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सीबीएसई एग्जाम में चीटिंग ?:12वीं का पेपर लीक; परीक्षा से 1 घंटे पहले आंसर-की सोशल मीडिया पर वायरल, सबूत समेत कंप्लेंट पर भी परीक्षा रद्द नहीं

रेवाड़ीएक महीने पहले
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सोशल मीडिया पर 10.31 बजे वायरल पेपर और आंसर-की। - Dainik Bhaskar
सोशल मीडिया पर 10.31 बजे वायरल पेपर और आंसर-की।
  • 10वीं कक्षा के बच्चे के मोबाइल पर पेपर आया तो लीक होने का पता लगा
  • पहले के पेपर में बच्चों के पास मिली पर्चियां, एक जगह तो 5 केस एक साथ बने

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की बोर्ड परीक्षाएं इस बार नकल को लेकर पूरी तरह कटघरे में है। पेपर लीक होने और आंसर-की समेत पर्चियां मिलने के बाद भी पेपर रद्द करना तो दूर पूछताछ तक नहीं हो रही। मंगलवार को भी 12वीं कक्षा का केमेस्ट्री विषय का पेपर परीक्षा से 1 घंटे पहले ही लीक हो गया तथा सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गया। एक स्कूल संचालक को पेपर लीक होने की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत ई-मेल के माध्यम से बोर्ड के पंचकूला रीजनल ऑफिस तथा जिला समन्वयक को भी शिकायत भेजी। हैरानी की बात ये है कि शिकायत के बाद भी बोर्ड की ओर से किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। जिस केंद्र से पेपर लीक हुआ, वहां बिना किसी रोकटोक के परीक्षा संपन्न हो गई।

बच्चे ने स्कूल में पेपर भेजकर बताया लीक हो चुका, ईमेल से शिकायत भेजी

इस समय सीबीएसई 10वीं और 12वीं की टर्म-1 (सेमेस्टर) परीक्षाएं चल रही हैं। इसमें बहु विकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। जबकि टर्म-2 में लिखित परीक्षा होती है। मंगलवार को 12वीं का केमेस्ट्री का पेपर था। जो कि सुबह 11.30 बजे शुरू होना था। इसी दौरान यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

भारतीय स्कूल नांगलमूंदी के निदेशक दीपक यादव ने बताया कि उनके स्कूल के 10वीं कक्षा के विद्यार्थी के मोबाइल पर भी कहीं से यह पेपर आ गया। उस बच्चे ने इस पेपर को स्कूल के नंबर पर भेजकर जिले के ही किसी सेंटर से पेपर लीक होने की जानकारी दी। दीपक यादव ने बताया कि जब जांच की तो पता लगा कि केवल प्रश्न पत्र नहीं, बल्कि उसके साथ आंसर की भी वायरल हो रही है।

परीक्षा 11.30 बजे शुरू होनी थी, जबकि यह पेपर 10.30 बजे आ चुका था। प्रश्न पत्र और आंसर की का मिलान किया गया तो 55 प्रश्नों में 53 सही थे, सिर्फ 2 ही गलत थे। इससे साफ है कि पूरी तैयारी के साथ पेपर लीक हुआ है। इसके बाद उन्होंने तुरंत स्क्रीनशॉट और तमाम सबूतों के साथ बोर्ड के पंचकूला रीजनल ऑफिस और जिला समनवयक के पास शिकायत भेजी। हालांकि उनके पास बोर्ड से इस बारे में कोई कार्रवाई किए जाने का जवाब नहीं आया है।

स्कूलों में ही बनाए गए सेंटर

बोर्ड द्वारा कई स्कूलों में ही सेंटर बना दिए गए हैं। उसमें वहीं के विद्यार्थी पेपर दे रहे हैं तथा वहीं का स्टाफ परीक्षा ड्यूटी दे रहा है। जिन स्कूलों में सेंटर नहीं बनाए गए हैं उनका नजदीकी स्कूल में ही सेंटर दिया गया है। कहने को यहां किसी अन्य स्कूल से सीबीएसई द्वारा एक ऑब्जर्वर भी नियुक्त किया गया है, मगर इसके बावजूद नकल नहीं रुक रही।

प्रश्न पत्र स्कूल में होते हैं कॉपी, इसके बाद पेपर

प्रश्न पत्र के लिए स्कूलों के पास परीक्षा से कुछ समय पहले करीब 9.30 या 9.40 बजे के लिंक ओपन होता है। वेबसाइट से प्रश्न पत्र डाउनलोड कर स्कूल कॉपी कराते हैं। इसे ऑब्जर्वर और केंद्र अधीक्षक परीक्षा शुरू होने तक लॉकर में रखवाते हैं। इसके बावजूद पेपर लीक होने का मतलब स्टाफ की मिलीभगत है।

बोर्ड प्रतिनिधियों का सिर्फ इतना जवाब... देखेंगे!

प्रश्न पत्र पर इस बार बड़े अक्षरों में कई जगह सेंटर कोड लिखा गया है। इससे यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि यह किस परीक्षा केंद्र से लीक हुआ है। पेपर को ऑब्जर्वर और केंद्र अधीक्षक की सख्त निगरानी में होना चाहिए। फिर भी यदि यह लीक हो रहा है तो उनकी पूरी जवाबदेही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि बोर्ड प्रतिनिधियों ने सिर्फ इतना ही जवाब दिया है कि... देखेंगे।

10 दिसंबर से 5 बच्चों की एक साथ बनी यूएमसी

इससे पहले 10 दिसंबर को फिजिक्स के पेपर में जिले के एक सेंटर पर 5 बच्चों को प्रवेश के दौरान ही पर्ची (आंसर की) के साथ पकड़ा गया। पर्ची की जांच की गई तो उसमें 35 प्रश्न सही मिले। विद्यार्थी को 45 ही प्रश्न करने थे। केंद्र अधीक्षक ने पांचों विद्यार्थियों का नकल का केस बनाया। बच्चों ने वीडियो में कबूल किया कि दोस्त ने मोबाइल पर पेपर भेजा था।

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