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  • Reliance On Ayurveda Increased During The Coronary Period, 8 To 10 Patients Came To OPD Last Month, More Than 40 Coming Daily This Month

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योग भी बन रहा मददगार:कोरोनाकाल में बढ़ा आयुर्वेद पर भरोसा, पिछले माह ओपीडी में आए 8 से 10 मरीज, इस माह रोज आ रहे 40 से ज्यादा

रेवाड़ीएक महीने पहले
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  • योग भी बन रहा मददगार- कोरोना संक्रमण और बाद में मानसिक अवसाद को दूर करने में योग को दे रहे महत्व

कोरोनाकाल के दौरान लोगों के जीवन में आयुर्वेद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसा कोई घर नहीं जो आयुर्वेद के काढ़े और गिलोय से शायद ही परिचित नहीं हो।

कोरोना के दौर में जब घरों से निकलना भी मुश्किल था, उस समय घरों में आयुष काढ़ा और गिलोय जरूर उपलब्ध थे। कोरोना दौर में लोगों का पुरानी आयुष पद्धति पर विश्वास बढ़ा है। ऐसा ओपीडी में पहुंच रहे पीड़ितों से भी अंदाजा लगा सकते हैं। पिछले माह सेक्टर-4 हुडा डिस्पेंसरी में जहां 8 से 10 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे थे, वहीं इस माह यह बढ़कर 40 पहुंच गया है।

इनमें खांसी-जुकाम से लेकर बुखार के पीड़ित भी शामिल हैं। दूसरे योग को भी इन दिनों में काफी लोगों ने अपनाया है। इसी को लेकर एक्सपर्ट ने 5 ऐसे योग सुझाए, जिनको नियमित अपनाने से काफी हद तक बीमारियों से दूर रहा जा सकता है।

जानिए... पांच मुख्य योगासन
षटकर्म : जलनेति - एक बर्तन में पानी के माध्यम से नाक की सफाई की जाती है, इस प्रक्रिया को करने में नमकीन गुनगुने पानी का इस्तेमाल किया जाता है। इससे नासिका छिद्रों की सफाई होती है। सप्ताह में दो बार यह किया जा सकता है। यह श्वसन तंत्र के लिए सहायक है।

कपालभाति - कपाल अर्थात मस्तिष्क और भाति यानी स्वच्छता। ऐसे में कपाल भाति वह प्राणायाम है, जिससे मस्तिष्क स्वच्छ होता है और इस स्थिति में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती है। इस प्राणायाम के अन्य लाभ भी है। लीवर किडनी गैस आदि के लिए बहुत लाभकारी है। हाजमा भी ठीक रहता है।

सूर्य नमस्कार - इसे आयु व शारीरिक क्षमता अनुसार कर सकते हैं। यह योगासन शरीर के प्रत्येक अंग को क्रियाशील बना देता है।

प्राणायाम - इसमें लंबी गहरी श्वांस लेकर छोड़ना होता है। इसमें अनुलोम-विलोम मुख्य है। सूर्यभेदी प्राणायाम - यह सूर्य नाड़ी को क्रियाशील बनाता है। सर्दी के दौरान यह प्राणायाम बेहतर है।

मेडिटेशन - इसमें ध्यान लगाना होता है। अपने मन के अंदर चल रही बातों के ही सकारात्मक तरीके से ध्यान लगाना है। मन में अच्छे विचारों का प्रवेश करना होता है।

मानसिक अवसाद को दूर करने में भी योग सहायक

योग एवं नैचुराेपैथी एक्सपर्ट डॉ. राकेश कुमार छिल्लर का कहना है कि कोरोनाकाल में जिस तरह आयुष पद्धति पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। उसी तरह योग को भी लोग अपना रहे हैं।

कोरोना संक्रमित व ठीक होने पर भी लोग मानसिक अवसाद से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे में योग की षटकर्म विधियों को अपनाकर हम मानसिक तनाव को कम कर सकते हैं। मेडिटेशन, प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम महत्वपूर्ण है। इन आसनों को 8 से लेकर 80 साल के बुजुर्ग भी अपनी क्षमता अनुसार कर सकते हैं।
आयुष काढ़ा व गिलोय की डिमांड बढ़ी : डीएओ

वर्तमान का दौर ऐसा चल रहा है कि इसमें आयुष पद्धति पर लोगों का विश्वास तेजी से बढ़ा है। लोग आयुष के काढ़े व गिलाेय की मांग ज्यादा कर रहे हैं। जहां भी जाते हैं, वहां काढ़ा जरूर मांगा जाता है। इसी तरह सेक्टर-4 डिस्पेंसरी में इस समय ओपीडी भी बढ़ी है। हालांकि पंचकर्म शुरू नहीं हुआ है। इसके लिए आयुष निदेशालय को लिखा हुआ है, वहां से गाइडलाइन आते ही पंचकर्मा थैरेपी भी शुरू हो जाएगी।
-डॉ. अजीत सिंह, जिला आयुर्वेद अधिकारी, रेवाड़ी।

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