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ठगी की पड़ताल:44 दिन में साइबर फ्रॉड के 14 केस, 13 लाख ठगे; लिंक भेज या परिचित बन कर रहे धोखाधड़ी, पकड़े कोई नहीं जाते

रेवाड़ी5 दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो
  • पीएमओ में अधिकारी तक के फ्रीज खाते से की 29 हजार की शॉपिंग

भाई साहब नहीं पहचाना क्या? मैं आपका रिश्तेदार, आपके पास पैसे भेजने है, एक लिंक भेजा है उस पर क्लिक कर दें। सावधान! यदि आपके पास इस तरह की कॉल आती है तो समझ जाएं कि आपको ठगी के जाल में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। जिले में ठगी के कई मामलों में शातिर इसी तरह का तरीका अपनाकर लोगों के बैंक खाते में सेंध लगा रहे हैं। लॉकडाउन के बाद अचानक ही धोखाधड़ी के मामले तेज हो गए हैं।

पिछले 44 दिनों के दौरान ऑनलाइन फ्रॉड के करीब 14 केस आ चुके हैं, जिनमें लोगों के 13 लाख से ज्यादा रुपए ठग लिए गए। इनमें जिला के मेहनत मजदूरी करने वाले व्यक्ति से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक के अधिकारी से ठगी हो चुकी है। हर जगह यही स्थिति होने के बावजूद भी ठगों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। इसकी वजह साइबर तकनीक से शातिर तरीकों से की जा रही ठगी है। पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुंच पा रही है। पुलिस खुद मानती है कि एक्सपर्ट ठग इस तरह के वारदातें कर रहे हैं।

किसी के खाते से 55 हजार तो किसी के 2.55 लाख रुपए भी निकले

हर माह दर्ज हो रहे 8-10 मामले

जिले में औसतन हर माह में 8 से 10 केस दर्ज हो रहे हैं। अब चिंता की बात यह हो गई कि अधिकतर मामलों में राशि का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। कई मामलों में तो एक ही खाते से शातिर 1 से 2 लाख रुपए तक की राशि उड़ा लेते हैं। नया तरीका लिंक भेजकर उसे क्लिक कराना और फिर पूरा खाता साफ करना है। जनवरी से दिसंबर तक लिंक भेज करके की गई ठगी के सर्वाधिक 50 से अधिक मामले पुलिस के पास पहुंचे हैँ। इनमें शातिर आपसे बातचीत करते हुए ऐसा विश्वास दिलाते हैं कि वह आपके दोस्त ही बोल रहे हैं। फिर कहते हैं कि नहीं पहचाना क्या तो फिर आप दोस्त का नाम लेते हैं जिसके बाद आपके खाते में पैसे मंगाने का लालच दिया जाता है। यही लालच अधिकांश मामलों में पैसा उड़ने की वजह है। लिंक के बाद सबसे अधिक ठगी कार्ड क्लोनिंग के जरिए की गई है।

नया पैंतरा- बिजली बिल भुगतान से फ्रॉड

​​​​​​​शातिरों की तरफ से ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों से लेकर ऑनलाइन पेमेंट करने वाले उपभोक्ताओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। ठगी के 6-7 मामलों में ऐसा हुआ है कि जब उपभोक्ता ने ऑनलाइन शॉपिंग से सामान मंगाया और उसे वापस करने अथवा आर्डर कंफर्म कराने का झांसा देकर भी ठग कइयों का चपत लगा चुके हैं। ऑनलाइन बिजली बिलों के भुगतान को लेकर भी लोगों से धोखाधड़ी के खूब मामले सामने आए हैं। बिल का भुगतान नहीं होने अथवा दो बार होने की स्थिति में एप और बैंक के बीच ऑनलाइन प्लेटफार्म से सहायता लेना महंगा पड़ गया है।

ये महत्वपूर्ण; बैंक ने लौटाए रुपए

फरवरी 2019 माह में कोसली निवासी एवं पीएमओ में तैनात एक अधिकारी के फ्रीज खाते से शातिरों ने डाटा चोरी करके 29 हजार रुपए की शॉपिंग कर ली थी। इस तरह के मामले और भी कई उपभोक्ताओं के साथ हुए जिसमें मुख्यत: कार्ड क्लोनिंग के ही है। इस मामले में बैंक ने केस दर्ज होने के अगले दिन ही पीएमओ के खाते मंे 29 हजार रुपए जमा करा दिए हैं। अन्य मामलों में बैंकों का रवैया इस कदर रहता है कि वह ग्राहकों को ही इसका दोषी ठहराने का प्रयास करता है।

एक और ठगी; 2 लाख रुपए निकाले

जिला अलवर के गांव अकलीमपुर के विकास कुमार ने बताया कि वह बावल औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक पेंट कंपनी में कार्यरत है। 10 जनवरी की सुबह वह बावल चौक स्थित एक्सिस बैंक के एटीएम से पैसे निकालने के लिए गया था। जब वह पैसे निकालने लगा तो अनजान व्यक्ति उसके पीछे आकर खड़ा हो गया। लगभग एक घंटे बाद साढ़े 8 बजे से 8:36 बजे तक उसके खाते से 1 लाख रुपए निकल गए। अगले दिन 11 जनवरी को सुबह उसके खाते से 20-20 हजार रुपए 5 बार कट गए। वह उस समय मैसेज नहीं देख पाया। अगले दिन उसने मैसेज देखे तो खाते से कुल 2 लाख रुपए की राशि निकल गई।

सीधी बात : हंसराज, डीएसपी जिला मुख्यालय

Q- साइबर फ्रॉड केस दोबारा बढ़ गए हैं, कारण?

A- हां, इन दिनों कुछ केस आ रहे हैं। ज्यादातर मामलों मे लोगों के खुद की गलती की वजह से ऐसा होता है। प्रलोभन में आकर लोग जानकारियां साझा करते हैं, इसलिए शातिर लोग अपने मंसूबों को अंजाम दे जाते हैं।

Q- ठगी के इन मामलों को कैसे रोकें?

A- इन मामलों को प्राथमिक स्तर पर ही सतर्कता से रोका जा सकता है। व्यक्ति किसी भी अनजान कॉल पर जानकारी साझा न करें। ये स्पष्ट समझें कि बैंक भी फोन कर सिक्रेट कोड या एटीएम कार्ड से जुड़ी जानकारियां नहीं मांगता। जागरुकता से ही ठगी से बचा जा सकता है।

Q- ऐसे मामलों को रोकने में पुलिस क्या कर रही है?

A- पुलिस ऐस केस में तुरंत एफआईआर दर्जकर जांच शुरू करती है, मगर तकनीक का दुरुपयोग कर फ्रॉड करने के इन मामलों में आरोपियों तक पहुंच पाना भी आसान नहीं होता। फिर भी साइबर सेल की टीम की मदद से पूरा प्रयास होता है।

Q- ज्यादातर केस में बाहरी लोग फ्रॉड करते हैं, वहां रेड क्यों नहीं होती?

A- हमारी पुलिस टीमें इस तरह के मामलों में झारखंड और बिहार तक भी गई हैं, मगर जितने भी नंबर से कॉल आती हैं या जिन खातों में पैसा ट्रांसफर होता है, वो तकरीबन फर्जी पतों पर हैं। हमने लगातार वहां प्रयास भी किए, मगर फर्जी पतों की वजह से शत-प्रतिशत कामयाबी नहीं मिल पाई।

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