टीकरी बॉर्डर पर किसानों का शक्ति प्रदर्शन:आंदोलन के एक साल होने पर महापंचायत हुई; उग्राहां बोले- MSP पर कानून बनने पर ही करेंगे वापसी

बहादुरगढ़2 महीने पहले

किसान आंदोलन को आज एक साल पूरा हो गया। नए कृषि कानूनों की वापसी की प्रक्रिया भले ही शुरू हो गई, लेकिन MSP समेत दूसरी मांगों को लेकर किसान शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को बहादुरगढ़ के सेक्टर-13 में 7 एकड़ क्षेत्र में किसान महापंचायत हुई। जिसमें पंजाब से हजारों की संख्या में किसान पहुंचे। इसके अलावा किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां ने महापंचायत में किसानों को संबोधित किया। हालांकि महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के अन्य तमाम नेताओं को भी बुलाने की बात की गई थी, लेकिन उग्राहां के अलावा और कोई बड़ा नेता नहीं पहुंचा। महापंचायत करीब 3 घंटे चली, इसमें एक साल के संघर्ष को याद करने के साथ ही लड़ाई जारी रखने की बात की गई।

टीकरी बॉर्डर पर चल रही किसान महापंचायत में उपस्थित लोग।
टीकरी बॉर्डर पर चल रही किसान महापंचायत में उपस्थित लोग।

उग्राहां ने कहा कि किसान की मांग पर जवाब अभी नहीं आया है। संयुक्त मोर्चा के पत्र का जवाब आ जाएगा तो किसान घर चले जाएंगे। MSP समेत दूसरी मांगों पर भी फैसला होना अभी बाकी। यह पंचायत किसानों की जीत का जश्न मनाने के लिए है। संघर्ष का एलान करने के लिए महापंचायत की है और जब तक मुक्कमल मांग पूरी नहीं होगी घर वापसी नहीं होगी। घर वापस जाने का मन करता है, लेकिन अभी सरकार के जवाब का इंतजार है।

सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन का एक साल पूरा होने पर चल रहा कार्यक्रम।
सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन का एक साल पूरा होने पर चल रहा कार्यक्रम।

महापंचायत को लेकर पंजाब से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। इसके अलावा टीकरी बॉर्डर पर अन्य दिनों की तरफ किसानों का मंच सजा और वहां एक साल पूरा होने पर आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी गई। इतना ही नहीं कृषि कानूनों की वापसी पर खुशी भी जताई। किसानों के दिल में एक तरफ कृषि कानूनों की वापसी की खुशी है, तो दूसरी तरफ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले साथी किसानों की मौत का गम भी नजर आया।

वहीं, टीकरी बॉर्डर पर पंचायत के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाए रखी। पैरामिलिट्री के जवानों की तादाद भी अधिक हुई है। टीकरी बॉर्डर पर 6 फीट का रास्ता दोपहिया वाहनों के लिए खुला है।

टीकरी बॉर्डर पर सुरक्षा के मद्देनजर पहुंचे पैरामिलिट्री जवान।
टीकरी बॉर्डर पर सुरक्षा के मद्देनजर पहुंचे पैरामिलिट्री जवान।

उग्राहां ग्रुप ने बुलाई महापंचायत
भारतीय किसान यूनियन एकता (उग्राहां) की तरफ से सेक्टर-13 में यह महापंचायत आयोजित की गई। इसमें संयुक्त किसान मोर्चा के तमाम नेताओं को बुलाया गया था, लेकिन कोई अन्य बड़ा नेता नहीं आया।एक तरह से यह BKU एकता (उग्राहां) का ही शक्ति प्रदर्शन रहा। इस महापंचायत में अधिकांश किसान पंजाब के नजर आए, जबकि टीकरी बॉर्डर आंदोलन स्थल पर पंजाब के साथ बड़ी संख्या में हरियाणा के किसान भी पहुंचे। BKU एकता (उग्राहां) के कार्यकारी प्रधान जसविंदर सिंह ने बताया कि पिछले दो दिन में 20 हजार से ज्यादा किसान टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे हैं। इसके अलावा सिंघु बॉर्डर पर भी काफी किसान पहुंचे हैं।

