कोर्ट का फैसला:एडीजे की अदालत ने राजकीय अध्यापक संघ के पूर्व प्रधान की सजा का फैसला पलटा, दोषमुक्त

रेवाड़ीएक महीने पहले
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  • वर्ष 2011 में खड़गवास निवासी ओमप्रकाश की शिकायत पर दर्ज हुआ था केस
  • निचली अदालत ने सुनाई थी दो साल की सजा

जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरजात बसवाना की अदालत ने शहर के सेक्टर-3 की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी एवं हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ के पूर्व प्रधान सतेन्द्र सिंह आर्य को सजा से दोषमुक्त किया है। उनको गांव खड़गवास निवासी ओमप्रकाश की शिकायत पर दर्ज किए मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने वर्ष 2017 में दो साल की सजा सुनाई थी।

घटनाक्रम के अनुसार उस समय नंगली गोधा राजकीय स्कूल में लेक्चरर पद पर कार्यरत सतेन्द्र सिंह आर्य को राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में वर्ष 2010 में बारहवीं कक्षा की अंग्रेजी की उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन कार्य में लगी थी। इसके बाद एक दिन बाद परीक्षा नियंत्रक कंधे में फ्रैक्चर संबंधी मेडिकल पेश किया था। इस मेडिकल के आधार पर उनकी ड्यूटी मूल्यांकन कार्य से हटाकर कार्यालय में लगा दी गई थी। इसके आधार पर परीक्षा नियंत्रक ने संबंधित कार्यकाल की उपस्थिति दी।

उनकी ड्यूटी मूल्यांकन कार्य से हटाकर कार्यालय में लगाने के बाद मामले में एक साल बाद जून 2011 में शिकायत दी गई दी थी कि नियंत्रक द्वारा दी गई उपस्थिति फर्जी है। इसको लेकर मामला काफी अधिक बढ़ गया था। तत्पश्चात इस मामले में पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी गई जिस पर पुलिस की तरफ से जून 2011 में ही उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने पुलिस की जांच और गवाह सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर उनको साल 2017 में दो साल की सजा सुनाने के साथ 3 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।

इस सजा के खिलाफ सतेन्द्र सिंह आर्य ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील की थी। अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सभी साक्ष्य और अदालत की तरफ से दिए गए फैसले की समीक्षा करते हुए यूपी स्टेट वर्सेस अशोक कुमार और इंद्रसिंह वर्सेस दिल्ली राज्य मामले को आधार मानते हुए उन्हें तमाम आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।

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