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सांसों का संकट:अस्पताल ने हस्ताक्षर कराए- ऑक्सीजन खत्म हुई तो हम जिम्मेदार नहीं; चिंता में लोग रोड पर उतरे तो सिलेंडर पहुंचे

रेवाड़ी15 दिन पहले
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ऑक्सीजन की कमी को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने पहुंचे डीएसपी मोहम्मद जमाल। - Dainik Bhaskar
ऑक्सीजन की कमी को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने पहुंचे डीएसपी मोहम्मद जमाल।
  • 3 एमटी से कोटा बढ़ाकर 4 किया, मिली 5 एमटी, फिर भी पड़ रही कम
  • सिविल अस्पताल की जरूरत बढ़ी, वहां भी 100 से ज्यादा सिलेंडर चाहिए
  • डीसी बोले- व्यवस्था बना रहे, अब ऑक्सीजन की दिक्कत नहीं होगी

अफसरों की अच्छी-खासी मशक्कत के बाद भी मेडिकल ऑक्सीजन संकट का पूरी तरह समाधान नहीं निकल पा रहा। इसी के चलते 8 दिन में तीसरी बार लोग सड़क पर उतर आए तथा विराट अस्पताल के सामने बैठकर रोड जाम कर दिया। इससे अफरा-तफरी मच गई और अस्पताल को 20 मिनट में सिलेंडर उपलब्ध कराए गए।

इधर, जिला का ऑक्सीजन कोटा 3 मीट्रिक टन (एमटी) से बढ़ाकर 4 एमटी कर दिया गया है तथा रविवार को तो 5 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिली, फिर भी कम पड़ी गई। डॉक्टरों के अनुसार सिविल अस्पताल में अब मरीजों की संख्या बढ़ गई है, इसलिए वहां भी अब 100 से ज्यादा सिलेंडरों की जरूरत पड़ रही है। अस्पतालों में मरीजों के साथ ऑक्सीजन खपत में भी इजाफा हो रहा है।

प्रशासन इसका समाधान करने में जुटा हुआ है, लेकिन पुख्ता व्यवस्था का इंतजार है। वहीं, ऑक्सीजन पूर्ति के लिए प्रयास कर रहे केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि रेवाड़ी का ऑक्सीजन कोटा और बढ़वाया जाएगा।

ऑक्सीजन खत्म होने के नोटिस के बाद हंगामा

सरकुलर रोड स्थित विराट अस्पताल में 80 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। अधिक मरीजों का हवाला देकर अस्पताल ने ऑक्सीजन की डिमांड भी सबसे अधिक की हुई है। मगर अस्पताल प्रबंधन बार-बार कहता आया है कि ऑक्सीजन जैसे-तैसे करके मिल रही है, मगर अभी तक पर्याप्त और संतुष्ट करने वाली व्यवस्था नहीं बनी है। 25 अप्रैल को ऑक्सीजन की कमी से यहां चार मरीजों की जान चली गई थी। 48 घंटे में पूरी होने वाली इसकी जांच अभी तक पेंडिंग है।

शनिवार को ही मरीज के तीमारदारों के हस्ताक्षर कराने के लिए अस्पताल की तरफ से नोटिस चस्पा कर दिया गया कि ‘हमें ऑक्सीजन की कमी के बारे में बता दिया गया है। इसलिए ऑक्सीजन की व्यवस्था खुद करनी होगी। यदि ऑक्सीजन की कमी होती है तो इस बारे में अस्पताल जिम्मेदार नहीं होगा।’

रविवार को ऑक्सीजन बहुत कम बची होने की सूचना पर लोग सड़क पर उतर आए। सेक्टर-3 निवासी एक व्यक्ति के परिजन विनय यादव ने बताया कि प्रशासन ने रविवार को ही सोशल मीडिया पर सूचना डाली कि किसी व्यक्ति को एमरजेंसी के लिए ऑक्सीजन की जरूरत हो तो नागरिक अस्पताल रेवाड़ी के कमरा नंबर 99 में जाकर अपना आवेदन दे सकते है।

विनय यादव ने कहा कि शाम करीब 4 बजे ही कमरा नंबर 99 में कोई नहीं था। 4 अस्पतालों में संपर्क किया, खाली सिलेंडर लेकर गए, मगर भरा नहीं। इसलिए परेशान होकर लोग सड़क पर उतरे। करीब 20 मिनट बाद पहले 3, फिर 10 सिलेंडर आ गए। कुछ देर बाद 15 सिलेंडर और आए।

इमरजेंसी के लिए रखेंगे 50 सिलेंडर : डीसी

डीसी यशेंद्र सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन केवल 50 सिलेंडरों का स्टॉक आपातकालीन स्थिति के लिए अपने पास रखेगा। इन 50 सिलेंडरों को भी एमरजेंसी में प्रयोग के लिए दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत के हिसाब से अस्पतालों की डिमांड पर ऑक्सीजन की सप्लाई अब तक दी जाती रही है और आगे भी देते रहेंगे।

रिफिल सेंटर में सीसीटीवी भी लगवाए, ताकि गड़बड़ी न हो

ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर डीसी यशेंद्र सिंह ने रविवार को सचिवालय में डॉक्टरों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि जो ऑक्सीजन सप्लाई हमारे पास आती है उसका वितरण कोविड मरीजों के हिसाब से अस्पतालों में कर दिया जाता है। डीसी ने कहा कि बावल स्थित ऑक्सीजन रिफिल सेंटर पर सीसीटीवी लगवा दिए गए हैं, ताकि प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा सके। उन्होंने कहा कि सब कुछ पारदर्शी रहे इसके लिए कोविड का इलाज कर रहे अस्पतालों को सोशल मीडिया ग्रुप में शामिल किया गया है।

हमारे पास कब ऑक्सीजन का टैंकर पहुंचेगा और कब तक रिफिल का कार्य होगा, इस बारे सूचना ग्रुप में शेयर की जाती रहेगी। उन्होंने कहा कि जो स्टॉक हमारे पास ऑक्सीजन का आया है उसे अस्पताल के संचालक ही सुनिश्चित कर लें कि किसको कितने सिलेंडर दिए जाने हैं। बैठक में डीएमसी दिनेश यादव, एसडीएम रेवाड़ी रविन्द्र यादव, एसडीएम बावल संजीव कुमार, एसडीएम कोसली होशियार सिंह, सीटीएम रोहित कुमार, डीडीपीओ एचपी बंसल, डीआरओ राजेश ख्यालिया, सीएमओ डा. स शील माही, डिप्टी सिविल सर्जन डा. विजय प्रकाश, एसएमओ डा. राजबीर, डीईटीसी प्रियंका यादव, प्रधान आईएमए डा. पवन गोयल सहित अन्य चिकित्सक भी मौजूद रहे।

ऑक्सीजन वितरण का रोस्टर बनाया गया
​​​​​​​आईएमए के प्रधान डॉ. पवन गोयल ने बैठक में ही ऑक्सीजन सिलेंडरों के वितरण का रोस्टर बना दिया। इस पर हस्ताक्षर करके डाक्टरों ने सहमति भी जताई। अस्पतालों को भर्ती मरीजों की संख्या के अनुपात में ऑक्सीजन मिलेगी, ताकि उनकी जरूरत पूरी होती रहे तथा दूसरे अस्पताल में किल्लत भी न हो।

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