प्रतिस्पर्धा:एथलेटिक्स सिंथेटिक ट्रैक के लिए फिर भेजा रिमाइंडर, सेंडर ट्रैक पर अभ्यास करते समय बार-बार चोटिल हो रहे खिलाड़ी

रेवाड़ीएक महीने पहले
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राव तुलाराम स्टेडियम में दौड़ का अभ्यास करते हुए। - Dainik Bhaskar
राव तुलाराम स्टेडियम में दौड़ का अभ्यास करते हुए।
  • गुड़गांव से बॉक्सिंग रिंग तो स्कीकृत मगर हॉल नहीं, अब हॉल के लिए बजट की भेजी डिमांड

जिला के राव तुलाराम स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक की कार्ययोजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए सेंडर ट्रैक तो बना है, लेकिन इस ट्रैक पर अभ्यास करते समय आए दिन खिलाड़ी चोटिल हो जाते हैं। बार-बार खिलाड़ियों के चोटिल होने से उनका प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सामाजिक संगठनों की ओर से भी विभिन्न अवसरों पर उच्च अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों के समक्ष भी सिंथेटिक ट्रैक के लिए आवाज उठाई जा चुकी है।

इसके बाद भी यह मामला केवल पत्राचार तक ही सीमित रहता है, मगर योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। अब फिर खेल विभाग ने इसके लिए रिमाइंडर भेजा है। इसी तरह बॉक्सिंग रिंग के लिए भी हॉल नहीं है। खिलाड़ियों को खुले में ही अभ्यास करना पड़ रहा है। बताना जरूरी है कि राज्य के 13 जिलों में धावकों के लिए नेशनल लेवल का सिंथेटिक ट्रैक बनाया हुआ है।

इन जिलों में बने सिंथेटिक ट्रैक

राज्य के गुड़गांव, फरीदाबाद, रोहतक, अंबाला, सोनीपत, पानीपत, भिवानी, पंचकुला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, हिसार और जींद के नरवाना में सिंथेटिक ट्रैक बनाया हुआ है। इसलिए इन जिलों में अब एथलेटिक्स में बेहतर खिलाड़ी भी निकल रहे हैं।

इन जिलों में नहीं है सिंथेटिक ट्रैक

रेवाड़ी के अलावा पलवल, मेवात, महेंद्रगढ़, फतेहाबाद, सिरसा, चरखी दादरी व कैथल में नेशनल लेवल के ट्रैक का अभाव है। ऐसे में इन जिलों से अन्य जिलों की अपेक्षा एथलेटिक्स में पदक भी ज्यादा नहीं मिल पा रहे हैं। क्योंकि खिलाड़ियों का सिंथेटिक ट्रैक पर अभ्यास नहीं हो पा रहा है।

4 साल पहले बना था सेंडर ट्रैक, गड्‌ढ़ों से प्रदर्शन पर असर

राव तुलाराम स्टेडियम में 4 वर्ष पहले सेंडर ट्रैक बनाया गया था। मगर अब यह धीरे-धीरे उखड़ता जा रहा है। ट्रैक समतल भी नहीं है। कई जगह गड्‌ढ़े भी बने हुए हैं। ऐसे में दौड़ते समय बार-बार खिलाड़ी चोटिल हो रहे हैं। खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद जिले से हर प्रतियोगिताओं में खिलाड़ी एथलेटिक्स में मेडल प्राप्त कर रहे हैं। अगर सिंथेटिक ट्रैक बनता है तो जिले के खिलाड़ी और मेडल पा सकते हैं।

5 साल में रेवाड़ी के धावकों ने स्टेट से नेशनल तक जीते कई मेडल

पिछले 5 साल के दौरान रेवाड़ी के धावकों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। यहां के कई खिलाड़ियों ने स्टेट, नेशनल के अलावा पैरा एथलेटिक्स में भी एशियन मेडल प्राप्त किया है। ऐसे में रेवाड़ी के नाम भी कई उपलब्धियां रही हैं। इसलिए खिलाड़ियों की अब सिंथेटिक ट्रैक की डिमांड है। उनका कहना है कि अगर यह ट्रैक मिलता है तो जिला को और पदक मिल सकते हैं। साथ ही रेवाड़ी से भी इंटरनेशनल लेवल के अच्छे धावक निकल सकते हैं।

सिंथेटिक ट्रैक की विशेषता

खेल विशेषज्ञ बताते हैं कि सिंथेटिक ट्रैक बनाने के लिए पहले मिट्टी और रोड़ी की कई परत बिछाई जाती है। उसके बाद लेवलिंग करने के अलावा सड़क बनाने का काम किया जाता है और फिर ट्रैक के चारों ओर रेलिंग लगाई जाती है। सबसे बाद में प्लास्टिक घास बिछाई जाती है और तब ट्रैक तैयार होता है।

फिर भेजी है सिंथेटिक ट्रैक के लिए डिमांड

खिलाड़ियों को खेलों में बेहतर सुविधाएं दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। कार्यभार संभालते ही राव तुलाराम स्टेडियम में सेंडर के स्थान पर सिंथेटिक ट्रैक के लिए फिर से रिमाइंडर भेजा गया है। बॉक्सिंग हॉल के लिए भी बजट का प्रस्ताव भेजा है। इसके अलावा प्रशिक्षकों से भी उनके खेलों से संबंधित और भी डिमांड मांगी है।-मदनपाल सिंह, डीएसओ, रेवाड़ी।

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