हादसे की आशंका:एचवीपीएन ने रोड बनने के 5 वर्ष बाद ऊंचाई कम करने के लिए पीडब्ल्यूडी को लिखा पत्र

गोहानाएक वर्ष पहले
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  • ऊंचाई अधिक होने से रोड 132 केवी लाइन की रेंज में है, 2015 में रोड निर्माण के समय डंपर बिजली की तारों से टकरा गया था

एचवीपीएन ने पीडब्ल्यूडी को रूखी-छिछड़ाना रोड की ऊंचाई कम करने के लिए पत्र जारी किया है। पीडब्ल्यूडी ने इस रोड की वर्ष 2015 में नवनिर्माण के दौरान ऊंचाई बढ़ाई थी। ऊंचाई बढ़ने से रोड ऊपर से गुजरने वाली 132 केवी बिजली लाइन के दायरे में आ गया है। एचवीपीएन द्वारा जारी किए गए पत्र में रोड और तारों की दूरी की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर पीडब्ल्यूडी ने भी एचवीपीएन को पत्र जारी कर रोड की कितनी ऊंचाई कम करने के बारे में पूछा है। 

पीडब्ल्यूडी ने वर्ष 2015 में रूखी से छिछड़ाना तक रोड का नवनिर्माण करवाया था। नवनिर्माण के दौरान पीडब्ल्यूडी ने मिट्‌टी डालकर रोड की ऊंचाई बढ़ा दी। रोड के ऊपर से 132 केवी बिजली की दो लाइनें गुजरती हैं। एक लाइन 132 केवी पावर हाउस शहर और दूसरी लाइन 132 केवी पावर हाउस भंडेरी के लिए है।  रोड और तारों की दूरी कम होने से रोड पर हादसा होने की आशंका बढ़ी हुई है। यह रोड पानीपत-रोहतक हाईवे को महम रोड से भी जोड़ता है।

इसके चलते यहां से वाहनों की आवाजाही भी अधिक होती है। तारों की कम ऊंचाई के कारण खुले वाहन और वाहनों की छत पर बैठकर सफर करने से लोग लाइन के संपर्क में आकर करंट से झुलस सकते हैं। रोड पर बिजली लाइन से हादसा होने से रोकने के लिए एचवीपीएन ने रोड बनने के 5 वर्ष बाद पीडब्ल्यूडी को पत्र जारी कर रोड की ऊंचाई कम करने को कहा है।  

नियम : तारों की ऊंचाई करीब 17 फीट तक होनी चाहिए
निगम की 132 केवी लाइन में हाई वोल्टेज करंट होता है। नियमानुसार जमीन से इन तारों की ऊंचाई करीब 17 फीट तक होनी चाहिए। रोड की ऊंचाई बढ़ने से यह दूरी 15 फीट रह गई है। रोड के नवनिर्माण के दौरान एचटी लाइन के नीचे से निर्माण कार्य करने के लिए निगम की मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। निगम तारों की ऊंचाई बढ़ाने के लिए एजेंसी को खर्च का एस्टीमेट देता है, जिसका भुगतान एजेंसी को ही करना होता है। तारों की ऊंचाई बढ़ने के बाद ही उसके नीचे निर्माण कार्य किया जा सकता है। 

बिना मंजूरी के बढ़ाई रोड की ऊंचाई
निगम जेई पवन कुमार का कहना है कि पीडब्ल्यूडी ने रूखी-छिछड़ाना रोड का नवनिर्माण निगम की मंजूरी के बिना किया हुआ है। अधिकारियों ने निगम को रोड निर्माण को लेकर सूचित भी नहीं किया था। जानकारी के अभाव में एजेंसी ने रोड की ऊंचाई अधिक कर दी। इससे रोड एचटी लाइन की रेंज में आ गया। एचवीपीएन से पूछा है कितनी कम करनी है ऊंचाई

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