बजरंग पूनिया के सम्मान समारोह में शामिल हुए CM:पहलवान के तीनों कोच 4-4 लाख की राशि से होंगे सम्मानित, बोले- हरियाणा के खिलाड़ियों ने गांव की मिट्टी में पसीना बहाकर ओलिंपिक में दिखाया दम

रेवाड़ी, झज्जर2 महीने पहले
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बजरंग पूनिया को सम्मानित करते सीएम खट्टर। - Dainik Bhaskar
बजरंग पूनिया को सम्मानित करते सीएम खट्टर।

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल रविवार को ओलिंपिक पदक विजेता पहलवान बजरंग पूनिया के सम्मान में आयोजित समारोह में शिरकत करने उनके पैतृक गांव खुड्डन पहुंचे। कार्यक्रम में टोक्यो ओलिंपिक व पैरालिंपिक हरियाणा के खिलाडियों के शानदार प्रदर्शन ने मुख्यमंत्री काफी खुश दिखाई दिए। उन्होंने ऐलान किया कि बजरंग पूनिया के तीनों कोच 4-4 लाख की राशि से सम्मानित किए जाएंगे। समारोह में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बजरंग पूनिया समेत राज्य के कई खिलाड़ियों ने गांव की मिट्टी में पसीना बहाकर ओलिंपिक में अपना दम दिखाया है। जिसका परिणाम यह रहा कि ओलिंपिक व पैरालिंपिक में हरियाणा के हिस्से काफी मेडल आए। यही वजह है कि आज पूरा देश हरियाणा की तरफ देख रहा है।

सीएम ने हरियाणा को खेलों का हब बनाए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार साल 2022 में पंचकुला के अंदर खेलो इंडिया कार्यक्रम आयोजित करने वाली है। इस कार्यक्रम की मेजबानी हरियाणा करेगा और इसमें पूरे देश से 15 हजार खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। हमारा और हमारे खिलाडि़यों का प्रयास यही है कि हरियाणा के हिस्से में ज्यादा से ज्यादा पदक आएं।

गांव खुड्डन में लोगों को संबोधित करते सीएम।
गांव खुड्डन में लोगों को संबोधित करते सीएम।

चार-चार लाख रूपए से सम्मानित होंने पूनिया के तीनों कोच
सीएम ने कहा कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। पहला गुरू माता-पिता होते है और दूसरा गुरू वह होता है जोकि शिक्षा देता है। इसलिए आज वह मंच से घोषणा करते है कि ओलम्पिक पदक विजेता बजरंग पूनिया के 3 कोचों को हरियाणा सरकार चार-चार लाख रूपए से सम्मान के रूप में दिए जाएंगे।

पूनिया के लिए मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान
पहलवान बजरंग पूनिया को टोक्यो ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर 2.5 करोड़ की राशि नकद इनाम में दी जाएगी। साथ ही सरकारी नौकरी और एक प्लॉट भी 50% के कंसेशन पर मिलेगा। उनके खुड्डन गांव में एक इंडोर स्टेडियम बनाया जाएगा। यह घोषणा प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पहले ही कर चुके हैं।

खड्डन गांव पहुंचे सीएम खट्टर को सम्मानित करते लोग।
खड्डन गांव पहुंचे सीएम खट्टर को सम्मानित करते लोग।

ओलिंपिक और पैरालिंपिक में हरियाणा का प्रदर्शन शानदारः सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि टोक्यो में हुए ओलिंपिक और पैरालिंपिक खेलों में भारत का प्रदर्शन सराहनीय रहा है। हरियाणा के खिलाड़ी लगातार खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। ओलंपिक में भी कुल 7 पदकों में से 3 पदक हरियाणा के खिलाड़ियों ने प्राप्त किए। इसके अलावा, चौथे स्थान पर रही महिला हॉकी टीम की 9 खिलाड़ियों को भी राज्य सरकार ने 50-50 लाख रुपए की राशि देकर उनका सम्मान किया। पैरालंपिक खेलों में कुल 19 मेडल आए हैं, जिनमें से 6 हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते हैं। यह हरियाणा के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि पैरालिंपिक में पदक जीतने में भारत का स्कोर अब तक का सर्वाधिक स्कोर रहा है। हरियाणा की उपलब्धि भी आज तक की सवार्धिक रही है।

मुख्यमंत्री से बातचीत करते बजरंग पूनिया।
मुख्यमंत्री से बातचीत करते बजरंग पूनिया।

खुड्डन के किसानों को जल्द मिलेगा मुआवजा
सीएम ने इस मौके पर मंच से नौजवानों की शिक्षा, कला व कौशल पर हरियाणा सरकार पूरा ध्यान दे रही है। जिसके सार्थक परिणाम बहुत जल्द ही सामने आएगें। उन्होंने बजरंग पूनिया के पैतृक गांव खुड्डन के खेतों में भरे बरसाती पानी को लेकर कहा कि इसके लिए गिरदावरी के आदेश दे दिए गए है। किसानों का जो भी नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जाएगी। कार्यक्रम को खेल मंत्री संदीप सिंह, प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ व भाजपा सांसद डा.अरविंद शर्मा ने भी सम्बोधित किया।

