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किसान आंदोलन:महिलाएं बोलीं- कमजोर मत समझना, हिंदुस्तानी नारी हैं, किसी आतंकवादी की मां या बहन नहीं, हक के लिए लड़ना जानती हैं

राईएक महीने पहले
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  • कुंडली बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में महिला किसान दिवस पर महिलाओं के हाथ में रही मंच की कमान
  • तस्वीरों में देखिए; महिला किसान दिवस में अपनी जिम्मेदारी निभाती महिलाएं

महिला किसान दिवस पर आंदोलन की बागडोर महिलाओं के हाथ रही। कुंडली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में महिलाओं के हाथ ही मंच की कमान रही। पंजाब, हरियाणा, यूपी व तमिलनाडू की महिलाओं ने स्टेज से लेकर लंगर तक की सेवा की जिम्मेदारी संभाली हुई थी। किसान दिवस मनाने के लिए पहुंची महिलाओं के रहने व खाने की समुचित व्यवस्था की गई थी। मंच पर महिलाओं के ही भाषण हुए। महिलाएं ही आज भूख हड़ताल पर बैठी। पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने पोस्टर वॉर से सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

किसान आंदोलन का 54 वां दिन महिलाओं के नाम रहा। हरियाणा की महिलाएं अपने प्राचीन घाघरा चुनरी के वेश में आंदोलन स्थल पर गीत गाती हुई पहुंची। पंजाब की महिलाएं भी वाहे गुरुजी का खालसा, वाहे गुरूजी की फतेह के जयकारे लगाती हुई मुख्य मंच पर पहुंची। महिलाओं ने एक दूसरे को संगठित करने के प्रति जागरूक किया।

मंच से खबू दहाड़ी छात्रा

पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्रा मंच पर खूब दहाड़ी। रमन ने बोलते हुए कहा कि वे हिंदुस्तानी नारी है। सरकार नारी को कमजोर समझने की भूल न करें। यदि नारी दुर्गा है तो फिर राक्षसों का नरसंहार करने के लिए काली भी यही है। हमने किसान व जवान को जन्म दिया है। जब हमारी कोख से निकले बच्चे देश की रक्षा व खेतों में अन्न पैदा कर सकते हैं तो उनकी माताएं अपने हक के लिए कोई भी कदम उठाने में सक्षम हैं। किसान को जब आंतकवादी बोला जाता है तो उनका कलेजा फटने को आता हैं।

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