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रेवाड़ी में तितलियों पर विशेष सर्वेक्षण:विशेषज्ञों ने खोल क्षेत्र के अरावली क्षेत्र में 10 गांवों में 60 प्रजातियों की पहचान की, 1 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में घूमे एक्सपर्ट

रेवाड़ी2 महीने पहले
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देश से लुप्त हो रहे वन्यजीव प्रजातियों को तलाशने का काम लगातार चल रहा है। इसी कड़ी में हरियाणा के रेवाड़ी में पहली बार तितलियों पर विशेष सर्वेक्षण हुआ। अरावली पहाड़ी के साथ लगते 10 गांवों की 1 हजार हेक्टेयर भूमि पर देशभर के एक्सपर्ट ने विशेष सर्वेक्षण करते हुए तितलियों की 60 प्रजातियों की पहचान की है। इससे साफ है कि अरावली पहाड़ी का यह क्षेत्र जैव विविधता के लिए उपयुक्त है।

दरअसल, वन एवं वन्यजीव विभाग के पीसीसीएफ एवं चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जगदीश चन्द्र के नेतृत्व में देशभर के एक्सपर्ट रेवाड़ी जिले में अरावली पहाड़ी से लगते खोल क्षेत्र के 10 गांवों में पहुंचे और यहां तितलियों पर विशेष सर्वेक्षण शुरू किया। 1 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में दिनभर घूमने के बाद बारी-बारी करके तितलियों की 60 प्रजातियों की खोज की गई। हरियाणा में इस तरह का यह सर्वेक्षण पहली बार हुआ है।

इन 10 गांव में घूमे एक्सपर्ट
रेवाड़ी से करीब 20 किलो मीटर की दूरी पर खोल क्षेत्र की अरावली पहाड़ियां शुरू हो जाती हैं। इनमें पालड़ा, अहरोद, बासदूदा, खोल, मनेठी, भालकी, माजरा, नांधा, बलवाड़ी व खालेटा गांव अरावली पहाड़ी से सटे हुए हैं। इन्हीं गांवों में देशभर से आए एक्सपर्ट ने तितलियों पर विशेष सर्वेक्षण किया है।

एक्सपर्ट की टीम।
एक्सपर्ट की टीम।

बड़े शहरों के 60 एक्सपर्ट पहुंचे
रेवाड़ी में हुए इस विशेष सर्वेक्षण में दिल्ली, मुम्बई, फरीदाबाद सहित देशभर के 60 एक्सपर्ट शामिल हुए। जिला वन्य अधिकारी सुंदर सांभरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि पर्यावरणीय अध्ययन के लिए यह सर्वेक्षण महत्वपूर्ण है। हरियाणा में इस तरह का सर्वेक्षण पहली बार हुआ है।

इको सिस्टम का बायो इंडिकेटर हैं तितलियां
वन अधिकारी के अनुसार, तितलियों को हमारे इको सिस्टम का बायो इंडिकेटर माना जाता है। तितलियों की उपस्थिति एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। यह समृद्ध और विधिक जीवन रूपों की उपस्थिति का भी प्रतीक है। इस सर्वेक्षण में गुरुग्राम के मुख्य वन संरक्षक एमएस मलिक की विशेष भूमिका रही।

तितली एक महत्वपूर्ण परागकण
हरियाणा में यह अपनी तरह का पहला तितलियों का सर्वेक्षण करने का उद्देश्य प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए हर प्रकार के जीव-जंतु की महत्ता की जानकारी प्राप्त करना था। तिततिलां, जो एक महत्वपूर्ण परागकण भी है व कई पौधों की प्रजातियों को परागित करती हैं, वे फूल से फल की ओर बढ़ते हैं। पौधों और तितलियों के बीच एक सहजीव संबंध है।

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