कमेटी नहीं MSP गारंटी कानून चाहिए:सिंघु बॉर्डर पर भूख हड़ताल पर बैठे 5 किसान बोले, विज बोले आंदोलन के पीछे कुछ और ताकतें

सोनीपत6 महीने पहले
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सिंघु बॉर्डर पर खुद को बेड़ियों में बांध भूख हड़ताल पर बैठे पांच किसान। - Dainik Bhaskar
सिंघु बॉर्डर पर खुद को बेड़ियों में बांध भूख हड़ताल पर बैठे पांच किसान।

सोनीपत में सिंघु-कुंडली बॉर्डर पर 5 किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी की मांग को लेकर हरियाणा-पंजाब के पांच किसानों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि ये उनका फैसला नहीं है। भूख हड़ताल किसान मोर्चा के मंच के पास ही चल रही है। इस बीच सोनीपत में गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि किसानों को भंगड़ा पाते हुए चले जाना चाहिए था। किसान आंदोलन के पीछे कुछ और ताकतें काम रही हैं।

सिंघु बॉर्डर पर किसान पिछले एक साल से मोर्चा लगाए हुए हैं। केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस ले चुकी है और अब MSP पर कमेटी की बात हो रही है। किसान मोर्चा भी केंद्र से बात करने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बना चुका है। ऐसे में कुछ किसान ऐसे हैं, जो कि किसी कमेटी की बजाय सीधे MSP को कानूनी दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।

मोर्चा के मंच के पास रविवार को पांच किसानों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। इन किसानों ने खुद को लोहे की बेल से बांधा है। भूख हड़ताल पर बैठे किसानों में अंबाला के नरेश सांगवान, कैथल के करतार सिंह, पटियाला के सरदार सतनाम सिंह, सोनीपत के राजेंद्र सांगवान और गुरदासपुर के सरदार विक्रमजीत सिंह शामिल हैं। इन किसानों का कहना है कि MSP पर कमेटी नहीं बल्कि गारंटी चाहिए।

सिंघु बॉर्डर पर पहुंच रहे किसानों के जत्थे।
सिंघु बॉर्डर पर पहुंच रहे किसानों के जत्थे।

दूसरी तरफ किसान मोर्चा ने किसानों की भूख हड़ताल से पला झाड़ा है। मोर्चा के नेताओं का कहना है कि ये किसान अपने बलबूते भूख हड़ताल पर हैं। मोर्चा की ओर से भूख हड़ताल जैसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।

कृषि मंत्री के बयान पर रोष

संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बयान को संज्ञान में लिया, जिसमें उन्होंने विरोध कर रहे किसानों से आंदोलन समाप्त कर वापस जाने की अपील की है। मोर्चा तोमर को याद दिलाया है कि कई मुद्दे अभी भी लंबित हैं और उन्हें 21 नवंबर को एसकेएम द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किया गया है।

संयुक्त किसान मोर्चा 21 नवंबर को प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र के आधार पर सरकार से लंबित मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार है तथा कल एसकेएम की बैठक में बातचीत के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन भी कर दिया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने उम्मीद जाहिर की है कि 7 दिसंबर के पहले केंद्र सरकार बातचीत कर सभी बचे हुए मुद्दों पर चर्चा करेगी।

सोनीपत में मंत्री अनिल विज का स्वागत करते नेता।
सोनीपत में मंत्री अनिल विज का स्वागत करते नेता।

विज बोले-किसान आंदोलन के पीछे कुछ और ताकतें

हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने सोनीपत में कहा कि तीनों कृषि कानून वापस हो गए है। किसानों को ढोल बजाते हुए, भांगड़ा करते हुए, जलेबियां खाते हुए चले जाना चाहिए था। लेकिन आंदोलन के पीछे कुछ ताकतें हैं जो खेल को खराब करना चाहती हैं।

विज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ लोकतंत्र का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए गुरुनानक देव जी के प्रकाशोत्सव पर कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा कर दी थी। कृषि कानून रद्द होने के बाद भी किसान वापस नहीं गए। किसानों ने कुछ मांगें रखी थी और कुछ नाम भी दिए हैं, जिन पर सरकार काम कर रही है।

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