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शहर की सरकार की तैयारियां:नप चुनाव के प्रभारी बने पूर्व शिक्षा मंत्री, बोले- निशान पर लड़ने का निर्णय बाकी; कांग्रेस सिंबल से इंकार

रेवाड़ी2 महीने पहले
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नगर परिषद रेवाड़ी के चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। भारतीय जनता पार्टी ने तो रेवाड़ी का चुनाव प्रभारी भी तय कर दिया है। यह जिम्मेदारी पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा को सौंपी गई है। इस बार प्रधान का चुनाव भी नगर पार्षदों की बजाय जनता ही करेगी। जिस तेजी से भाजपा तैयारी में जुट गई है, उससे पूरी संभावना है कि सिंबल पर चुनाव लड़ा जा सकता है। सत्तासीन पार्टी चाहेगी कि सिंबल पर चुनाव के जरिये उसके सीधे दखल से शहर की सरकार बने।

हालांकि कांग्रेस पार्टी ने फिलहाल सिंबल से चुनाव लड़ने की बात से स्पष्ट इंकार कर दिया है। मगर चुनाव में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को जिताने के लिए भी पूरा जोर लगाया जाएगा। तमाम तैयारियों के बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन 2-2 याचिकाओं पर भी न्यायालय के निर्णय का सभी को इंकार है। क्योंकि बेशक अभी तक हाईकोर्ट ने चुनावों पर किसी तरह का स्टे नहीं दिया है, मगर याचिकाकर्ता स्टे के लिए अर्जी लगा चुके हैं।

अध्यक्ष और सदस्यों के लिए तय चुनाव खर्च राशि

  • हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर परिषद के अध्यक्ष के लिए चुनाव खर्च सीमा 15 लाख रुपए और नगरपालिका के अध्यक्ष के लिए 10 लाख रुपए निर्धारित की है।
  • नप और नपा सदस्यों (पार्षद) के लिए चुनाव खर्च की सीमा में संशोधन करते हुए खर्च सीमा में बढ़ोतरी की है। अब नगर परिषद के सदस्यों के लिए 3 लाख से बढ़ाकर 3.30 लाख और नपा सदस्यों के 2 लाख से बढ़ाकर 2.25 लाख रुपए की है।
  • चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार या उनके चुनाव एजेंट द्वारा चुनाव खर्च का ब्यौरा रखना होगा और परिणाम घोषित होने से 30 दिनों के अंदर खर्च का ब्यौरा डीसी के पास जमा कराना होगा।
  • यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित समयावधि में चुनाव खर्च का ब्यौरा पेश करने में असफल होता है तो आयोग उसे अयोग्य घोषित कर सकता है और उम्मीदवार आदेश जारी होने की तिथि से 5 साल तक के लिए अयोग्य घोषित रह सकता है।

नियम बदले पहली बार वोट से जनता चुनेगी प्रधान

इस बार के चुनाव में प्रधान पद के चुनाव के नियम बदल चुके हैं। महीनेभर पहले ही हरियाणा नगरपालिका अधिनियम 1973 में संशोधन किया गया था कि अब राज्य में नप और नपा के अध्यक्ष सीधे चुनाव के माध्यम से संबंधित वार्डों के मतदाताओं द्वारा चुने जाएंगे। जबकि इससे पहले नप में जनता द्वारा पार्षदों का चुनाव किया जाता था। चुने गए पार्षद अपना प्रधान और उपप्रधान चुनते रहे हैं। इस पार्षदों की तरह ही प्रधान को भी मतदाता ही चुनेंगे।

सीधे चुनाव का फायदा खरीद फरोख्त की राजनीति रुकेगी

नगर परिषद शहर की सरकार मानी जाती है। प्रधान के नेतृत्व में ही तमाम फैसले लिए जाते हैं। हर पार्टी और राजनेता चाहता है कि उनके समर्थन का ही चेयरमैन नगर परिषद की कमान संभाले। चुनावों के दौरान प्रधान पद पाने के लिए पार्षदों को अपने पाले में लाने के लिए प्रलोभन की शिकायतें भी खूब रहती हैं। सीधे चुनाव से यह काम थम जाएगा। क्योंकि ये जनता के हाथ में होगा कि किसी प्रधानी की कुर्सी सौंपी जाए।

कांग्रेस सिंबल पर नहीं लड़ती निकाय चुनाव : कैप्टन अजय यादव

कांग्रेसी नेता एवं पूर्व वित्तमंत्री कै. अजय यादव का कहना है कि भाजपा ने नगर निगमों में सिंबल पर चुनाव लड़ा है। मगर कांग्रेस पार्टी नगर निकायों के चुनाव सिंबल पर नहीं लड़ती है। कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को पूरा सहयोग देंगे। प्रत्याशी की जीत के लिए ताकत लगाई जाएगी। प्रदेश में जैसे हालात हैं उससे तय है कि भाजपा सरकार से लोग खुश नहीं हैं।

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