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सुविधा:दिल्ली से अजमेर तक इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा, अब दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक ट्रेन

रेवाड़ी2 महीने पहले
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दिल्ली-रेवाड़ी-जयपुर ट्रैक अब अजमेर तक पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हो चुका है। इसी के साथ अब इस ट्रैक पर चलने वाली तमाम ट्रेनों में डीजल इंजन की जगह इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ेंगे जिससे न केवल यात्रा का समय घटेगा अपितु ट्रेनों की लेटलतीफी भी दूर हो जाएगी। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को अलवर के ढिंगावड़ा स्टेशन पर आयोजित एक कार्यक्रम में इस ट्रैक के पूरी तरह से इलेक्ट्रिफिकेशन होने के बाद पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन को रवाना किया। अलवर से बांदीकुई तक का यह ट्रैक पहले न केवल सिंगल था अपितु इसका इलेक्ट्रिफिकेशन का भी काम नहीं हुआ है।

रेलवे की तरफ से इससे पहले दिल्ली से वाया रेवाड़ी होते हुए अलवर तक का इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पिछले साल जनवरी में ही पूरा कर दिया था। इसके बाद रेवाड़ी से दिल्ली तक इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित पैसेंजर ट्रेनों का भी संचालन किया गया था लेकिन इनका संचालन अधिक समय तक नहीं हुआ है।

लॉकडाउन से पहले इस रूट पर डेमू इंजनों से पैसेंजर ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है लेकिन अभी पैसेंजर ट्रेनों का संचालन प्रारंभ नहीं हुआ है। वहीं एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन डीजल इंजन से किया जा रहा था। अब अलवर से बांदीकुई तक के ट्रैक का काम पूरा होने के बाद यह रूट अजमेर तक पूरी तरह से इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है। ऐसे में अब दिल्ली सहित यूपी, पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर से आने वाली तमाम ट्रेनों का जहां दिल्ली में आने के बाद इंजन बदलना होता था वह प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। इससे दिल्ली में आधा घंटे से भी अधिक समय तक रहने वाला ठहराव भी कम हो जाएगा।

दिल्ली का सफर महज 1 घंटे में पूरा हो सकेगा
रूट के इलेक्ट्रिफिकेशन होने के बाद सबसे अधिक लाभ रेवाड़ी के ही यात्रियों को मिलेगा। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पैसेंजर ट्रेन के डीजल इंजन की औसत रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा की होती है जबकि इलेक्ट्रिक इंजन में यह रफ्तार बढ़कर 65 से 70 किमी प्रति घंटा हो जाती है। दिल्ली से रेवाड़ी की दूरी 80 किमी है। डीजल इंजन को यह दूरी तय करने में लगभग 2 घंटे का समय लगता है और इलेक्ट्रिक इंजन द्वारा यह दूरी लगभग 1 घंटा में ही तय कर ली जाएगी। वहीं एक्सप्रेस ट्रेनों की बात करें तो इस श्रेणी के इलेक्ट्रिक इंजन की रफ्तार औसत 105 किमी प्रति घंटा की होती है जबकि डीजल इंजन की रफ्तार औसत 80 किमी प्रति घंटा की होती है। एक्सप्रेस ट्रेन द्वारा दिल्ली से रेवाड़ी का सफर 45 मिनट में ही तय कर लिया जाएगा।

नारनौल रूट का काम पहले ही हुआ पूरा
रेवाड़ी से वाया नारनौल-फुलेरा होते हुए रूट का अजमेर तक पहले ही इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा हो चुका है। यह रूट भी इसी माह पूरी तरह से विद्युतीकरण हुआ जिसके बाद बीते मंगलवार से इस रूट पर दिल्ली सराय रोहिल्ला-अजमेर जनशताब्दी एक्सप्रेस में इलेक्ट्रिक इंजन लगाया जा चुका है। अब संभावना है कि अन्य ट्रेनों में भी इलेक्ट्रिक इंजन का प्रयोग किया जाएगा।

जयपुर-अजमेर तक बढ़ेगी एक्सप्रेस ट्रेनें, पैसेंजर की भी बढ़ी संभावना
अजमेर तक के रूट का इलेक्ट्रिफिकेशन होने के बाद पूर्वोत्तर सहित अन्य राज्यों से आने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों का विस्तार जयपुर-अजमेर तक भी होने की संभावना है। साथ ही दिल्ली-रेवाड़ी के बीच संचालित पैसेंजर ट्रेनों का भी विस्तार अलवर के साथ नारनौल रूट पर भी किया जा सकेगा।

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