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किसान आंदोलन से 15 हजार फैक्ट्रियों को नुकसान:बहादुरगढ़ में ही 30 हजार करोड़ का फटका; बॉर्डर खुलने से आम लोगों के साथ उद्योगपतियों को राहत

रेवाड़ीएक वर्ष पहले
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एक साल से भी ज्यादा लंबा चले किसान आंदोलन के खत्म होने के बाद आम लोगों ही नहीं, बल्कि सिंघु और टीकरी बॉर्डर के आसपास की कंपनियों को बड़ी राहत मिली है। शनिवार से रास्ते तो पूरी तरह खुल जाएंगे, लेकिन रास्ता साफ होने में अभी कुछ दिन लगेंगे। वहीं दूसरी तरफ किसान आंदोलन की वजह से एक साल तक परेशानी झेलने वाले व्यापारी और उद्यमियों से किसानों ने खुले मन से माफी मांगते हुए उनका धन्यवाद भी किया। एक अनुमान के मुताबिक दोनों ही जगह व्यापारी और उद्योगपतियों को एक साल के अंतराल में 50 हजार करोड़ रुपए का फटका लगा है। इसमें 15 हजार फैक्ट्रियां भी शामिल हैं।

बता दें कि शनिवार से दोनों सोनीपत का सिंघु और बहादुरगढ़ का टीकरी बॉर्डर पहले की तरह की खुल जाएगा। किसान सुबह 9 बजे बड़े काफिले के साथ यहां से रवाना होंगे, लेकिन किसानों द्वारा कई किलोमीटर में बनाए गए अस्थाई आशियानों को अभी पूरी तरह हटाने और सड़क को साफ करने में कुछ दिन का और वक्त लगेगा। हालांकि स्थानीय कारोबारी और उद्योगपतियों के लिए इससे बड़ा राहत का पल कोई ओर नहीं हैं। क्योंकि बहादुरगढ़ के उद्योगपति को रास्ता खुलवाने के लिए एक साल के अंतराल में मानव अधिकार आयोग से लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें कोई बड़ी राहत नहीं मिली। अकेले बहादुरगढ़ में ही उद्योगपतियों को 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

दोनों जगह यानि टीकरी बॉर्डर और सिंघु बॉर्डर को मिलाकर नुकसान की बात की जाए तो यह 50 हजार करोड़ से भी ज्यादा है। बहादुरगढ़ में लेदर का बड़ा कारोबार है। कई नामी कंपनियां बहादुरगढ़ खासकर टीकरी बॉर्डर के आसपास बनी हुई है, जहां जूते और चप्पल बनाए जाते है, लेकिन बॉर्डर बंद होने से कई छोटी कंपनियां जहां बंद हो गई, वहीं बड़ी कंपनियों को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। पिछले दिनों ही बहादुरगढ़ के उद्यमियों की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई भी हुई थी। जिसमें दिल्ली पुलिस ने रास्ते खुले होने का हवाला दिया था। लेकिन अब किसानों की तरफ से आंदोलन खत्म करने की घोषणा करने के बाद उद्यमियों में ही नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापारियों में भी खुशी है।

बहादुरगढ़ में बंद पड़ी कंपनी।
बहादुरगढ़ में बंद पड़ी कंपनी।

अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान

भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) के मुताबिक किसान आंदोलन की वजह से हरियाणा की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचा है। किसानों के विरोध-प्रदर्शन, सड़क, टोल प्लाजा और रेल सेवाएं बाधित होने से आपूर्ति श्रृंखला खासी प्रभावित हुई। अर्थव्यवस्था पर इसका असर आगे भी दिखेगा। इससे अर्थव्यवस्था का पुनरोद्धार भी प्रभावित हो सकता है। कपड़ा, वाहन कलपुर्जा, साइकिल, खेल का सामान जैसे उद्योग क्रिसमस से पहले अपने निर्यात ऑर्डरों को पूरा नहीं कर पाएंगे जिससे वैश्विक कंपनियों के बीच उनकी छवि प्रभावित होगी।

एक साल अतिरिक्त किराया देना पड़ा

आंदोलन की वजह से दिल्ली से कच्चा माल लाने व तैयार माल ले जाने के लिए उद्यमियों को अतिरिक्त किराया देना पड़ रहा था। रूट डायवर्ट होने से स्थानीय व्यापारियों को भी नुकसान हुआ। आंदोलन खत्म होने से स्थानीय उद्योगों में काम सुचारू होने के साथ ही अन्य काम धंधे पटरी पर लौटेंगे। दिल्ली से आवागमन के रास्ते मिल जाएंगे तो उनका व्यापार दौड़ेगा। इससे रोजगार के भी अवसर मिलेगा।

उद्यमियों व व्यापारियों से मांगी माफी

किसान नेता बलदेव सिंह ने किसानों के संघर्ष की वजह से एक साल तक परेशानी झेलने वाले सिंघु और टीकरी बॉर्डर के उद्यमियों, दुकानदारों, व्यापारियों व राहगीरों से माफी भी मांगी। कई अन्य किसान नेताओं ने हाथ जोड़कर एक सुर में बोलते हुए कहा कि उनकी वजह से परेशानी झेलने वाले लोग हमें माफ करें। साथ ही आंदोलन में सहयोग देने वालों का धन्यवाद भी किया। किसान नेताओं ने कहा कि सिंघु और टीकरी बॉर्डर के स्थानीय लोगों ने आंदोलन में उनका जो साथ दिया उसे भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने इस आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर काम किया, लेकिन आंदोलन की वजह से हरियाणा में कुछ जगह परेशानी भी हुई, परंतु ये लड़ाई किसानी को बचाने की थी और इस जंग को जीतने के बाद घर लौटने में भी देरी नहीं की।

बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्न एंड इंडस्ट्री के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट नरेन्द्र छिकारा।
बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्न एंड इंडस्ट्री के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट नरेन्द्र छिकारा।

एक साल में बड़ा नुकसान झेला

बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्न एंड इंडस्ट्री के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट नरेन्द्र छिकारा ने कहा कि एक साल के दौरान अकेले बहादुरगढ़ के ही उद्योगपतियों ने ही हजारों करोड़ रुपए का नुकसान झेला है। बहुत सी कंपनियां बंद तक हो गई। हमनें मानव अधिकार आयोग से लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। किसान नेताओं से बात की, लेकिन कोई हल नहीं निकला, लेकिन किसान आंदोलन खत्म होने से अब बड़ी राहत मिली है। उम्मीद है कि जल्द ही पहले की तरह सब सामान्य हो जाएगा।

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