किसान हो रहे परेशान:अनाजमंडी में निर्माणाधीन शेड परिसर में पड़ी है मिट्टी

गोहाना10 दिन पहले
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नई अनाज मंडी परिसर में पड़ी मिट्टी के पास फसल फैलाते हुए मजदूर। - Dainik Bhaskar
नई अनाज मंडी परिसर में पड़ी मिट्टी के पास फसल फैलाते हुए मजदूर।
  • फसल में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण सुखाने के लिए परिसर में फैलानी पड़ती है धान

नई अनाज मंडी में फसल डालने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। मंडी परिसर में निर्माणाधीन शेड परिसर में मिट्टी पड़ी हुई है। सफाई नहीं होने के कारण किसानाें काे मिट्टी के ढेरों के पास ही अपनी फसल डालनी पड़ रही है। मार्केटिंग बोर्ड ने धान सीजन से पहले मंडी परिसर में शेड का निर्माण कार्य शुरू करवाया था।

धान सीजन शुरू होने से बोर्ड मंडी परिसर में शेड का फाउंडेशन ही तैयार कर पाया है। धान की आवक शुरू होने पर मार्केट कमेटी अधिकारियों ने निर्माण कार्य बंद करवा दिया। एजेंसी ने शेड परिसर में पड़ी मिट्टी का उठान नहीं करवाया। परिसर में जगह-जगह मिट्टी फैली हुई है। अनाज मंडी में धान की आवक दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।

खेतों में पानी भरा होने के कारण फसल में नमी की मात्रा ज्यादा है। इसके कारण किसानों को अपनी फसल परिसर में डालने के बाद सुखाने के लिए फैलानी पड़ती है। परिसर में मिट्टी पड़ी होने के चलते किसानों को फसल फैलाने में परेशानी होती है।

एजेंसी को दिए हुए हैं निर्देश

अनाज मंडी परिसर में निर्माणाधीन शेड के पास पड़ी मिट्टी का उठान करवाने के लिए एजेंसी को पहले ही दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जल्दी ही मिट्टी का उठान करवा दिया जाएगा। प्रयास है कि सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। -जितेंद्र श्योराण, सचिव, मार्केट कमेटी, गोहाना

उपचारित बीज का प्रयोग करें किसान: मेहरा

गोहाना | कृषि विभाग से एसडीओ राजेंद्र मेहरा ने किसानों को बीज उपचार की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को बिजाई से पहले मिट्‌टी की जांच भी करवाने के लिए कहा, ताकि मिट्‌टी में पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में धान की कटाई का काम चला हुआ है। नवंबर गेहूं की बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है।

अच्छी पैदावार लेने के लिए किसान को उच्च गुणवत्ता के बीज का चयन करना चाहिए। बीज की बुआई से पहले उसे उपचारित करना अनिवार्य है। इसके लिए किसान एक ग्राम रैक्सिल प्रति किलो बीज को उपचारित करने के लिए प्रयोग कर सकते हैं। इससे बीज अंकुरित होने के बाद दीमक और अन्य बीमारियों से सुरक्षित रहता है। एसडीओ मेहरा ने किसानों को खेत में पराली व फसल अवशेष नहीं जलाने का भी संदेश दिया।

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