पंजाब से ट्रैक्टरों में सवार होकर शुक्रवार सुबह टीकरी बॉर्डर पहुंचे किसान।
पंजाब से ट्रैक्टरों में सवार होकर शुक्रवार सुबह टीकरी बॉर्डर पहुंचे किसान।

लगातार पहुंच रहे ट्रैक्टरों के काफिले
19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद से ही किसानों के जत्थे लगातार टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। गुरुवार की रात से शुक्रवार की सुबह तक हजारों की संख्या में और भी किसान टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे हैं। किसान अपने साथ राशन-पानी सब लेकर आए हैं।

इससे साफ है कि किसानों ने आंदोलन को खत्म करने की बजाय आगे भी जारी रखने की रणनीति बनाई है। 50 से ज्यादा ट्रैक्टरों में पंजाब से किसान सिर्फ खाद्य सामग्री ही लेकर पहुंचे हैं। किसान नेता पहले ही कह चुके हैं कि MSP की गारंटी कानूनी और अन्य मांगों को मनवाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे किसान सुबह से ही महापंचायत के मंच की तरफ रवाना होने लगे थे।
टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे किसान सुबह से ही महापंचायत के मंच की तरफ रवाना होने लगे थे।

आंदोलन की सालगिरह पर दिखाई किसानों ने ताकत
दिल्ली से सटे हरियाणा के सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन को शुक्रवार को एक साल पूरा हो गया। प्रधानमंत्री की कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के साथ ही 24 नवंबर को इन कानूनों की वापसी पर केन्द्रीय कैबिनेट की मोहर भी लग चुकी है, लेकिन उसके बाद भी आंदोलन खत्म होने की बजाय किसानों ने दोनों बॉर्डर पर आंदोलन की सालगिरह मनाने का ऐलान किया। इसकी वजह है MSP पर गारंटी कानून और अन्य तमाम मुद्दे। साथ ही किसानों ने शुक्रवार को फिर से ताकत दिखाई।

किसान आंदोलन में मारे गए किसानों को किसानों ने श्रद्धांजलि दी।
किसान आंदोलन में मारे गए किसानों को किसानों ने श्रद्धांजलि दी।

महापंचायत में हजारों किसानों के जमावड़े से पुलिस अलर्ट
संयुक्त किसान मोर्चा ने संसद सत्र शुरू होने पर 29 नवंबर से हर दिन सिंघु और टीकरी बॉर्डर से 500-500 किसानों के साथ संसद तक ट्रैक्टर मार्च करने का कार्यक्रम तय किया हुआ है। इसके साथ ही आज बड़ी संख्या में किसानों की भीड़ जुटाने का दावा किया है। इसको देखते हुए दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा पुलिस भी अलर्ट हो चुकी है। चूंकि एक माह पहले ही किसान संगठनों के साथ बातचीत के बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से टीकरी बॉर्डर पर की गई भारी-भरकम बैरिकेडिंग हट चुकी है।

700 किसानों की जा चुकी जान
आंदोलन के शुरू होने से अब तक 700 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है। इसमें कई लोग सड़क हादसों में मारे गए। इतना ही नहीं, काफी किसान टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर ही मृत मिले। इनमें सबसे ज्यादा मौत हार्टअटैक से हुई हैं। आज आंदोलन का एक साल पूरा होने पर किसान नेता आंदोलन में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके साथ ही आंदोलन की आगामी रूपरेखा की भी घोषणा करेंगे।

आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि दी।
आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि दी।

ये हैं किसानों की मुकम्मल मांगें

कृषि कानून वापस लेने के ऐलान के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने ई-मेल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। मोर्चा ने पत्र में खेती की पूरी लागत पर आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को सभी फसलों के लिए किसानों का कानूनी हक बनाने, 'विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक 2020/2021' का ड्राफ्ट वापस लेने, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के साथ जुड़े इलाकों में एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के लिए आयोग अधिनियम, 2021 में किसानों को सजा देने के प्रावधान हटाने की मांग है। साथ ही लखीमपुर खीरी हत्याकांड के सूत्रधारों को गिरफ्तार करने, आंदोलन में शहादत पाने वाले 700 किसानों के परिवारों को मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था के साथ शहीद किसानों की स्मृति में एक शहीद स्मारक बनाने के लिए सिंघु बॉर्डर पर जमीन देने की मांग की है।