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  • Mahendragarh Closed For The Second Time In 29 Days, The Narnail Mahendragarh Dadri State Highway And Rewari Road Did Not Open For 5 Hours.

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जिला मुख्यालय की मांग:29 दिन में दूसरी बार महेंद्रगढ़ बंद, मेडिकल स्टाेर तक नहीं खुले नारनाैल-महेंद्रगढ़-दादरी स्टेट हाईवे व रेवाड़ी रोड रहे 5 घंटे जाम

महेंद्रगढ़3 दिन पहले
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कैंची मोड़ पर धरना देते विभिन्न सामजिक संगठन, राजनेता व अधिवक्ता।
  • पौने दो माह से चल रहा धरना-प्रदर्शन, बार एसाेसिएशन के आह्वान पर फिर किया चक्का जाम
  • दक्षिण हरियाणा विकास लोकमंच ने उठाए सवाल

जिला मुख्यालय की मांग काे लेकर मंगलवार काे शहर पूर्ण रूप से बंद रहा। अधिवक्ताओं व सामाजिक संगठनाें ने महेंद्रगढ़-नारनाैल-दादरी स्टेट हाईवे अटेली मोड़ पर धरना दिया। इससे स्टेट हाईवे करीब 5 घंटे जाम रहा। दूसरी तरफ माजरा चुंगी पर सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने जाम लगाया। इससे महेंद्रगढ़ कनीना मार्ग भी काफी समय तक ब्लाॅक रहा।

बार एसाे. के आह्वान पर हुए इस चक्का जाम काे क्षेत्र के सभी वर्गाें का ना केवल समर्थन मिला, अपितु इसके लिए सभी राजनीतिक विचारधाराओं के लाेग एक मंच पर पहुंचकर क्षेत्र की मांग के लिए आवाज काे बुलंद करते दिखे। बता दें कि बार एसो. के बैनर तले जिले के अनेक सामाजिक, धार्मिक व राजनीतिक संगठनाें के लाेग जिला मुख्यालय की मांग काे लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।

लघु सचिवालय में इसकाे लेकर बीते 51 दिन से अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। धरने में ना केवल अनेक जनप्रतिनिधि पहुंचकर क्षेत्र की मांग काे अपना समर्थन दे चुके हैं, अपितु अधिकारियों का घेराव कर अपना राेष भी प्रकट कर चुके हैं।

मंगलवार काे जिला मुख्यालय की मांग पर शहर के सभी बाजार बंद रहे। व्यापार मंडल के आह्वाण पर हुए इस बंद में सभी ट्रेड यूनियनाें ने पूरा सहयाेग किया। आवश्यक स्वास्थ्य सेवाआएं, मेडिकल स्टाेर भी बंद रहे। प्राइवेट चिकित्सकों ने भी अपने अस्पतालों में ओपीडी नहीं की। मेडिकल स्टाेर बंद हाेने से लाेगाें काे दवाइयां नहीं मिली। इतना ही नहीं दूध व ब्रेड आदि के सप्लायरों ने भी अपनी सेवाएं बंद रही।

शहर के सभी बाजार समर्थन में बंद रहे

मंगलवार काे बार एसाेसिएशन ने पूर्व में चक्का जाम की घाेषणा कर रखी थी। इस जाम काे लेकर एसाे. की तरफ से विशेष रणनीति तैयार की गई। जिससे ना केवल शहर पूर्ण रूप से बंद हाे, बल्कि स्टेट हाईवे भी जाम रहे। सुबह बार के सदस्य सुबह करीब 10 बजे लघु सचिवालय में एकत्र हुए। इससे स्टेट हाईवे जाम हाे गया। सुबह करीब साढ़े दस बजे शुरू हुआ धरना साढे तीन बजे तक चला।

इससे मार्ग पूरी तरह से अवरूद्ध रहा। दूसरी तरफ सामाजिक संगठन सरताज ग्रुप के कार्यकर्ताओं ने महेंद्रगढ़-रेवाडी मार्ग पर माजरा चुंगी के पास जाम लगा दिया। इससे शहर के प्रवेश के दाेनाें प्रमुख मार्ग बंद हाे गए। माजरा चुंगी पर करीब दाे बजे तक जाम के बाद संगठन के कार्यकर्ता पीआरओ कुलदीप यादव के नेतृत्व में अटेली माेड़ धरना स्थल पर पहुंचे। शहर के सभी बाजार पूर्ण रूप से बंद रहे।

महेंद्रगढ़ की तहसील रहे दादरी को जिला बनाया, हांसी और गोहाना पर भी विचार फिर महेंद्रगढ़ में मुख्यालय क्यों नहीं?

