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  • The Land Of South Haryana Is Becoming Barren Without Water, Due To Equal Distribution Of Water And Crop Rotation, The Groundwater Level Will Rise.

लोक मंच ने सरकार को भेजा सुझाव पत्र, लिखा:पानी के बिना बंजर हो रही है दक्षिण हरियाणा की जमीन पानी के समान बंटवारे व फसल चक्र से उठेगा भूजल स्तर

रेवाड़ी7 दिन पहले
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दक्षिण हरियाणा विकास लोक मंच ने गांवों में भूजल स्तर सुधार के लिए सरकार को सुझाव पत्र भेजा है। इसमें कहा है कि सरकार ने पहली बार राज्य के 1780 गांव का भू-जल स्तर 30 मीटर से नीचे चला जाने पर गौर करने लायक व्यवस्था का प्रारूप तैयार किया है। इसके लिए जन सुझाव भी मांगें हैं।

रेड जोन के इन गांव की कृषि एक तरह पानी के अभाव में चौपट हो गई है। यहां तक कि महेंद्रगढ़ जिले में नांगल चौधरी नारनौल, निजामपुर एवं महेंद्रगढ़ सतनाली विकास खंडों में भूजल समाप्त हो गया है। परंतु आज तक सरकारों ने दक्षिणी क्षेत्र के विकास के लिए किसी भी प्रकार की कोई जल नीति नहीं बनाई।

लोकमंच संरक्षक प्रो. रणवीर सिंह, अध्यक्ष जगजीत सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राम अवतार यादव का कहना है कि जल प्रबंधन नीति के अभाव में राज्य के 6 जिले सेम या वाटर लॉगिंग की समस्या से ग्रस्त हैं जबकि राज्य के अन्य 13 जिले पानी के अभाव में सूखे की ज्वलंत समस्या से प्रभावित रहते हैं और 3 जिले रेह और कलर की समस्याओं से जूझ रहे हैं।

प्रदेश में फ्लड वॉटर इरिगेशन योजना के तहत राज्य के जिन जिन जिलों में नहरी पानी सिंचाई की सुविधा है वहां वहां पर किसान खुले पानी की प्रणाली को प्रयोग में कर के खेतों में दो-दो फुट पानी खड़ा कर देते हैं, जिससे राज्य के दूसरे हिस्सों का लोग अपने वाजिब हक से वंचित रह जाते हैं और फ्लड वाटर का मैनेजमेंट ना होने की वजह से प्रदेश को बहुत भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य का आधा पानी 3 फसलों पर खर्च

राज्य का आधा पानी तो केवल इन तीन फसलों पर ही खर्च हो जाता है और दक्षिणी हरियाणा के शुष्क जिले इस भेदभाव से ग्रसित हो रहे हैं। प्रदेश में मौजूदा पानी की मात्रा को समान भागों में वितरित करने का फार्मूला तैयार किया जाना आज के समय की पहली मांग है। पानी का समान वितरण करना समय की मांग है।

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी खंड में वाटर लेवल 2000 फीट से भी नीचे चला गया है और यही हाल मेवात का भी है। बीच के जिले रेवाड़ी, भिवानी, दादरी, पलवल व फरीदाबाद का भी यदि जमुना ना हो तो उनका भी हाल यही होता। बाढ़ के समय में बाढ़ के सरप्लस पानी को मेवात व गुड़गांव की प्यासी धरती को खींचा जा सकता है। यह भी एक योजना वाटर नीति के तहत बनाने की सख्त जरूरत है। फसल चक्र के तहत बागवानी पर विशेष बल देना चाहिए।

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