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संकट में ,सौदेबाजी:दो माह पहले 500 रुपए में बिक रहा ऑक्सीमीटर 1400 में बेच रहे, ग्लव्ज का पैकेट भी 300 से 700 का किया

रेवाड़ीएक महीने पहले
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थोक में मास्क 9 का था तो सरकार ने 10 रुपए तय किए, 3 रुपए का है तब भी 10 रुपए ले रहे - Dainik Bhaskar
थोक में मास्क 9 का था तो सरकार ने 10 रुपए तय किए, 3 रुपए का है तब भी 10 रुपए ले रहे
  • ऑक्सीजन कंसेनट्रेटर ढूंढ़े से नहीं मिल रहा, दिल्ली जैसे शहरों में 1.50 रुपए लाख मांग रहे
  • थोक में मास्क 9 का था तो सरकार ने 10 रुपए तय किए, 3 रुपए का है तब भी 10 रुपए ले रहे

कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ते ही ऑक्सीजन सिलेंडरों से लेकर मरीज के इलाज में मददगार उपकरण दाम से दोगुना या उससे भी महंगे बिक रहे हैं। दो माह पहले तक 500 रुपए से भी कम में बिकने वाले ऑक्सीमीटर की कीमत अब 1400 रुपए है। इसके असली होने या कितने लंबे समय तक सटीक परिणाम देगा इसकी भी कोई गारंटी नहीं। पूछने पर खुद मेडिकल स्टोर संचालक बता देते हैं कि कंपनी के ऑक्सीमीटर उपलब्ध नहीं है, केवल चाइनीज माल ही मिल रहा है।

होम आइसोलेशन में रहने वाले संक्रमितों को ऑक्सीमीटर के साथ मास्क, स्टीमर व ग्लव्ज की भी जरूरत पड़ रही है। भाव इनके भी बढ़े हुए हैं। 250-300 रुपए में बिकने वाला मास्क का डिब्बा दोगुना से ज्यादा दामों में बेचा जा रहा है। स्टीमर व ग्लव्ज भी अब महंगे पड़ रहे हैं। देशभर में ऑक्सीजन की मारामारी के चलते अचानक ही ऑक्सीजन कंसनट्रेटर को भी संक्रमितों के तीमारदार लोग ढूंढ़ते घूम रहे हैं, मगर छोटे शहराें के बाजारों में तो इसकी उपलब्धता ही नहीं है।

बड़े शहरों में इसकी कीमत लाखों में पहुंच रही है, उसमें भी कई-कई दिनों की वेटिंग चल रही है। अस्पतालों में इलाज का हजारों-लाखों का बिल और उस पर इन उपकरणों के दामों पर नियंत्रण न होना आम आदमी की पीड़ा बढ़ाने वाला है। प्रशासन ने अस्पतालों और मेडिकल स्टोर पर रेट लिस्ट चस्पा करने के आदेश जरूर दिए हैं, मगर जांच के कालाबाजारी रोकने को कहीं छापेमारी नहीं की जा रही।

जानिए... किन दरों में बिक रहे थे उपकरण, अब क्या स्थिति

ऑक्सीमीटर : मरीज को ऑक्सीजन लेवल चेक करने के लिए ये काफी मददगार है। इससे आपको ये अंदाजा हो जाता है कि कब आपको |क्सीजन की जरूरत है और कब अस्पताल जाना चाहिए। एक महीने पहले कंपनी के ऑक्सीजन मीटर की कीमत 700 रुपए तथा चाइनीज की कीमत 500-600 तक थी। अब चाइनीज भी 1100 से 1400 तक बिक रहा है।

ऑक्सीजन कंसेनट्रेटर: किसी मरीज को ऑक्सीजन की कमी हो और सिलेंडर उपलब्ध न हो तो मशीन का इस्तेमाल किया जाता है, जोकि वातावरण से खुद-ब-खुद ऑक्सीजन उत्पन्न करती है। दो माह पहले तक इसकी डिमांड बहुत कम थी। दिल्ली के वैभव ने बताया कि पहले दिल्ली-गुड़गांव में 40-50 हजार में बिक रही थी। उनके मामा के लिए इसकी जरूरत पड़ी तो अब 1.50 लाख रुपए मांगे रहे हैं। तुरंत उपलब्ध ये भी नहीं होगी।

स्टीमर: संक्रमण को कम करने और फेफड़ों की इंफेक्शन क्लीयर करने के लिए स्टीम (भाप) लेना महत्वपूर्ण है। कई बार डॉक्टर भी इसकी सलाह देते हैं। इसकी कीमत 200 रुपए तक थी, जो कि अब ग्राहक का मूड देखकर 250 से 350 रुपए तक में बेच दी जाती है।

ग्लव्स : महीनेभर पहले तक ग्लव्स के 100 पीस के एक डिब्बे का रेट 250 रुपए से 300 रुपए तक था। अब अचानक से इसकी डिमांड में भी खासा उछाल आया है। हालांकि इसकी कमी जैसी भी कोई बात नहीं है। फिर भी इन परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए इसके रेट अधिक कर दिए गए हैं। अब रिटेल में 700 रुपए का डिब्बा बिक रहा है।

सर्जिकल मास्क : 2020 में कोरोना ने रफ्तार पकड़ी तो सर्जिकल मास्क के थोक के रेट ही 9 रुपए तक पहुंच गए थे, इसलिए सरकार ने इसकी अधिकतम कीमत 10 रुपए तय कर दी थी। इसके होलसेल रेट 2 रुपए आए तो भी 10 रुपए में बेचा गया और अब करीब 3 रुपए है तो भी 10 में ही बेचा जा रहा है। मेडिकल स्टोर संचालक इसकी कई वैरायटी का हवाला देकर मनमर्जी के दामों में बेच देते हैं।

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