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  • Whether There Is Pain In Winter, Thyroid Or Vomiting diarrhoea, More Than Half The Medicines Have To Be Bought From Outside Stores.

खोखले दावे:जाड़ में दर्द, थायराइड या फिर उल्टी-दस्त की हो समस्या, बाहर स्टोर से खरीदनी पड़ती हैं आधी से ज्यादा दवाइयां

सिरसा7 दिन पहले
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  • अस्पताल में तैनात एक फार्मासिस्ट ने बताया कि पैरासिटामोल स्टॉक में पहुंची है, मगर एंटीबायोटिक पूरे प्रदेश में खत्म

प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज के दावे करती है। लेकिन यहां दवाइयों की बेहद कमी है। अस्पतालों में एंटीबायोटिक तक का स्टॉक नहीं है। वेयरहाउस से सीरिंज तक नहीं पहुंचती हैं। जबकि सिविल अस्पताल में एंटीबायोटिक के अलावा सामान्य पेन किलर दवा समेत 70 कैटेगरी की दवाएं खत्म हैं। ओपीडी स्लिप में लिखी आधे से अधिक दवाइयां मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। जबकि कई मरीजों को एक दवाई तक नहीं मिलती है।

डाक्टर जिस दवाइयों को लिखते हैं, उनमें अधिकतर स्टॉक डिस्पेंसरी में उपलब्ध नहीं या जानबूझकर मरीजों को बाहर से दवाएं लेने पर मजबूर किया जाता है। दवाई लिखी पर्ची लेकर मरीज डिस्पेंसरी में जाते हैं, मगर उन्हें गोल दायरा लगाकर स्लिप थमा दी जाती है। उन्हें बताया जाता है यह दवाएं बाहर से मिलेंगी। कई मरीज किराया के पैसे जेब में रख इलाज करवाने पहुंचते हैं, ऐसे में उनको अस्पताल से बेरंग लौटना पड़ता है। क्योंकि बाहर निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने का पैसा उनके पास नहीं होता। अस्पताल की डिस्पेंसरी में लगभग 227 प्रकार की जीवन रक्षक दवाओं का स्टाक रहता है। लेकिन मौजूदा हालात यह हैं कि उनमें करीब 150 तरह की दवाइयां मौजूद हैं। जो दवाएं उपलब्ध है उनमें से कई का स्टाक भी बहुत कम मात्रा में है। अस्पताल में तैनात एक फार्मासिस्ट ने बताया कि पैरासिटामोल स्टॉक में पहुंची है, मगर एंटीबायोटिक पूरे प्रदेश में खत्म है।वेयरहाउस से सीरिंज नहीं आती हैं। लेकिन उसको लोकल परचेज किया जाता है।

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