लेटलतीफी:रेलवे व सिंचाई विभाग की टीम करेगी भूमिगत माइनर निर्माण की साइट का निरीक्षण

गोहाना21 दिन पहले
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  • रेलवे की एनओसी के इंतजार में करीब एक वर्ष से अटका माइनर का निर्माण, माइनर के निर्माण पर 3.11 करोड़ रुपए होंगे खर्च

बुटाना माइनर के निर्माण के लिए रेलवे और हाईवे अथॉरिटी ने एनओसी नहीं दी है। एनओसी नहीं मिलने से भूमिगत माइनर का निर्माण कार्य करीब एक वर्ष से रुका हुआ है। इस लेने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने रेलवे को पत्र लिखकर साइट का निरीक्षण करने के लिए समय मांगा है।

रेलवे और सिंचाई विभाग के जाॅइंट टीम रेलवे के क्षेत्र में निर्माणाधीन माइनर की साइट का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण होने के बाद ही रेलवे सिंचाई विभाग को निर्माण के लिए एनओसी देगा। माइनर के निर्माण कार्य पर करीब 3.11 करोड़ रुपए खर्च होने हैं।

बरोदा और बुटाना में हजारों एकड़ कृषि भूमि को सिचाई के लिए नहरी पानी नहीं मिलता है। वहां के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों पर निर्भर रहना पड़ता है। ट्यूबवेल से फसलों की सिंचाई में खर्च अधिक आता है। इससे किसानों को कम आय होती है।

किसानों द्वारा लंबे समय से सिंचाई विभाग के अधिकारियों से माइनर तैयार कराने की मांग की जा रही थी। विभाग के अधिकारियों ने वर्ष 2018 में क्षेत्र का निरीक्षण कर सब-माइनर की मंजूरी दी थी। अधिकारियों ने अब माइनर का निर्माण कार्य शुरू करवाया हुआ है। भूमिगत माइनर रेलवे लाइन और हाईवे के नीचे से गुजरनी है। इसके लिए रेलवे और हाईवे अथॉरिटी की एनओसी लेना अनिवार्य है।

सिंचाई विभाग को दोनों ही विभागों से एनओसी नहीं मिली है, जिसके चलते माइनर का निर्माण कार्य लंबे समय से रुका हुआ है। माइनर का निर्माण कार्य शुरू करने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार एनओसी लेने के लिए जल्दी ही रेलवे की टीम के साथ मिलकर निर्माणाधीन साइट का निरीक्षण किया जाएगा।

बरोदा व बुटाना की 2472 एकड़ जमीन को मिलेगा नहरी पानी

माइनर का निर्माण कार्य पूरा होने पर बरोदा और बुटाना गांवों की करीब 2472 एकड़ भूमि को सिंचाई के लिए नहरी पानी मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि माइनर तैयार होने से दोनों गांवों के किसानों को फायदा होगा। खेतों की सिंचाई नहरी पानी से होने से भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी। इससे फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा।

5.5 क्यूसेक माइनर की क्षमता

अधिकारियों के अनुसार माइनर की लंबाई करीब 5.5 किलोमीटर है। किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने के लिए माइनर की क्षमता 5.5 क्यूसेक क्षमता रखी है। माइनर भूमिगत होने के कारण पानी की चोरी भी नहीं हो सकेगी।

एनओसी के लिए शुरू की प्रक्रिया

  • रेलवे और हाईवे की एनओसी नहीं मिलने से बरोदा-बुटाना माइनर का निर्माण बंद है। एनओसी की प्रक्रिया शुरू की हुई है। जल्दी रेलवे की टीम निर्माणाधीन साइट का निरीक्षण करेगी। - रजीत , एसडीओ, सिंचाई विभाग, गोहाना।
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