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मिली राहत:मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन बेड 85, वेंटिलेटर 66, सिविल अस्पताल में 90 प्रतिशत बेड खाली

गोहाना25 दिन पहले
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नागरिक अस्पताल का कोविड वार्ड, जिसमें एक मरीज ही भर्ती है। - Dainik Bhaskar
नागरिक अस्पताल का कोविड वार्ड, जिसमें एक मरीज ही भर्ती है।
  • कोरोना मरीज कम आने से अस्पतालों में ओपीडी शुरू

कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा मई माह में जिस तेजी से बढ़ा था, वह उतनी ही तेजी से कम हो गया। मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर बेड के लिए जो मारामारी थी, वह मरीजों का आंकड़ा कम होने से खत्म हो गई। अब मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन बेड करीब 85 प्रतिशत और वेंटीलेटर बेड करीब 66 प्रतिशत खाली हैं। नागरिक अस्पताल गोहाना में 90 प्रतिशत बेड खाली पड़े हुए हैं।

कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की अधिक जरूरत पड़ी। तबीयत बिगड़ने पर मरीज अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड तलाशते रहें, लेकिन अस्पतालों में बेड फुल होने के कारण कुछ मरीजों को बेड नहीं मिल पाया था। इस समस्या का समाधान करने के लिए सरकार ने अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाई थी।

मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट (एलओपी) लगाकर ऑक्सीजन बेड की संख्या बढ़ाकर 300 कर दी गई थी। इसके अलावा आयूसीयू में भी 50 वेंटिलेटर बेड हैं। कॉलेज में करीब 254 बेड खाली पड़े हुए हैं। इसी तरह से आयूसीयू में भी 33 वेंटिलेटर बेड खाली हैं। इसी तरह से स्वास्थ्य विभाग ने नागरिक अस्पताल में भी 10 बेड का वार्ड बनाया था। वार्ड में केवल एक महिला मरीज ही भर्ती हैं। शेष 9 बेड खाली पड़े हुए हैं।

कॉलेज में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर बेड बढ़ेंगे

सरकार कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी कर रही है। कॉलेज के सभी 500 बेड पर ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य चल रहा है। इसके साथ ही सरकार ने वेंटिलेटर बेड 50 से बढ़ाकर 100 करने के निर्देश दिए हुए हैं। सभी बेड पर मरीजों को ऑक्सीजन जरूरत के हिसाब से मिले, कॉलेज में हवा से ऑक्सीजन बनाने वाले दो प्लांट लगाने का कार्य किया जा रहा है।

एक प्लांट जल्द ही तैयार हो जाएगा। जबकि दूसरा प्लांट भी 15 दिन में चालू करने का लक्ष्य रखा है। आइसोलेट सेंटर में भर्ती नहीं हुए मरीज : होम आइसोलेट किए जाने वाले जिन मरीजों के घर पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं है, उन्हें आइसोलेट करने के लिए उपमंडल में करीब 26 आइसोलेट सेंटर बनाए थे। इन सेंटरों पर स्टॉफ की ड्यूटी लगाई हुई हैं। टेस्टिंग की सुविधा भी सेंटर पर दी गई थी। सेंटर पर भी मरीज भर्ती नहीं है।

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