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लापरवाही पड़ी भारी:पाइपलाइन डालने के लिए बिना अनुमति खोद रहे गलियां दुबारा बनाने के नाम पर टूटी टाइल व रोड़े भरकर खानापूर्ति

निजामपुर20 दिन पहले
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छिलरो की गलियों में टूटी टाइल व रोड़े डालकर भर दिए गड्‌ढ़े। - Dainik Bhaskar
छिलरो की गलियों में टूटी टाइल व रोड़े डालकर भर दिए गड्‌ढ़े।
  • जल जीवन मिशन के तहत पाइप लाइन डालने के कार्य में बरती जा रही अनियमितताएं

जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पानी की पाइप लाइन डालने के कार्य में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। पंचायत विभाग की अनुमति लिए बिना ही पक्की बनी गलियों को खोदा जा रहा है। खुदाई में इंटरलॉक टाइलें टूट रही हैं। इन टूटी हुई टाइलों को ही रोड़े पत्थरों के साथ दुबारा गलियों में बिछाया जा रहा है।

ब्लॉक के अधिकांश गांवों में इन दिनों जल जीवन मिशन व नाबार्ड के तहत प्रत्येक घर में पेयजल के लिए नल लगाने का कार्य चल रहा है। यह कार्य जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कराया जा रहा है। इसके तहत जमीन में करीब 3 फुट की गहराई पर पाइप लाइन दबाई जानी है।

इस कार्य के लिए ठेकेदार द्वारा जेसीबी से पक्की गलियों की खुदाई की जा रही है। इससे इंटरलॉक टाइलें टूट रही हैं। नियमानुसार पाइप लाइन दबाने के बाद गली का पहले जैसा ही निर्माण करना होता है। इसमें जो टाइलें टूट जाती हैं उनकी जगह नई टाइलें लगाना आवश्यक है।

आरसीसी की गली को आरसीसी ही बनाना होता है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। जो टाइलें टूटी हैं उनको ही दुबारा लगाया जा रहा है। जो जगह बच जाती है उसमें रोड़ेे पत्थर डाले जा रहे हैं। इससे गलियां उबड़ खाबड़ हो रही हैं तथा गली निर्माण में खर्च किए गए करोड़ों रुपए की बर्बादी हो रही है।

किसी गांव में ठेकेदार ने लापरवाही बरती तो उससे ठीक करवाएंगे

नाबार्ड व जल जीवन मिशन के तहत सरकार द्वारा प्रत्येक गांव घर को स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाना है। इसके लिए जमीन में 3 फुट की गहराई पर पाइपलाइन दबाई जा रही है। गलियों की खुदाई में जहां टाइलें टूट रही हैं वहां नई लगवा रहे हैं तथा जहां सीमेंटिड गली है वहां सीमेेंटिड ही बनवा रहे हैं। अगर किसी गांव में ठेकेदार द्वारा लापरवाही की गई है तो उससे उसको ठीक करवाएंगे। -रामपाल, एसडीओ, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग, नारनौल

पक्की गलियों को तोड़ने के लिए किसी ने कोई परमिशन नहीं ली

खंड के गांवों में गलियों के निर्माण पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। एक-एक गांव में गलियां पक्की करने के लिए एक-एक करोड़ से भी अधिक की राशि खर्च की गई है। पक्की गलियों को तोड़ने के लिए किसी ने कोई परमिशन नहीं ली है। अगर कोई गलियों को तोड़ रहा है तो उसको गली को पहले जैसा ही निर्माण करना होगा या फिर क्षतिपूर्ति के लिए विभाग को राशि जमा करानी होगी।

क्योंकि इंटरलॉक टाइलों से बनी गलियों की टाइलें एक बार उखड़ जाती हैं तो फिर उनकी दुबारा वैसे ही सेटिंग बहुत कुशल कारीगर ही कर पाते हैं। सही ढंग से सेटिंग नहीं होने पर सारी टाइलें धीरे-धीरे करके उखड़ जाती हैं। -धर्मबीर सिंह, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, निजामपुर

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