सर्दी में खतरनाक हुई सड़कें:हादसों में 13 दिन में 11 की मौत; 5 लोग तो सड़क किनारे खड़े होने से चपेट में आ गए

रेवाड़ीएक महीने पहले
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  • सावधान! सड़कों किनारे खड़े होने से बचें, 3 हादसों में 5 की जान गई
  • कोहरे में संभलकर चलें : हर साल नवंबर से फरवरी तक होती हैं अधिक दुर्घटनाएं
  • इंतजाम अधूरे- कई जगह सड़कों पर संकेतक व वाहनों पर रिफ्लेक्टर नहीं
  • पिछली सड़क सुरक्षा बैठक सड़कों के गड्ढों तक रही सीमित, राजमार्गों पर ध्यान नहीं

दिसंबर के 13 दिन। जिला में 7 सड़क हादसे में हुए, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और 15 घायल हो गए। पुलिस के लिहाज से सामान्य दुर्घटनाएं हैं, लेकिन इनकी वजह को लेकर जिला प्रशासन की गंभीरता नजर नहीं आ रही।

अचानक हादसे बढ़ गए, मगर प्रशासन की ओर से सड़कों पर सुरक्षित यातायात के लिए ना तो विशेष जागरूकता अभियान चला और ना ही वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाने को लेकर सख्ती हो रही है।

अभी भी सड़कों पर बहुत से डंपर सहित अन्य वाहन बिना रिलेक्टर दौड़ रहे हैं। सड़क सुरक्षा की बैठक में भी इस बार इस पर विशेष चर्चा नहीं हुई है। हालांकि हर बार नवंबर से फरवरी तक सर्दी के 4 माह में अधिक हादसे होते ही हैं, मगर इन दुर्घटनाओं को रोकने के इंतजाम भी जरूरी हैं। वाहन चालकों को भी अगले ढाई माह तक संभलकर चलने की जरूरत है, क्योंकि सुबह-शाम कोहरा भी छाना शुरू हो गया है। कभी भी कोहरा गहरा सकता है। इधर, लोगों को शाम ढलने के बाद बातचीत के लिए सड़कों के किनारे खड़े ना होने की भी सलाह दी जा रही है, क्योंकि इस तरह के कई हादसे सामने आ चुके हैं।

शीशे पर जमी फॉग भी हादसों की वजह: जिला परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की तरफ से अभी तक जिला में वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाने का काम शुरू नहीं किया है। ऐसे में रात के समय सड़कों के किनारे खड़े वाहनों की वजह से भी अक्सर हादसे हो जाते हैं। धुंध में फॉग लाइट भी जरूर लगाएं। परिवहन विभाग और पुलिस की तरफ से सर्दियों की शुरूआत से पहले वाहनों पर रिफ्लेक्ट लगाए जाते हैं लेकिन अभी तक नहीं लगाए हैं। हालांकि आगामी मीटिंग 17 दिसंबर को होनी है जिसमें भी देखनी वाली बात होगी कि सड़क हादसों को रोकने के लिए उपायों पर कितनी चर्चा होती है।

एक्सीडेंट-1 : सर्विस लेन पर कंपनीकर्मी को टक्कर

1 दिसंबर को दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर कापड़ीवास गांव के निकट गढ़ी अलावलपुर मोड़ के समीप सर्विस रोड पर खड़े हुए एक कंपनी कर्मचारी को कार चालक ने टक्कर मार दी। हादसे में कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए पीजीआईएमएस रोहतक रेफर किया गया था। उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक उत्तराखंड के गांव धपोलासेरा बागेश्वर निवासी 25 वर्षीय मोहित कुमार था, जो एक कंपनी में काम करता था।

एक्सीडेंट -2 : हाईवे किनारे खड़े 3 युवकों को कुचला

दिल्ली-जयपुर हाईवे 48 पर गांव जोनियावास के निकट 8 दिसंबर को एक डंपर ने सड़क किनारे खड़े 4 युवकों को टक्कर मार दी। हादसे में 3 युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। डंपर की टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक युवक तो 150 फीट दूर जा गिरा। डंपर बाइक को भी घसीटते हुए दूर तक ले गया। मृतकों में एक युवक रेवाड़ी जिला का रहने वाला था, जबकि बाकी दो दूसरे राज्यों से थे। पुलिस ने चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

एक्सीडेंट-3 : तीन को गाड़ी ने टक्कर मारी, एक की मौत

12 दिसंबर को धारूहेड़ा के नंदरामपुरबास रोड किनारे खड़े होकर बातचीत कर रहे 3 दोस्तों को एक बोलेरो चालक ने टक्कर मार दी। हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि उसके दो दोस्त घायल हो गए। धारूहेड़ा पुलिस ने बताया कि यूपी के जिला एटा के गांव लोहारू खेड़ा निवासी युवक धारूहेड़ा में किराए पर रह रहे थे। रविवार को एक शादी समारोह में गए थे। लौटने के दौरान वे बास रोड स्थित एक निजी स्कूल के पास खड़े थे। इसी दौरान हादसा हो गया।

सड़कों पर खड़े डंपर और अवरोधक से हादसे

जिला की सड़कों पर नजर डाले अधिकांश हादसे रात के समय सड़कों के किनारे खड़े होने वाले डंपर अथवा सड़कों पर मौजूद अवरोधकों की वजह से होते हैं। दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर जौनियावास के निकट कट पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं लेकिन यहां पर आज तक सुरक्षा के इंतजाम नहीं हुए हैँ। हालांकि यहां पर फ्लाईओवर प्रस्तावित है लेकिन उससे पहले के इंतजाम पर नजर नहीं गई है। यहां तक सड़क सुरक्षा समिति के लिए यह ब्लैक स्पॉट भी नहीं है। इसी तरह नांगल मूंदी में भी चौराहा सड़क हादसों की वजह से बन रहा है। यहां पर अवरोधक अथवा संकेतक जरूरी है।

औसतन हर दूसरे दिन हादसे, दो की मौत

जिला में दिसंबर के इन 13 दिनों पर नजर डाले इन दिनों में 7 सड़क हादसे हुए हैं। हादसों की संख्या के लिहाज से यह संख्या कम है लेकिन इसमें जान गंवाने और घायलों का आंकड़ों ठीक इससे डबल है। ऐसे में सड़क सुरक्षा के नाम पर की जाने वाली चिंता सड़क पर कहीं भी नजर नहीं आ रही है। इन मीटिंग में सड़कों के ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जाते हैं लेकिन 23 नवंबर को हुई मीटिंग में भी चर्चा महज शहर की सड़कों तक ही सिमटकर रह गई। जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकतर सड़क हादसे जिला से गुजर रहे दिल्ली-जयपुर राजमार्ग के अलावा अन्य स्टेट हाईवे पर हो रहे हैं। 7 दिसंबर की रात को दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर जौनियावास के निकट हुए हादसे में डंपर चालक ने 3 युवकों को कुचल दिया जिसमें तीनों की ही मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक घायल हो गया। इसी तरह का हादसा नांगल मूंदी के समीप हुई जिसमें दंपती की मौत हो गई और तीन अन्य लोग घायल हो गए।

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