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सुविधाओं का टोटा:पांच महीने से सीबीसी मशीन खराब, हर रोज 300 मरीजों को निजी लैबों से करवाने पड़ रहे टैस्ट, फिर भी अस्पताल प्रशासन गंभीर नहीं

सिरसाएक महीने पहले
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सिरसा। सीबीसी मशीन में गड़बड़ी से मरीजों को बाहर से करवानी पड़ती है जांच। - Dainik Bhaskar
सिरसा। सीबीसी मशीन में गड़बड़ी से मरीजों को बाहर से करवानी पड़ती है जांच।
  • सरकारी अस्पताल में हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट समेत कई प्रकार की फ्री जांच के दावे फेल

जिले के सिविल अस्पताल में सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट्स) जांच मशीन कई माह से खराब है। मशीन के खराब होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। बीमारियों की जांच को लेकर मरीजों को निजी लैबों पर जाना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना 300 से ज्यादा टेस्ट होते हैं, इस मशीन के खराब होने से मरीजों को जांच रिपोर्ट की दिक्कत आ रही है।

गर्मी के मौसम में अस्पताल की ओपीडी लगातार बढ़ी है । अस्पताल की एक मात्र लैब में सीबीसी मशीन खराब होने से लैब की व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ गई है। जांच के लिए लैब में पहुंच रहे लोगों को वापस लौटना पड़ रहा है। लैब में कार्यरत स्टाफ सदस्यों का कहना है कि लैब में रखी मशीनों को चलाने के लिए हर समय 20 डिग्री के आसपास तापमान का होना जरूरी है। लेकिन सीबीसी मशीन को लैब से अलग रखा गया है।

जहां सैंपलिंग की व्यवस्था की गई थी । वहां तापमान बढ़ने के कारण बार-बार मशीन खराब हो रही है। जबकि पूरी लैब सैकेंड फ्लोर पर शिफ्ट है । लेकिन लैब से अलग खराब पड़ी सीबीसी मशीन का खामियाजा अस्पताल में मुफ्त इलाज करवाने आए मरीजों को भुगतना पड़ता है । उन्हें बार- बार चक्कर लगाने पड़ते हैं ।

सरकारी अस्पताल में मुफ्त होने वाले टैस्ट का बाहर निजी लैब में देना पड़ रहा 250 रुपये तक चार्ज

सिविल अस्पताल में सीबीसी मशीन है, जहां मरीजों को मुफ्त हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट, डब्ल्यूबीसी और इंफेक्शन सहित कई प्रकार की जांच का लाभ मुफ्त देने का प्रावधान है । लेकिन पिछले कई महीनों से अस्पताल में यह जांच अधर में लटक जाती है।

मरीजों को प्राइवेट लैबों में 250 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, महिला मरीज कौशल्या देवी, पूनम, ममता व जसपाल ने बताया कि सीबीसी मशीन खराब होने से टेस्ट नहीं हो पाए । बाहर से 300 रुपये टैस्ट के खर्च करने पड़ते हैं। इसलिए अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि मशीन को दुरूस्त करवाए ।

कंपनी को करवाया अवगत, नहीं हो रहा समाधान

सीबीसी मशीन बारे डॉ. सोनल ने बताया कि संबंधित कंपनी के साथ पत्राचार किया है। यह मशीन अक्टूबर से खराब है, हालांकि किसी तरह इसको चलाया जाता है। मगर किसी समय लोडिंग अनलोडिंग सिस्टम में गड़बड़ी शो करती है। ऐसे में काफी बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन को इस बारे में अवगत करवाया गया है।

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