प्रचलन:वर्मी कम्पोस्ट खाद के प्रयोग से धरती को बंजर होने से बचाएं, राज्य में तेजी से बढ़ रहा है ऑर्गेनिक खेती का चलन

गन्नौर6 महीने पहलेलेखक: कृष्ण धनखड़
  • कॉपी लिंक
गन्नौर | वर्मी कम्पोस्ट खाद दिखाते कॄषि अधिकारी संदीप बजाज। (इनसेट में) खाद तैयार होने के बाद। - Dainik Bhaskar
गन्नौर | वर्मी कम्पोस्ट खाद दिखाते कॄषि अधिकारी संदीप बजाज। (इनसेट में) खाद तैयार होने के बाद।

देश में ऑर्गेनिक खेती का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। ऑर्गेनिक खेती में प्रयोग होने वाला खाद भी आर्गेनिक ही होना चाहिए। इसके लिए केंचुआ खाद या वर्मी कंपोस्ट को सबसे उपयुक्त माना जाता है। इससे मिट्टी उपजाऊ होने के साथ फसल भी रोग से बचती है। इसे फसलों अवशेष व गोबर से बना सकते हैं। गन्नौर से कृषि विकास अधिकारी डॉ. संदीप बजाज ने बताया कि केंचुआ हमेशा ही किसान मित्र रहा है, लेकिन कीटनाशकों के प्रयोग के कारण इनकी तादात घट रही है।

यही वजह है कि खेत की मिट्टी से जीवांश खत्म हो रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अगर वर्मी कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल नहीं किया तो मिट्टी बंजर हो सकती है। उन्होंने बताया कि हम पर्यावरण सहयोगी तकनीकों का प्रयोग कर कृषि उत्पादन बढ़ाने की योजना पर कार्यरत हैं। लंबे समय तक रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से उत्पादन, उत्पाद की गुणवत्ता तथा भूमि पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने की विधि

  • वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए सबसे अच्छी विधि मेढ में बनाना है। इस में अच्छा वायु संचार होने से केंचुए की कार्य क्षमता बढ़ती है। इस में मेढ की लंबाई आवश्यकतानुसार, चौड़ाई 90 सेमी व ऊंचाई 60 सेमी हो।
  • सबसे नीचे 12-15 सेमी मोटी सरसों या भूसे की परत लगाते है।
  • इस परत के ऊपर 10-12 सेमी मोटी गोबर की परत लगाते हैं।
  • गोबर की परत के ऊपर 30-45 सेमी मोटी फसल अवशेष या कूड़ा-कर्कट की परत लगाते है।
  • इस परत पर 3-4 सेमी मोटी मिट्टी की परत लगाई जाती है।
  • सबसे ऊपर 5-6 सेमी मोटी गोबर की परत लगाई जाती है।
  • केंचुए लगाने के बाद मेढ में डाली सामग्री को पुरानी बोरी से ढक दें। केंचुए अंधेरे में काम करते है। इसलिए कम्पोस्ट की सामग्री को अच्छी तरह ढकना जरूरी है।

सामग्री

  • फसल अवशेष व कूड़ा-कर्कट 20%
  • गोबर (15-20 दिन पुराना या ताजा) 70%
  • खेती की मिट्टी 10%
  • ढकने के लिए पुरानी बोरी
  • पानी

खाद के लाभ

  • पेड़-पौधे, फलदार वृक्षों, सब्जियों एवं अन्य फसलों के लिए सम्पूर्ण व सन्तुलित आहार है।
  • वर्मी कम्पोस्ट पौधों की वृद्धि में सहायक है, जिससे अच्छा उत्पादन होता है यह खरपतवारों, कीटों पर होने वाले खर्च में भी कमी लाता है।
  • इससे भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती है। भूमि की भौतिक दशा में भी सुधार आने से रासायनिक व जैविक प्रक्रियाएं तेजी से होती हैं।
  • इसके प्रयोग से बहुत से कार्बनिक कचरे से मुक्ति मिलतीहै, जो पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है।
खबरें और भी हैं...