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नजीर बनकर उभरा ढाणी कोलाना:गांव चमकाने की जिद थी, घर-घर से कचरा उठवा बनाई जैविक खाद, अब ओडीएफ में पीएम अवार्ड के लिए शार्टलिस्ट

रेवाड़ी2 वर्ष पहले
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रेवाड़ी जिले के गांव ढाणी कोलाना में घर-घर से कचरा एकत्रित करता कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
रेवाड़ी जिले के गांव ढाणी कोलाना में घर-घर से कचरा एकत्रित करता कर्मचारी।
  • यहां शहरों की तर्ज पर सफाई और ओपन जिम जैसी व्यवस्थाएं

खोल खंड का गांव ढाणी कोलाना यूं तो इस गांव की अभी तक खास पहचान नहीं है पर यह पंचायत अब जिला ही नहीं अपितु देशभर की पंचायतों के लिए आदर्श बनने की दौड़ में शामिल है। जलशक्ति मंत्रालय के प्रधानमंत्री अवार्ड के लिए इसी गांव की बदौलत जिला शार्ट लिस्ट हुआ है। वहीं गौरव की बात यह है कि पंचायत की तरफ से किए गए कार्यों की बदौलत रेवाड़ी जिला को जलशक्ति मंत्रालय ने ओडीएफ प्लस में देश के टॉप-10 जिलों में चुना है। फाइनल परिणाम का अभी इंतजार है और गांव को पहले या द्वितीय पुरस्कार के लिए चुना जाता है तो 2 अक्टूबर को पीएम के हाथों सम्मान मिल सकता है।

ढाई साल में बदल दी गांव की तस्वीर
स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांव को वर्ष 2017 में खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया था। हालांकि उन पंचायतों में अकेली कोलाना पंचायत ही नहीं अपितु हर खंड की पंचायत शामिल थी। अन्य पंचायतों के मुकाबले ढाणी कोलाना की पंचायत ने इससे भी बेहतर काम करने का मन बनाया जिसकी बदौलत आज पंचायत पीएम अवार्ड के लिए शार्ट लिस्ट की श्रेणी में आ चुकी है। सरपंच मनोज शास्त्री के मन में जज्बा था कि उनके गांव का भी नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमके जिसके बाद उन्होंने हर घर में शौचालय के बाद पूरे गांव में दस स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय बनवाएं। इन सभी में पानी के साथ इनकी सफाई व्यवस्था की जिससे गांव के लोगों ने इनको उपयोग शुरू कर दिया। तत्प्श्चात बात आई कि कचरा प्रबंधन की। कचरा प्रबंधन में जहां अधिकतर पंचायतों ने अभी तक खानापूर्ति की हुई है उसके लिए कोलाना पंचायत ने बड़ी पहल की। पंचायत ने घर-घर से कचरा उठवाकर गांव के बाहर बनाए अपशिष्ट प्रबंधन तक पहुंचाने की व्यवस्था की। यहां पर इस कचरे से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया दो साल पहले शुरू की गई। कचरे को अलग-अलग करके बेकार वस्तुओं का स्क्रैप जमा करके पंचायत उन्हें नीलाम कर देती है। इससे आमदनी भी होने लग गई। पंचायत की तरफ से जैविक खाद बेहद कम कीमत में उपलब्ध कराई जाती है जिससे किसान भी इसे हाथोंहाथ ले लेते हैं।

लाखों रुपए खर्च कर तैयार किया खेल स्टेडियम
गांव का रूप बदलने में दिलचस्पी लेकर पंचायत का सहयोग करने वाले जिला पार्षद आजाद नांधा भी अपने वार्ड के इस गांव की तारीफ करते नहीं थकते। पंचायत की तरफ से गांव की गलियों को सुधारने के बाद दूसरी बड़ी शुरूआत की गई गांव के खेल स्टेडियम को बेहतर करने की। लाखों रुपए खर्च करके खेल स्टेडियम को तैयार करके वहां फुटबाल का ग्रासी मैदान भी तैयार किया गया है। नांधा बताते हैं कि इंडोर गेम्स के लिए भी खेल उपकरणों की व्यवस्था की। साथ एक ओपन जिम भी तैयार कराई गई है। इस बदलाव से गांव के युवाओं को एक बेहतर पैलेस मिल गया और वे व्यसन की बजाय खेलों में अधिक समय लगाते हैं।

सिंचेवाला मॉडल के जरिए जोहड़ तक पहुंचाया जाता है यहां पानी
तमाम गांवों में दूषित पानी की बड़ी समस्या रहती है। ढाणी कोलाना भी इससे अछूता नहीं था। पंचायत की तरफ सिंचेवाला मॉडल का अपनाते हुए दूषित पानी को गांव के जोहड़ तक पहुंचाया। जोहड़ में डालने से पहले इस पानी को तीन चरणों में साफ किया जाता है। इसके लिए तीन कुओं का निर्माण किया गया जिससे पानी साफ होकर जोहड़ में पहुंचता है। गंदगी व अपशिष्ट पहले-दूसरे कुओं में ही रह जाता है। जोहड़ में जाने वाले पानी पूरी तरह से शुद्ध होता है जिसका उपयोग सिंचाई में किया जा रहा है।

वॉल पेंटिंग से सभी को स्वच्छता का संदेश
गांव में प्रवेश करते ही सुंदर प्रवेशद्वार बनाया हुआ है और गांव की तमाम गलियां पक्की है। सड़कों की नियमित सफाई होती है और दीवारों पर पेंटिंग की हुई जिन पर जागरूकता स्लोगन लिखवाएं हैं। इससे गांव की सुंदरता देखते ही बनती है। गांव मुख्य गलियों से तमाम गलियां साफ नजर आएगी। लोगों के लिए दो पार्क है जिनमें बुजुर्ग सुबह-शाम वॉक के लिए आते हैं।

गोमला गांव से मिली प्रेरणा, फिर लगातार किया संघर्ष : सरपंच
गांव के सरपंच मनोज शास्त्री बताते हैं कि उन्होंने लगभग दस साल पहले महेंद्रगढ़ जिले का गोमला गांव देखा जहां की पंचायत ने बहुत ही अच्छा काम किया है। उस पंचायत को नेशनल अवार्ड से लेकर वहां की कार्यशैली को जानने के लिए विदेशों तक के दल आए थे। गांव को देखने के बाद में मन में ठान लिया था कि सरपंच बनने के बाद ढाणी कोलाना को भी ऐसा गांव बनाया जाएगा।

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