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ये गलत बात है:एडीसी 15 दिन में जांच पूरी करेंगे कार्रवाई जरूर होगी : राज्यमंत्री

रेवाड़ीएक महीने पहले
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  • ऐसे भीड़ करते रहे तो कष्ट कम होने की बजाय बढ़ जाएंगे, ये संक्रमण को सीधा निमंत्रण है

रेवाड़ी | बाल भवन में हुई कष्ट निवारण समिति की बैठक के दौरान सब लो सोशल डिस्टेंसिंग का नियम भूल गए। सूची में शामिल परिवादों की सुनवाई के बाद बाकी लोगों की शिकायतों पर राज्यमंत्री ने गौर करना शुरू किया तो लोग शिकायत देने के लिए एकत्रित हो गए।

करीब 15 मिनट तक यही स्थिति रही। पुलिस व्यवस्था को बनाए नहीं रख पाया। वहीं, राज्यमंत्री ने कहा कि अब ऐसी स्थिति है कि कोरोना के चलते काम नहीं रोके जा सकते। सभी को कोरोना के साथ जीने की आदत डाल लेनी चाहिए। मीटिंग में हमने सावधानी बरती, मगर लोग ही नहीं माने।

ऑक्सीजन केस... कष्ट निवारण समिति सदस्य ने कहा - कोई सुनता तो जानें बच जाती

कष्ट निवारण समिति के सदस्य सेवानिवृत शिक्षाविद निहाल सिंह ने भी भरे जनता दरबार में अपनी पीड़ा रखी। उन्होंने कहा कि 25 अप्रैल को विराट अस्पताल में भर्ती 4 मरीजों की जान ऑक्सीजन की कमी से चली गई थी, जिनमें उनका छोटा भाई भी था। गैस की कमी की बात कहकर अस्पताल द्वारा थोड़ी-थोड़ी ऑक्सीजन दी जा रही थी। हमने 14 अप्रैल को अपने भाई को दाखिल कराया था।

डॉक्टरों ने 21 अप्रैल को रेमडेसिविर के 6 इंजेक्शन लिख दिए। हमने मंत्री-अफसरों तक को फोन किए, मगर इंजेक्शन नहीं मिले। आखिर ब्लैक में 35 हजार रुपए में 2 इंजेक्शन लेने पड़े। फिर ऑक्सीजन की चुनौती आ गई। अस्पताल ने अचानक जवाब दे दिया कि ऑक्सीजन खत्म हो गई है, मरीज को दूसरी जगह ले जाओ।

कहा कि गैस एजेंसी पर ऑक्सीजन सिलेंडर की गाड़ी तैयार है, मगर जिला स्वास्थ्य विभाग के किसी डॉक्टर द्वारा गाड़ी रुकवाने की बात पता लगी। इस अव्यवस्था में 4 लोगों की जान चली गई। ये प्राकृतिक मौत नहीं, बल्कि उन्हें तो एक तरह से मारा गया है। इसलिए लापरवाही के लिए जिम्मेदारों पर तुरंत एफआईआर होनी चाहिए। इस पर मंत्री ओम प्रकाश ने एडीसी राहुल हुड्डा को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।

^डीसी यशेंद्र सिंह ने अस्पतालों द्वारा इलाज के नाम पर अधिक राशि वसूलने के मामले में एडीसी की अध्यक्षता में एक कमेटी की गई है। यदि किसी व्यक्ति से अस्पताल अधिक राशि वसूल रहे हैं या हाल ही में वसूली है तो इसकी शिकायत दें। इसकी जांच कराकर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। कुछ लोगों के पैसे अस्पतालों ने लौटाए भी हैं।

शिक्षा अधिकारियों ने लटकाए रखा मामला, मीटिंग हुई तो एस्टीमेट भेजा : पार्षद

जिला शिक्षा विभाग की लापरवाही की भी शिकायत पहुंची। शिकायतकर्ता जिला पार्षद अमित यादव ने कहा कि 15 जुलाई 2016 को सुमाखेड़ा की राप्रापा को वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का दर्जा मिला। 5 साल बाद भी इस विद्यालय में सिर्फ 5वीं कक्षा तक के संसाधान हैं। न भवन है और न फर्नीचर। जवाब में डिप्टी डीईओ ने कहा कि एक दिन पहले ही 63.1 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाकर भेज दिया है।

मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि जब पता लगा कि मीटिंग में पूछा जाएगा तो एस्टीमेट बना दिया, अब तक क्यों नहीं। विज्ञान संकाय में स्टाफ के लिए प्रयासों के बारे में पूछने पर डिप्टी डीईओ जवाब तक नहीं दे पाए। इस पर डिप्टी डीईओ जवाब नहीं दे पाए। पार्षद ने 12.5 करोड़ का बजट मंजूर होते हुए भी जाटूसाना कॉलेज का भवन नहीं बनने का मुद्दा भी उठाया।

कालुवास निवासी चंद्रहास ने कहा कि उन्होंने सेक्टर-19 में प्लॉट खरीदा था। अब तक इसकी पजेशन अटकी हुई है। संबंधित चार्ज जमा करा चुके हैं। दफ्तरों के चक्कर लगाकर परेशान हो गए, लगता नहीं इस जन्म में ये सुखद देख पाउंगा। एचएसवीपी ईओ ने जवाब दिया कि ये इस प्लॉट के तीसरे अलॉटी हैं।

यह मामला कोर्ट में चला, जिसमें विभाग भी एसएलपी में गया है। मंत्री ने डीसी को खुद इस मामले को देखने को कहा। कोमल कुमारी पत्नी नरेंद्र कुमार बांबड ने भी जमीन का मसला रखा। डीटीपी और तहसीलदार ने अपने-अपने तर्क दिए। इस मामले को भी डीसी देखेंगे। राहुल यादव डहीना की शिकायत पर डीडीपीओ ने जवाब दिया कि पूर्व सरपंच दोषी पाया, जिसकी पेमेंट रोक दी गई है।

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