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कबाड़थाना:पुलिस थानों में पड़े-पड़े कबाड़ में तब्दील हो रहे दुर्घटनाग्रस्त व जब्त किए वाहन

रेवाड़ी8 महीने पहले
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धारूहेड़ा थाना में खड़े जब्त वाहन। - Dainik Bhaskar
धारूहेड़ा थाना में खड़े जब्त वाहन।
  • अशुभ मान अधिकतर वाहन मालिक लेकर ही नहीं जाते
  • जिन वाहनों से बड़ी दुर्घटना हुई उनकी सुपुर्दगी में ही लग जाता है लंबा समय

जिले में किसी भी थाना में जाए तो वहां पर एक कोना ऐसा भी मिलेगा जहां पर वाहन कबाड़ बन रहे हैं। स्थिति यह है कि जितनी संख्या में सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ी है तो दुर्घटनाएं भी उतनी ही बढ़ गई है। कई बार ऐसे हादसे होते हैं जिनको देखकर भी व्यक्ति की रूह कांप जाती है। अब मरने वाले जिस वाहन में सवार में थे ऐसे वाहन उस परिवार के लिए ही अशुभ बन जाते हैं। इसके चलते जिला के तमाम पुलिस थानों में यह वाहन कबाड़ बन रहे हैं। हालांकि इन्हें सुपुर्ददारी पर भी दिया जाता है लेकिन अधिकतर वाहन मालिक उन्हें लेकर ही नहीं जाते हैं। दुर्घटनाओं के साथ एक्साइज एक्ट व अन्य मामलों में जब्त किए जाने वाले वाहनों की संख्या कम नहीं है।

पुलिस की सूचना के बाद भी नहीं ले जाते

जिले में यूं तो थानों की संख्या 14 है लेकिन महिला थाना ही एकमात्र ऐसा है जहां पर इस तरह के वाहन नहीं है। बाकी तमाम ट्रैफिक थाना सहित अन्य 12 थानों में ऐसे वाहन कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। चूंकि पुलिस की तरफ से एक निश्चित समय और पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद इन वाहनों को नीलाम किया जाता है लेकिन उस नीलामी के लिए भी 3 से 4 साल तक का समय लग जाता है। जिला के तमाम थानों में दुर्घटनाग्रस्त हुए वाहनों की संख्या सर्वाधिक है।

दिल्ली-जयपुर एनएच-48, एनएच-71 के साथ नारनौल रोड पर स्थित खोल थाना की कुंड चौकी में ऐसे वाहनों की संख्या सबसे ज्यादा है। हालांकि शहरी थानों में शामिल सिटी व मॉडल टाउन में भी ऐसे वाहनों की संख्या कम है। यहां पर आबकारी अधिनियम व लावारिस हालत में मिले हुए वाहन अधिक है। कबाड़ बन रहे ये वाहन पुलिस के लिए भी बड़ी मुसीबत है क्योंकि इनमें से अधिकांश का सामान गायब तक हो जाता है। लावारिस मिलने वाले वाहनों के बारे में पुलिस उनकी तहकीकात करके असल मालिक तक पहुंचने का प्रयास करती है तो इनमें अधिकांश वाहन ऐसे होते हैं जो कि चोरी हो चुके हैं। चूंकि तीन माह तक चोरी वाहन के ट्रेस नहीं होने की स्थिति में पुलिस को अनट्रेस रिपोर्ट देनी होती है जिसके बाद बीमा कंपनी मालिक को उसकी कीमत अदा कर देता है। ऐसे में लावारिस वाहनों को उनके असल मालिक देखने तो आ जाते हैं पर स्थिति देखकर लेकर ही नहीं जाते हैं।

दुर्घटनाग्रस्त वाहन ही सर्वाधिक

थानों में जब्त किए गए अधिकांश वाहनों में दुर्घटना करने वाले होते हैं। सामान्य दुर्घटनाओं में तो वाहन मालिक उन वाहनों की जमानत करा लेते हैं लेकिन जब किसी वाहन से बड़ी दुर्घटना हो जाती है तो उनमें जमानत प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती है। कई वाहनों के पूर्ण दस्तावेज नहीं होने पर भी मालिक उन्हें छुड़ा नहीं पाते हैं। वहीं जिन वाहनों से बड़ी दुर्घटनाएं हुई या जिनमें परिवार के कई लोगों की मौत हो जाती है ऐसे वाहनों को भी पीड़ितों के परिवार लेकर ही नहीं जाते हैं। उन वाहनों को भी पुलिस को दुर्घटनास्थल से उठाकर थाना में लाना पड़ता है। ऐसे वाहनों में कार, ऑटो व बाइक अधिक होती है।

सिटी के थानों को छोड़कर सभी थानों में 100 से अधिक वाहन

शहरी थानों को छोड़ दें तो जिला के तमाम थानों में कबाड़ बने रहे वाहनों की संख्या 100 से भी अधिक है। हालांकि सितंबर माह में कुछ वाहनों को नीलाम किया जा चुका है इसके बाद भी लगभग पूरे जिले में 1 हजार से भी अधिक वाहन थानों में कबाड़ बन रहे हैं। इनमें अधिकांश बाइक, कार, ऑटो, बस, कैंटर व डंपर है। बड़े वाहनों की संख्या गिनी-चुनी है।

वाहनों को नीलाम करने की प्रक्रिया कर चुके हैं प्रारंभ: एसपी अभिषेक जोरवाल

दुर्घटनाग्रस्त सहित विभिन्न मामलों में जब्त किए जाने वालों को नीलाम करने के लिए एक लंबी प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसकी वजह से कुछ समय लग जाता है। हमने पिछले माह में भी इन वाहनों को नीलाम किया है और अभी भी प्रक्रिया चल रही है। दुर्घटनाग्रस्त हुए वाहनों को कई परिवार लेने तक भी नहीं आते हैं। -अभिषेक जोरवाल, एसपी।

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