महेंद्रगढ़. महेंद्रगढ़ को जिला मुख्यालय बनाने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। जाम कर मांग उठा रहे लोगों ने चेता भी दिया कि वे इस मांग से पीछे नहीं हटने वाले हैं। इसी बीच महेंद्रगढ़ के विकास के लिए दर्जनों चिट्‌ठियां सरकार को भेजने वाले दक्षिण हरियाणा विकास लोकमंच ने भी शहर के पिछड़ेपन पर सवाल उठाए हैं।

लोकमंच के महासचिव प्रो. रणबीर सिंह ने कहा कि सरकार ने चरखी दादरी जैसे जिले भी बनाए हैं, जो कि कभी महेंद्रगढ़ का ही हिस्सा रहे हैं। इसके अलावा हांसी और गोहाना तक को जिला बनाने पर विचार किया गया है। महत्वपूर्ण ये है कि सरकार छोटे जिले बनाने के पीछे विकास का तर्क देती है।

ऐसे में क्या विकास का अधिकार महेंद्रगढ़ को नहीं है। लोकमंच ने सुझाव भी रखा कि यदि सरकार एकदम से नारनौल में स्थापित जिला मुख्यालय के दफ्तरों को तोड़कर महेंद्रगढ़ में लाने को मुश्किल काम मानती है तो फिर क्यों ने नारनौल को ही अलग कर महेंद्रगढ़ को उसका हक दिया जाए। दादरी जैसे जिलों को देखें तो महेंद्रगढ़ इसकी शर्तें भी पूरी करता है।

चरखी दादरी... 5 लाख आबादी, डेढ़ सौ पंचायतें, महेंद्रगढ़ में दोनों दोगुना : वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार चरखी दादरी जिले की आबादी करीब 5 लाख है। यहां पंचायतें भी करीब डेढ़ सौ के आसपास हैं। दादरी में 172 गांव है। इसकी तुलना में महेंद्रगढ़ में आबादी 10 लाख से ज्यादा हो चुकी है। गांवों की संख्या भी पौने 400 है।

तहसीलें विकसित हुईं, महेंद्रगढ़ को छोड़ते गए : लोकमंच का कहना है कि वर्ष 1972 में पूर्व सीएम बंसीलाल ने भिवानी के विकास के लिए अलग जिला बनाया। उस समय चरखी दादरी सबसे पुराने जिलों में शामिल महेंद्रगढ़ जिले के अंतर्गत आती थी। चरखी दादरी को भिवानी में मिला लिया। वर्ष 1989 में महेंद्रगढ़ से अलग होकर रेवाड़ी भी जिला बना दिया और आज रेवाड़ी सक्षम जिलों में हैं। मुखिया रहा महेंद्रगढ़ आज भी अपने विकास की लड़ाई लड़ रहा है।

प्रो. रणबीर सिंह ने कहा- इलाके को राजनीतिक मजबूती की जरूरत उत्तरी हरियाणा में जो विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री सत्ता में आए, उन्होंने अपने इलाके का विकास कराया, क्योंकि वो समझते हैं कि काम होंगे तो जनता के बीच और मजबूत होंगे। लेकिन यहां इलाका राजनीतिक रूप से कमजोर रहा। अब जिला मुख्यालय भी यहां आ जाए तो क्षेत्र की कायापलट हो सकती है। इलाके को राजनीतिक मजबूती और जनप्रतिनिधियों की इच्छा शक्ति की जरूरत है।

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