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खेतीबाड़ी:बाजरा की जगह मूंग, मूंगफली व अरंड की खेती को दिया जा रहा प्रोत्साहन

रेवाड़ी16 दिन पहले
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  • मूंगफली की खेती बन सकती है कमाई का जरिया, बिजाई से पहले और बाद में अपनाएं खास प्रबंधन

दक्षिणी-पश्चिमी हरियाणा में बाजरा फसल के स्थान पर अन्य फसलों जैसे मूंग, मूंगफली और अरंड खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मूंगफली आज से कुछ साल पहले यहां क्षेत्र में बिजाई भी होती थी। ऐसे में मूंगफली की खेती कर किसान अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल के निदेशक डॉ. धर्मबीर यादव ने कहा कि उन्नत किस्मों का प्रयोग व वैज्ञानिक विधि द्वारा इसकी खेती इस क्षेत्र की कृषि में बेहतर परिवर्तन ला सकती है। मूंगफली पर शोध कर रहे डॉ. अशोक कुमार डहीनवाल ने भी मूंगफली की ज्यादा पैदावार लेने के लिए कई बातों का ध्यान रखने की सलाह दी है।

साथ ही कोई भी जानकारी के लिए क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल, केवीके या कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। डॉ. अशोक ने बताया कि अब से 10 साल पहले 1500 हेक्टेयर में बिजाई होती थी और अब यह आंकड़ा बढ़ रहा है।

मूंगफली की बिजाई के लिए ये महत्वपूर्ण

  • बारानी इलाकों में मॉनसून आने पर जून के आखिरी सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक बिजाई करें। एमएच-4 के लिए 30 गुणा 15 सेमी (32 किलोग्राम बीज प्रति एकड़) व पंजाब मूंगफली-1 के लिए 30 गुणा 22.5 सेमी (34 किलोग्राम बीज प्रति एकड़) का फासला रखना चाहिए।
  • सबसे पहले तो उन्नत किस्मों का बीज स्वस्थ्य एवं अच्छा(एमएच-4 एवं पंजाब मूंगफली-1) लेकर उसे बिजाई से पहले थाइराम या कैप्टान 3 ग्राम की दर से बीज का उपचार करें।
  • खाद व उर्वरक में नाइट्रोजन यूरिया के रूप में 13 किलोग्राम फास्फोरस सिंगल सुपर फास्फेट 125 किलोग्राम और जिंक सल्फेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ बिजाई के समय ही दें।
  • मूंगफली के पकने का समय अक्टूबर अंत से नवंबर मध्य तक रहता है। खेत में सिंचाई करके अथवा बत्तर (पानी देने पर जमीन सूख जाने की स्थिति) आने पर पौधे का उखाड़ लीजिए। इन पौधों को ढ़ेर के रूप में 7-10 दिन तक धूप में सुखाएं तथा भंडारण के लिए मूंगफली के दानों में नमी की मात्रा 8 से 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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