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रेमडेसिविर के लिए मारामारी:प्रदर्शन कर बताई पीड़ा- डॉक्टर लिख रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन, सिविल में मिल नहीं रहा, ब्लैक में ~30-40 हजार मांग रहे

रेवाड़ीएक महीने पहले
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रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिलने के कारण व ब्लैक में अिधक रुपयों में मिलने पर रोष जताते मरीजों के परिजन। - Dainik Bhaskar
रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिलने के कारण व ब्लैक में अिधक रुपयों में मिलने पर रोष जताते मरीजों के परिजन।

देशभर के विशेषज्ञ बेशक लगातार स्पष्ट कर रहे हैं कि रेमडेसिविर इंजेक्शन कोरोना संक्रमितों के लिए कोई अचूक दवा नहीं है, मगर इसके बावजूद भी इस इंजेक्शन के लिए मारामारी चल रही है। इलाज कर रहे डॉक्टर खुद मरीज के परिजनों से रेमडेसिविर इंजेक्शन लाकर देने को कह रहे हैं। लोग इंजेक्शन की व्यवस्था करने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर लगा रहे हैं, मगर इंजेक्शन मिल नहीं पा रहे।

गुरुवार को भी इंजेक्शन नहीं मिलने पर मरीजों के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सिविल अस्पताल में सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर ही प्रदर्शन किया तथा अपनों के जिंदगी-मौत से जूझने का हवाला देकर इंजेक्शन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई। कहा कि मरीज अस्पतालों में एक-एक सांसें गिन रहे हैं, मगर अफसर कोई जवाब तक देने को तैयार नहीं है। इधर-उधर किसी से रेमडेसिविर दिलाने की बात करते हैं तो 30-40 हजार रुपए तो कोई इससे भी ज्यादा की सौदेबाजी करता है। जिसे खरीदना भी गरीब परिवारों की हैसियत में नहीं है।

मनमानी पड़ रही भारी; अपनों के इलाज की चिंता आंखों से निकाल रही आंसू

पति की देखभाल करुं या इंजेक्शन ढूंढती रहूं : अस्पतालों में भर्ती पतियों के लिए इंजेक्शन मांगने कुछ महिलाएं भी सिविल अस्पताल पहुंचे। आंखों में आंसू लिए एक महिला ने कहा कि उसके पति को देखभाल की जरूरत है। मैं अकेली उनके साथ यहां हूं, अब सुबह से इंजेक्शन के लिए चक्कर लगा रही हूं। उन्हें अकेला छोड़ा हुआ है। कहीं से मदद नहीं मिल रही।

ऐसे तो हम भी संक्रमित होकर भर्ती हो जाएंगे : परिवार के सदस्य के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन लेने पहुंचे व्यक्ति ने कहा कि डॉक्टर ने इंजेक्शन लाने को कहा है। इंजेक्शन कहीं मिल नहीं रहा। सिविल अस्पताल में सुबह से दोपहर हो गई। यहां सोशल डिस्टेंसिंग नहीं, कोई और व्यवस्था नहीं। यहां तो हम भी संक्रमित होकर भर्ती हो जाएंगे। बाहर 40-50 हजार रुपए मांगते हैं। इतने रुपए कहां से लाएं। बोलते-बोलते ही गला भर आया।

ब्लैक में न खरीदें, ये गलत है, और भरोसेमंद भी नहीं

1. डॉक्टर सलाह देते हैं कि रेमडेसिविर इंजेक्शन कोई जादुई दवा नहीं है, जिससे कोरोना संक्रमित के पूरी तरह ठीक होने की गारंटी दी जा सके। किसी शोध में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इस पर निर्भरता ठीक नहीं।
2. मरीज के परिजनों ने 40-50 रुपए में कालाबाजारी की बात कही, किसी का नाम नहीं लिया, यह सौदा किसी भी सूरत में सही नहीं है। कालाबाजारी गैरकानूनी है तथा भरोसेमंद भी नहीं है कि लोग फर्जी इंजेक्शन तो नहीं बेच रहे हैं।

सुबह 6 बजे से इंतजार में थे, दोपहर हो गई : सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए लोगों ने नारेबाजी की तथा इंजेक्शन मुहैया कराने की मांग उठाई। बताया कि वे लोग सुबह 6 बजे सिविल अस्पताल में पहुंच गए थे, ताकि उन्हें इंजेक्शन मिल सकें। यहां काफी देर बाद बताया गया कि 11 बजे मिलेंगे। इसके बाद 12 बजे का समय दिया। हार-थककर लोगों में रोष पनप गया।

कमेटी करेगी निर्णय- किसे मिले इंजेक्शन

स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से लोगों केा जवाब दिया गया कि अधिकारियों की एक कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी निर्णय लेगी कि पहले किसे इंजेक्शन दिया जाए। इससे पारदर्शिता आएगी। जो भी इंजेक्शन आ रहे हैं वो संक्रमितों के लिए ही दिए जा रहे हैं। हालांकि लोगों ने इस पर भी सवाल उठाए कि किसे इंजेक्शन दिए जा रहे हैं इसकी जांच होनी चाहिए। पहले कहा तेा बोले कि 20 ही इंजेक्शन मिले थे, जो कि बांट दिए गए।

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