसीयू के 45 बेड पर 60 मरीज एडमिट हैं। पीडियाट्रिक्स विभाग में बच्चों के वार्ड में 120 बेड पर औसतन 150 बाल रोगी भर्ती है। सिविल अस्पताल में बच्चों के वार्ड में 12 बेड पर आठ मरीज, नर्सरी के 15 बेड पर 16 बच्चे भर्ती हैं। पीजीआई के बाल रोग विभाग में ड्यूटी स्टाफ दो टूक शब्दों में परिजनों को वेंटिलेटर बेड और सामान्य बेड खाली न होने की बात कह रहे हैं। ऐसे में मायूस परिजन निजी अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाने को मजबूर हैं। इस संबंध में पीडियाट्रिक्स विभाग की हेड डॉ. गीता गठवाला से पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन देर शाम तक उनसे किसी तरह से संपर्क नहीं हो पाया था।

प्री-मेच्योर बेबी को सांस लेने में हुई दिक्कत, वेंटिलेटर बेड नहीं मिला
दो दिन पहले पत्नी की डिलीवरी हुई थी। प्री मेच्योर बेबी को सांस लेने में दिक्कत हुई। पहले महम के सरकारी अस्पताल में गए। वहां से पीजीआई रेफर कर दिया। शनिवार को बेबी को पीजीआई के वार्ड-14 में लाकर ऑक्सीजन सपोर्ट पर भर्ती कराया। रविवार सुबह ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डाॅक्टर ने हालत गंभीर देख बेबी को वेंटिलेटर पर शिफ्ट करने की जरूरत बताई। बाद में उन्होंने कहा कि वेंटीलेटर बेड खाली नहीं है। अपनी व्यवस्था करने को कह दिया। किसी तरह ऑक्सीजन एंबुलेंस के जरिए दिल्ली बाईपास रोड स्थित एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर दाखिल कराया।-जैसा की महम के एक युवक ने भास्कर को बताया

भास्कर EXPLAINER : बुखार आने पर बच्चे को दूसरों से दूर रखें

-डॉ. कुंदन मित्तल, सीनियर प्रोफेसर, बाल रोग विभाग, पीजीआई।

Q. मानसून सीजन में बच्चों में किस तरह की बीमारी मिल रही है?
इन दिनों में बच्चों में सांस लेने में दिक्कत, निमोनिया, डायरिया, वायरल फीवर, टायफायड के केस ज्यादा बढ़े हैं।

Q. वायरल इंफेक्शन पहले कितने दिनों में ठीक होता था, अब कितना समय लग रहा है?
ये इंफेक्शन पहले अमूमन तीन दिन में ठीक हो जाया करता था। अब छह दिन का समय ले रहा है।

Q. वायरल फीवर होने के बच्चों का इलाज कैसे शुरू करें?
अभिभावक बच्चे को फीवर आने के बाद कम से कम लोगों के संपर्क में रहने दें। एक्सपर्ट चिकित्सक की सलाह पर दवाएं शुरू करें।

Q. बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए अभिभावकों काे क्या करना चाहिए?
बारिश के मौसम में बच्चों को उबला पानी, मल्टी विटामिन, इम्युनिटी बढ़ाने वाली डाइट देने पर फोकस करना चाहिए।

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