बजरंग पूनिया की जीत से अभिभावक बेहद खुश हैं।
बजरंग पूनिया की जीत से अभिभावक बेहद खुश हैं।

नंबर वन रह चुके हैं बजरंग पूनिया
बजरंग पूनिया किसी भी श्रेणी में दुनिया के नंबर 1 पहलवान बनने वाले पहले भारतीय हैं। इसके अलावा दो विश्व चैंपियनशिप पदक और प्रसिद्ध जर्मन लीग में कुश्ती करने वाले भी पहले भारतीय हैं। हरियाणा के झज्जर जिले के साधारण परिवार से आने वाले बजरंग पूनिया के पास शुरुआत में क्रिकेट और बैडमिंटन के सामान खरीदने के पैसे नहीं होते थे। उस समय बच्चे कबड्डी और रेसलिंग में बहुत रुचि रखते थे और पूनिया के गांव में इसका प्रचलन था। हालांकि उनके पिता बलवान सिंह भी रेसलर थे और युवा बजरंग उनकी कुश्ती देखने के लिए स्कूल तक छोड़ देते थे। बजरंग ने कहा भी था कि मुझे नहीं पता कि कब कुश्ती मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गई।

विरासत में मिली पहलवानी
बजरंग पूनिया का जन्म 26 फरवरी 1994 को हरियाणा के झज्जर गांव में हुआ। इनके पिता का नाम बलवान सिंह पूनिया है। इनके पिता एक पेशेवर पहलवान हैं। इनकी माता का नाम ओम प्यारी है। इनके भाई का नाम हरिंदर पूनिया है। बजरंग को कुश्ती विरासत में मिली। इनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। बजरंग की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही पूरी हुई। बजरंग ने 7 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की और उन्हें उनके पिता का बहुत सहयोग मिला। बजरंग ने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक से ग्रेजुएशन किया। पूनिया ने भारतीय रेलवे में टिकट चेकर (TTE) का भी काम किया।

टोक्यो ओलिंपिक में पहलवान से भिड़ते बजरंग पूनिया।
टोक्यो ओलिंपिक में पहलवान से भिड़ते बजरंग पूनिया।

ओलिंपिक खेलने से पहले रोम में गोल्ड जीता
बजरंग पूनिया ने सोनीपत में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के रीजनल सेंटर से ट्रेनिंग की है। उनका परिवार भी सोनीपत में रहता है। इसी साल मार्च में रोम में हुई माटेओ पेलिकोन रैंकिंग सीरीज में गोल्ड जीतकर बजरंग पूनिया ने यह जता दिया कि वे ओलिंपिक के लिए तैयार हैं। बजरंग वर्ल्ड अंडर-23 चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स, एशियन चैंपियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीत चुके हैं। उन्हें पद्मश्री, अर्जुन पुरस्कार और खेल रत्न से सम्मानित किया जा चुका है।

2013 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीता पहला मेडल
बजरंग ने सीनियर लेवल पर अपना पहला वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल 2013 में 60 किलोग्राम वेट कैटेगरी में जीता था। उन्होंने हंगरी में हुए इस टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। 2018 में उन्होंने बुडापेस्ट में हुई वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनिशप में सिल्वर जीता। 2019 में भी नूर सुल्तान में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में बजरंग ने सिल्वर मेडल जीता।

टोक्यो से भारत लौटने पर बजरंग पूनिया का शानदार स्वागत किया गया था।
टोक्यो से भारत लौटने पर बजरंग पूनिया का शानदार स्वागत किया गया था।

एशियन चैंपियनशिप में अब तक सात मेडल
बजरंग एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में अब तक 7 मेडल जीत चुके हैं। उन्होंने इस साल अल्माटी में हुई एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था। इससे पहले 2020 में दिल्ली में और 2014 में अस्ताना में हुई चैंपियनशिप में भी उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था। 2019 में शिआन और 2017 दिल्ली में गोल्ड मेडल हासिल किया। 2018 बिश्केक और 2013 दिल्ली में उन्हें ब्रॉन्ज मेडल से संतुष्ट होना पड़ा था।

कॉमनवेल्थ में जीते दो मेडल
बजरंग कॉमनवेल्थ गेम्स में दो मेडल जीत चुके हैं। 2018 में गोल्ड कोस्ट में उन्होंने 65 किलो वेट में गोल्ड जीता। 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

एशियन गेम्स में भी दो मेडल
बजरंग दो बार एशियन गेम्स में मेडल हासिल कर चुके हैं। उन्होंने 2018 जकार्ता में 65 किलो वेट में गोल्ड जीता और 2014 इंचियोन में 61 किलो वेट में सिल्वर।

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