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बरोदा में उपचुनाव:कांग्रेस गढ़ बचाने, भाजपा पहली बार कमल खिलाने, जजपा और इनेलो प्रतिष्ठा बचाने को लड़ रही लड़ाई

गोहानाएक महीने पहले
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  • सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी
  • सात बार देवीलाल की पार्टी , कांग्रेस ने 5 बार जीत दर्ज की हैं

बरोदा उपचुनाव में सभी पार्टियों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। मतदाताओं को रिझाने के लिए पार्टियां कोई मौका नहीं छोड़ रहीं। कांग्रेस अपना गढ़ बचाने के लिए लड़ाई लड़ रही है।

भाजपा तीन अध्यादेश का विरोध कर रहे विपक्ष को जवाब देते हुए पहली बार कमल खिलने के लिए दांव-पेंच लगा रही है। जजपा और इनेलो की भी इस चुनाव से प्रतिष्ठा जुड़ी हुई हैं। यह सीट पर देवीलाल का भी प्रभाव रहा है।

दोनों के बीच देवीलाल के वोट बैंक पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए लड़ाई लड़ रही है। जजपा नेता और कार्यकर्ता हुड्डा का गढ़ तोड़कर देवीलाल के वोट बैंक पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सहयोगी पार्टी भाजपा के साथ चुनाव प्रचार में डटे हुए हैं।

बरोदा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी श्रीकृष्ण हुड्डा लगातार तीसरी बार जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। इसलिए कांग्रेस इस सीट को अपना ही मानकर लड़ रही हैं। वैसे भी बरोदा हलका पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा का गढ़ माना जाता है।

इसलिए इस सीट पर पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा लगातार हलके के गांवों में पहुंच रहे हैं। वे लोगों को पिछले 10 साल में कराएं गए कार्य गिनाने के साथ अपनापन भी दिखाते हुए भावनात्मक रूप से लोगों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

गौरतलब है कि भाजपा-जजपा गठबंधन ने भाजपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। भाजपा के साथ जजपा नेता और कार्यकर्ता भी चुनाव प्रचार में लगे लगे हैं।

देवीलाल की पार्टी लगातार 7 बार जीती

बरोदा विधानासभा क्षेत्र में पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल का भी प्रभाव रहा है। उनकी पार्टी लगातार सात बार चुनाव जीती है। वर्ष 1977 में जनता पार्टी से भलेराम विधायक बने थे।

इसके बाद 1982 में फिर से भलेराम, 1987 में कृपाराम पूनिया, 1991, 1996 व 2000 में लगातार रमेश खटक और 2005 में रामफल चिड़ाना विधायक बने। ये सभी देवीलाल की पार्टी के प्रत्याशी थे। जजपा और इनेलो के नेता देवीलाल के नाम पर वोट मांगते हैं।

उनका कहना है कि देवीलाल ने किसानों के विकास के लिए कार्य किया है। फिलहाल जनता का मूढ कुछ अलग है।

कांग्रेस पांच बार पहुंची, भाजपा से नहीं पहुंचा कोई विधायक

अब तक बरोदा से 13 विधायक चुने गए। सात बार देवीलाल की पार्टी से, कांग्रेस ने 5 बार जीत दर्ज की हैं। वर्ष 1967 में रामधारी, 1972 में श्यामचंद और 2009, 2014 और 2019 में श्रीकृष्ण हुड्डा ने जीत दर्ज की थी।

एक बार विहपा से 1968 में श्यामचंद ने जीत दर्ज की थी। भाजपा का अभी तक कोई विधायक विधानसभा नहीं पहुंचा है। जबकि इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए भाजपा ने वर्ष 2014 में बड़े नेता पर दांव लगाया था। जो सफल नहीं हुआ था।

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