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किसान परेशान:पोर्टल पर पंजीकृत कीला नंबर और खेत में लगी फसल का नहीं हो रहा मिलान, किसानों को खाने पड़ रहे धक्के

गोहानाएक महीने पहले
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  • पंजीकृत कीला नंबर में दूसरी फसल लगी होने से ई-गिरदावरी में नहीं हुई वेरिफाई, मैसेज नहीं मिलने से अब किसानों हो रहे परेशानी

फसलों को एमएसपी पर बेचने के लिए मार्केट कमेटी मुख्यालय ने फसलों का पंजीकरण करवाने के लिए तीन बार अवसर दिए। किसानों को अपनी फसल का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर करवाना था। जानकारी के अभाव में सभी किसान अपनी फसलों का पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करवा पाए। अधिकारियों के अनुसार क्षेत्र में 9565 किसानों ने 38998 एकड़ में लगी हुई फसल का पंजीकरण करवाया है।

जिन किसानों ने फसलों का पंजीकरण हो चुका है, ई-गिरदावरी के दाैरान खेत में लगी हुई फसल पंजीकृत जमीन की फसल से अलग मिली। इसके चलते किसानों को मंडी में फसलें बेचने में परेशानी हो रही है। पोर्टल पर सही फसल दर्ज करवाने के लिए किसान मार्केट कमेटी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। कमेटी कार्यालय में प्रतिदिन 10 से 15 किसान मैसेज नहीं मिलने की शिकायत दर्ज करवा रहे हैं।

नई अनाज मंडी में धान, बाजरा और कपास की बिक्री चल रही है। मंडी में पीआर धान और बाजरा की खरीद सरकार द्वारा की जा रही है। सरकारी खरीद का लाभ लेने के लिए कमेटी मुख्यालय ने पोर्टल पर फसल का पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया हुआ है। फसलों के पंजीकरण के लिए मुख्यालय ने अगस्त माह में ही पोर्टल खोल दिया था। फसल सीजन शुरू होने तक मुख्यालय द्वारा तीन बार पोर्टल खोला गया है। पोर्टल खुलने पर किसानों ने खेत में लगी फसल का पंजीकरण करवा दिया।

अधिकांश किसानों ने पोर्टल पर जो कीला नंबर पंजीकृत करवाया, गिरदावरी के दौरान खेत में उस कीला नंबर पर दूसरी फसल लगी हुई मिली। इसके चलते पटवारियों ने केवल उतनी ही फसल को वेरिफाई किया, जितनी पोर्टल पर पंजीकृत कीला नंबर में मिली। खेत में लगी फसल और पोर्टल पर पंजीकृत फसल का मिलान नहीं होने के चलते किसानों के पास मंडी में फसल लेकर आने के लिए मैसेज नहीं पहुंच रहे हैं। फसल लाने का मैसेज नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। किसान पोर्टल पर पंजीकृत कीला नंबर में संशोधन करने की मांग की।

तीन बार खोला गया पोर्टल

मार्केट कमेटी मुख्यालय ने फसलों का पंजीकरण करवाने के लिए तीन बार पोर्टल खोला था। पहली बार पांच अगस्त से लेकर 30 सितंबर तक पोर्टल खुला रहा। पंजीकरण की संख्या कम होने पर मुख्यालय ने दूसरी बार दस अक्टूबर को पोर्टल खोला। पोर्टल 15 अक्टूबर को बंद हो गया। इसके बाद तीसरी बार 17 से 19 अक्टूबर तक पोर्टल खुला। तकनीकी कारणों के चलते पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हो सका।

उसने डेढ़ एकड़ में बाजरा की खेती की हुई है। समय रहते पोर्टल पर पंजीकरण भी करवा दिया था। बाद में ई-गिरदावरी के दौरान अधिकारियों ने केवल एक एकड़ को ही वेरिफाई किया। कमेटी से पांच क्विंटल बाजरा लेकर आने का मैसेज आया हुआ है। बची हुई फसल को वह कहां लेकर जाएगा। -रामकुवार, किसान।

खेत में बाजरा की फसल लगाई हुई है। उसने पोर्टल पर बाजरा का ही पंजीकरण करवाया था। मैसेज नहीं आने पर वह कमेटी कार्यालय में आया। अधिकारी धान का पंजीकरण बता रहे हैं। जबकि उसके खेत में धान की फसल लगी ही नहीं है। पंजीकरण नहीं होने पर उसे बाजरा का एमएसपी रेट नहीं मिलेगा। -कुलदीप, किसान।

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