नप की 8 माह बाद हंगामेदार बैठक:आईजीएल ने लाइन बिछाने के लिए खोदा शहर, गड्ढे ज्यों के त्यों छोड़े, ईओ बोले- कंपनी को नोटिस देंगे

रेवाड़ी2 महीने पहले
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  • वार्डों में सफाईकर्मी मनमर्जी से लगाए, कहीं 5 तो कहीं 15

नगर परिषद की 8 माह बाद हुई बैठक के दौरान पार्षदों ने जमकर शहर के मुद्दे उठाए। चेयरपर्सन पूनम यादव की अध्यक्षता में बैठक की कार्यवाही तीन घंटे तक चली। इसमें पार्षद कृष्ण गोपाल, लोकेश कुमार, रेखा यादव सहित अन्य ने कहा कि आईजीएल कंपनी ने लाइन बिछाने के लिए पूरे शहर में खुदाई कर डाली।

सड़कों के सहारे भी खुदाई हुई। गड्ढों में मिट्टी तो डाल दी, मगर पूरे मानसून परेशानी रहे हैं। उस हिस्से को पक्का किया जाना जरूरी है। जवाब तलब करने पर कहते हैं कि उन्होंने नगर परिषद से इसकी एनओसी ली हुई है। इस पर एक्सईएन हेमंत कुमार ने सदन में बताया कि हमने 3 फरवरी 2021 के बाद आईजीएल को कोई एनओसी जारी नहीं की है।

हम कंपनी प्रतिनिधियों को बुलाकर काम कराएंगे। ईओ अभे सिंह ने कहा कि कंपनी को नोटिस जारी किया जाएगा। इसके लिए कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा सदन में सबसे अधिक गंभीरता का मुद्दा सफाई कर्मियों की कमी का रहा।

पार्षदों ने कहा कि नगर परिषद अधिकारियों ने मनमर्जी से सफाई कर्मियों की ड्यूटी तय की है। किसी वार्ड में 5 सफाई कर्मी हैं तो कहीं पर 15 हैं। वो भी वार्डों में नजर नहीं आते। सीएसआई संदीप सिंह ने बताया कि शहर में 369 सफाई कर्मी हैं, जो कि वार्डों में लगे हुए हैं, हमने किसी को नहीं हटाया या लगाया। और लगाने के लिए सरकार को डिमांड भेजी है।

विधायक-पार्षद बोले- आबादी के हिसाब से लगाएं सफाईकर्मी

पार्षदों ने कहा कि सफाई कर्मियों को आबादी के हिसाब से लगाया जाना चाहिए। विधायक चिरंजीव राव ने भी इसका समर्थन किया। रेखा यादव ने कहा कि उनका वार्ड 7 किलोमीटर तक फैला है। उसमें 11 सफाई कर्मी लगाए हैं, जबकि डेढ़ किलोमीटर में आने वाले वार्ड को 16 कर्मी दिए हैं।

पार्षदों ने कहा कि नगर परिषद सफाई कर्मियों की सूची भी उपलब्ध कराए। डोर-टू डोर गाडी भी नजर नहीं आती तथा कुछ हिस्सों में पहुंचती ही नहीं। एक्सईएन ने बताया कि नया टेंडर हो गया है। अब सही तरीके से काम होगा।

स्ट्रीट लाइट बंद, ठेकेदार को नोटिस

पार्षदों ने कहा कि शहर के सभी वार्डों में स्ट्रीट लाइटों के बंद होने की समस्या बड़ी है। इस समय 14000 स्ट्रीट लाइटें हैं, मगर ठीक करने के लिए 2 ही टीमें काम करती हैं। अधिकारियों ने सदन को बताया कि ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

पार्षदों ने उठाए सवाल- अधिकारियों ने दी सफाई

1. स्टील डस्टबिन नहीं, भ्रष्टबिन हो गए : पार्षद सुरेश सैनी ने कहा कि नगर परिषद ने कुछ समय पहले ही स्टील के डस्टबिन रखवाए थे, मगर 15 दिन में ही बेकार हो गए। ये तो डस्टबिन नहीं भ्रष्टबिन नजर आ रहा है। ईओ ने कहा कि बेकार हुए डस्टबिन की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

2. मंदिर के आगे पानी, चंदा एकत्रित करें : पार्षद मनीष गुप्ता ने कहा कि हनुमान मंदिर के सामने सीवर ओवरफ्लो होने से पानी भरा रहता है। इससे लोगों को परेशानी रहती है। यह मंदिर आस्था का केंद्र है। यदि नगर परिषद यह काम नहीं करा पा रही है तो हम लोग चंदा एकत्रित कर यह लाइन ठीक करा लेते हैं। इस पर अधिकारियों ने अमरूत -2 में ठीक कराने की बात कही।

3. कोर्ट में याचिका डालने पर ही काम क्यों? सत्येंद्र यादव ने कहा कि आम लोगों की शिकायतों पर काम नहीं होते, मगर जैसे ही लोग कोर्ट में याचिका दायर करते हैं तो काम तुरंत होते हैं। ऐसा हाल क्यों? आ दर्शनगर में डाली जा रही लाइन उदाहरण है। एक्सईएन ने कहा कि हमने कोर्ट के आदेश से पहले ही प्रक्रिया कर ली थी।

4. एजेंडे में ये भी नहीं लिखा लागत कितनी : पार्षद गिरीश भारद्वाज ने कहा कि उन्हें जो एजेंडा दिया गया है, उन कामों के आगे राशि तक का जिक्र नहीं है। अधिकारी अनुमानित राशि तो लिखें। हाउस में काम पास करा लिए, राशि का अता पता नहीं। अधिकारियों ने कहा कि समय अभाव के चलते राशि का अनुमान नहीं लगाया जा सका।

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