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शिक्षा महंगी:अनलॉक में खर्चीली हुई ऑनलाइन शिक्षा, मोबाइल फोन व टैब की बढ़ी डिमांड, निजी से सरकारी स्कूलाें की ओर बढ़ा रूझान

सोनीपतएक वर्ष पहले
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सोनीपत. शहर में लैपटाॅप की खरीदारी करते हुए स्थानीय निवासी। - Dainik Bhaskar
सोनीपत. शहर में लैपटाॅप की खरीदारी करते हुए स्थानीय निवासी।
  • मां-बाप जाने लगे काम धंधों पर बाहर, फोन व नेट की दिक्कत बढ़ी

(अनिल बंसल) कोरोना संक्रमण में अभिभावकों की विद्यार्थियों को लेकर टेंशन काफी बढ़ गई है। अनलाॅक में मजबूरी बनी ऑनलाइन शिक्षा काफी खर्चीली हो गई है। शिक्षा लेे रहे बच्चे के एक घर में औसतन करीब 15 हजार रुपए का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूलों में भी ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो चुकी है तो वहीं माता-पिता अपने काम धंधों पर निकल रहे हैं। घर में बच्चों के लिए नए मोबाइल फोन या टैब खरीदने पड़ रहे हैं।

सोनीपत आईटी ट्रैडर्स एसोसिएशन के प्रधान राजीव गुप्ता ने बताया कि महज एक माह में शहरी बाजार में करीब 25 लाख से ज्यादा का व्यवसाय हुआ है। 250 के करीब दुकानें हैं। मौजूदा समय में हर दिन औसतन 25 से ज्यादा लैपटाप तथा 40 से ज्यादा टैब व 25 डेस्कटाप आदि की बिक्री हो रही है। जो अभिभावक ज्यादा खर्च करने में सक्षम नहीं है वे भी मजबूरी में पांच से सात हजार के मोबाइल अथवा सेकेंड हैंड सिस्टम खरीद बच्चों को दे रहे हैं। यह बाजार अगले दो महीनों में एक करोड़ तक पहुंचने की पूरी संभावना है।

डिमांड क्या बढ़ी महंगाई ने परेशान कर दिया
लैपटाॅप, मोबाइल, डेस्कटाप व टैबलेट को लेकर बढ़ी डिमांड से ज्यादातर दुकानों का स्टोक ही हुआ खत्म। कई दुकानों में ए थ्री व ए 5 लैपटाॅप की जबरदस्त किल्लत है। जिसके चलते 33 हजार का ए थ्री लैपटाप करीब 36 हजार तक पहुंची। वहीं ऑनलाइन शिक्षा की अहम जरुरत बने वैब कैमरा की भी काफी कमी है, जिसके चलते करीब चार सौ रुपए का आठ सौ में भी नहीं मिल रहा है। इस बीच जो लोग ऑनलाइन खरीद करने में विश्वास रखते हैं, वे भी दुखी है क्योंकि ऑनलाइन में लैपटाप हो या फिर कम्प्यूटर वे औसतन तीन से पांच हजार तक महंगे मिल रहे हैं। 

विद्यार्थियों को राहत देने की यह बनाई योजना : साउथ प्वाइंट के चेयरमैन दिलबाग खत्री ने कहा कि जिसमें दो या तीन भाई-बहन पढ़ रहे हैं, उसके बाद हर कक्षा को रिकाॅर्ड करवा रहे हैं, और वीडियो का लिंक उन अभिभावकों तक भेजते हैं जिनके पास ज्यादा संसाधन नहीं। वही टीडीआई इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल हरेन्द्र सिंह ने कहा कि वीडियो बनाकर भेजने से विद्यार्थी कभी भी वीडियो देखकर सीख सकता है।

महंगी ऑनलाइन शिक्षा के चलते निजी से सरकारी हुए विद्यार्थी
लॉकडाउन और उसके बाद ऑनलाइन एजुकेशन में ग्राफ गिरा, पहले सोनीपत रैंक में नंबर एक था, लेकिन बाद में पिछड़कर 11वें स्थान पर पहुंचा। अभिभावकों ने महंगी ऑनलाइन शिक्षा के चलते निजी को छोड़ सरकारी स्कूल में दाखिला करवा दिया। अब तक क्षेत्र में करीब ढाई हजार विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में दाखिला करवा चुके हैं।

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